कुंभ में बिछड़े भाई-बहनों के मिलने की कहानियां आपने फिल्मों में तो खूब देखी होंगी। लेकिन सोचिए, अगर पर्दे पर दिखाई जाने वाली ऐसी कहानी असल जिंदगी में सच हो जाए तो क्या होगा! ऐसी ही एक कहानी है भारत में जन्मी दो बहनों की “मीना गेलटिंक” और “मिनल टिजसेन” की। करीब 40 साल पहले दोनों को नीदरलैंड के दो अलग-अलग परिवारों ने गोद लिया था। दोनों अलग-अलग जिंदगी जीती रहीं, लेकिन किस्मत ने उन्हें 30 साल बाद फिर मिलाया। दिलचस्प बात ये है कि जिस लड़की से मिनल टिजसेन की मुलाकात कभी एक गोद लिए गए बच्चों के सम्मेलन में हुई थी, DNA टेस्ट ने उसी को उसकी सगी बहन साबित कर दिया।
क्या है मिनल और मीना की कहानी?
यह कहानी मीना गेलटिंक और मिनल टिजसेन की है। दोनों बहनों का जन्म भारत के एक परिवार में हुआ था, लेकिन किसी वजह से उन्हें अनाथालय में छोड़ दिया गया। इसके बाद नीदरलैंड के दो अलग-अलग परिवारों ने उन्हें गोद ले लिया। दोनों बहनों की परवरिश नीदरलैंड में अलग-अलग परिवारों में हुई। उन्हें अलग-अलग सरनेम मिले हालांकि उनके भारतीय नाम मीना और मिनल ही रहे, जो शायद उनके बायोलॉजिकल माता-पिता या अनाथालाय द्वारा दिए गए थे। बचपन से करीब 10 साल की उम्र तक दोनों अपने-अपने डच परिवारों के साथ नार्मल जिंदगी जीती रहीं। उस वक्त शायद उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि दुनिया के किसी कोने में उनकी अपनी सगी बहन भी मौजूद है।

कैसे मिलीं दोनों बहनें?
साल 1996 में नीदरलैंड में गोद लिए गए बच्चों का एक सम्मेलन आयोजित हुआ। मीना और मिनल भी अपने-अपने परिवारों के साथ इस सम्मेलन में पहुंचीं। जहां दोनों पहली बार मिलीं। बातचीत के दौरान उन्हें पता चला कि दोनों का जन्म भारत में हुआ था और उन्हें भारत से ही गोद लिया गया था। दोनों ने खूब बातचीत की और एक-दूसरे के साथ समय बिताया। इसके बाद दोनों अपने-अपने घर लौट गईं, लेकिन इस मुलाकात ने उनके मन में एक अलग तरह का खालीपन छोड़ दिया। कुछ समय तक दोनों फोन और चिट्ठियों के जरिए कॉन्टैक्ट में रहीं, लेकिन जिंदगी की हलचल के बीच धीरे-धीरे उनका संपर्क टूट गया जिसके बाद वो दोनों करीब 15 साल तक एक-दूसरे से दूर रहीं।
DNA टेस्ट ने खोला रिश्ते का राज
अप्रैल 2026 में मिनल ने अचानक My Heritage का DNA टेस्ट कराया। जब फोन पर टेस्ट का रिजल्ट आया, तो वह हैरान रह गईं। रिपोर्ट में उन्हें एक ऐसा मैच दिखाई दिया, जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। रिपोर्ट में लिखा था- “Sister”, यानी बहन। और उस बहन का नाम था मीना।
पहले तो मिनल को यकीन ही नहीं हुआ। जिस लड़की से वह सालों पहले एक सम्मेलन में दोस्त की तरह मिली थी असल में वही उसकी सगी बहन निकली। मिनल ने इन रिपोर्टस को कन्फर्म करने के लिए सोशल मीडिया पर मीना को खोजना शुरू किया। तस्वीरें देखते ही उन्हें यकीन होने लगा कि यह वही मीना है। सच्चाई सामने आते ही मिनल ने तुरंत अपनी बहन से संपर्क किया।
DNA रिपोर्ट के बाद कब मिलीं दोनों बहनें?
DNA रिपोर्टस के बाद 11 अगस्त को दोनों बहने नीदरलैंड्स में मिली। लेकिन इस बार एक-दूसरे से दोस्त की तरह नहीं, बल्कि सगी बहनों के रूप में। दोनों ने एक-दूसरे को भावुक होकर गले लगाया, और घंटों बातें कीं। जिसके बाद दोनों ने पहली बार बहनों के रूप में साथ में सेल्फी ली। उनके लिए यह मुलाकात सिर्फ खुशी का पल नहीं था, बल्कि उन्हें ऐसा लगा जैसे जिंदगी की एक अधूरी पहेली का सबसे जरूरी टुकड़ा मिल गया हो। आज मिनल फ्रांस में अपने पार्टनर और दो बेटों के साथ रहती हैं, जबकि मीना तीन बच्चों की मां हैं। दोनों अब रोज घंटों बात करती हैं, एक-दूसरे को मैसेजस करती हैं और उन सालों के खालीपन को भरने की कोशिश कर रही हैं, जो उन्होंने एक-दूसरे से दूर रहकर बिताए।
कहने को तो यह कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती है। इसमें वही सस्पेंस, ट्विस्ट और इमोशन है, जो किसी फिल्म की कहानी को यादगार बनाता है। फर्क सिर्फ इतना है कि मीना और मिनल की कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि असल जिंदगी की सच्ची कहानी है।दोनों बहनों ने शायद सपने में भी नहीं सोचा होगा कि दुनिया में कहीं उनकी कोई सगी बहन मौजूद है। एक-दूसरे को दोबारा पाने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि कुछ रिश्ते वक्त और दूरी से नहीं, बल्कि किस्मत से जुड़े होते हैं।