भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार की शुरुआत कमजोर रही। ग्लोबल स्तर पर बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और हेल्थकेयर सेक्टर को लेकर सामने आई नई रिपोर्ट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके चलते शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में नजर आए। बाजार में फिलहाल ‘रिस्क-ऑफ’ यानी सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट
मंगलवार के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 320 अंक टूटकर 78,204 के आसपास पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 50 करीब 94 अंक की गिरावट के साथ 24,490 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।
बाजार की कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी वजहों में से एक वैश्विक स्तर पर बढ़ता जियोपॉलिटिकल तनाव है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव बढ़ने से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में अनिश्चितता बढ़ी है। क्रूड ऑयल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर एशियाई बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल रहा है।
हेल्थकेयर शेयरों पर भी दबाव
बाजार की चिंता सिर्फ क्रूड और ग्लोबल तनाव तक सीमित नहीं रही। हेल्थकेयर सेक्टर से जुड़ी एक नई पॉलिसी रिपोर्ट ने भी निवेशकों का ध्यान खींचा।
एक पैनल ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों से लिए जाने वाले रूम रेंट को 3-स्टार होटल के कमरों की दरों के बराबर सीमित किया जाना चाहिए। इस खबर के सामने आने के बाद अस्पताल कंपनियों के शेयरों में शुरुआती कारोबार के दौरान दबाव देखने को मिला।
Apollo Hospitals और Max Healthcare जैसे प्रमुख हेल्थकेयर स्टॉक्स करीब 1 फीसदी तक नीचे कारोबार करते नजर आए। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों की कुल कमाई में रूम रेंट का हिस्सा सीमित होता है। ऐसे में इस प्रस्ताव का कंपनियों की लंबी अवधि की कमाई पर असर बहुत बड़ा होने की संभावना कम है।
अभी ‘वेट एंड वॉच’ मोड में बाजार
मौजूदा हालात में निवेशक ग्लोबल संकेतों पर खास नजर बनाए हुए हैं। क्रूड की कीमतों, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आने वाली खबरों का भारतीय शेयर बाजार पर सीधा असर पड़ सकता है।
वहीं, घरेलू स्तर पर कंपनियों के तिमाही नतीजे और उनके फंडामेंटल्स भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। ऐसे में निवेशकों के बीच फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति बनी हुई है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मंगलवार को दलाल स्ट्रीट पर अस्थिरता हावी रही। आने वाले समय में क्रूड ऑयल की दिशा, ग्लोबल जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम और घरेलू कॉरपोरेट अर्निंग्स बाजार के लिए प्रमुख ट्रिगर रह सकते हैं।