मुंबई के विश्व प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर (Siddhivinayak Temple) में कथित दान घोटाले को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) द्वारा मंदिर के दान पात्र से सालाना लगभग 18 करोड़ रुपये की हेराफेरी और चोरी का गंभीर दावा किए जाने के बाद राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने सिद्धिविनायक मंदिर के पिछले 5 सालों की दान पेटी में आए नकद और चढ़ावे में मिले सोने-चांदी के जेवरात का स्पेशल ऑडिट (Audit) कराने का सख्त आदेश जारी कर दिया है।
राज ठाकरे का बड़ा दावा: “हर साल 18 करोड़ रुपये की लूट”
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि मंदिर के कुछ भ्रष्ट कर्मचारी ही दान पेटी से पैसे चुराने के खेल में शामिल थे।
राज ठाकरे का बयान: “दान पात्र से हर साल करीब 18 करोड़ रुपये उड़ाए जा रहे थे। जब संदिग्ध कर्मचारियों को पकड़ा गया, तो दान की औसत दैनिक राशि में अचानक भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस पूरे घोटाले की बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”
मंदिर ट्रस्ट की सफाई: “अधूरी जानकारी के साथ लगे आरोप”
दूसरी तरफ, सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने राज ठाकरे के आरोपों को खारिज करते हुए अपनी बात रखी:
- खुद मांगी थी जांच: ट्रस्ट का कहना है कि उन्होंने खुद मई में ही लॉ एंड ज्यूडिशरी विभाग को पत्र लिखकर पिछले 5 सालों के विस्तृत ऑडिट की मांग की थी।
- ACB की कार्रवाई में 9 गिरफ्तार: मार्च में सीसीटीवी (CCTV) फुटेज से चोरी पकड़े जाने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की मदद ली गई। अब तक इस मामले में मुख्य आरोपी राजन पेंडुलकर समेत 9 लोग गिरफ्तार और 46 कर्मचारी निलंबित किए जा चुके हैं।
- VIP दर्शन रैकेट पर नकेल: दान चोरी के अलावा ऑनलाइन पैसे लेकर अवैध तरीके से VIP दर्शन कराने वाले नेटवर्क पर भी शिकंजा कसा गया है।
शिवसेना (UBT) बनाम शिंदे गुट: सियासत हुई तेज
इस घोटाले ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है:
- ट्रस्ट का UBT पर आरोप: सदा सरवणकर ने दावा किया कि पकड़े गए कुछ कर्मचारियों और पूर्व ट्रस्ट बोर्ड के तार शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से जुड़े थे।
- किशोरी पेडनेकर का पलटवार: मुंबई की पूर्व मेयर और UBT नेता किशोरी पेडनेकर ने तीखा जवाब देते हुए कहा कि सदा सरवणकर दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबान में झांकें। उन्होंने मांग की कि जैसे राम मंदिर विवाद में सवाल उठे थे, वैसे ही सरवणकर को भी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा देना चाहिए।