Highlights:
- राज्यसभा में पेश हुआ ऐतिहासिक लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026।
- नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला, जंतर-मंतर पर छात्रों पर कार्रवाई का मुद्दा उठाया।
- सदन में वॉकआउट और पीएम मोदी की वरिष्ठ मंत्रियों के साथ रणनीति बैठक।
- मकर द्वार पर फिर दिखी प्रियंका गांधी और TMC सांसद कल्याण बनर्जी की दिलचस्प नोकझोंक।
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के 9वें दिन सदन के अंदर से लेकर बाहर तक ज़बरदस्त राजनीतिक घमासान देखने को मिला। लोकसभा से हरी झंडी मिलने के बाद केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को राज्यसभा में चर्चा और पारित कराने के लिए पेश किया।
विधेयक के पेश होते ही विपक्ष ने जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुई कथित पुलिस सख्ती को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा:
“छात्रों और युवाओं की आवाज़ को दबाया जा रहा है। यदि गृह मंत्री अमित शाह किसी बंद कमरे में बैठकर यह कार्यवाही सुन रहे होंगे, तो हम उन्हें वहां से खींचकर सदन में लाएंगे और जवाब मांगेंगे!”
विपक्ष के भारी हंगामे के बीच विपक्षी सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर दिया, जिस पर सदन के नेता जेपी नड्डा ने पलटवार करते हुए विपक्ष के रवैये को “बेहद गैर-जिम्मेदाराना” करार दिया।
2026 के इस नए ‘एंटी पेपर लीक कानून’ में क्या है खास?
संसद में पेश यह संशोधन विधेयक देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़ा है। इसमें पेपर लीक के कैंसर को जड़ से खत्म करने के लिए बेहद कड़े प्रावधान किए गए हैं:
- फास्ट-ट्रैक अदालतें: मुकदमों की त्वरित सुनवाई और अपीलों के समयबद्ध निपटारे के लिए विशेष अदालतों का गठन।
- विशेष टास्क फोर्स (STF): पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली की उच्चस्तरीय जांच के लिए समर्पित बल।
- कड़ा दंड व जुर्माना: दोषियों और संगठित भू-माफिया के लिए भारी जुर्माने के साथ गैर-जमानती सजा का प्रावधान।
पीएम मोदी की हाई-लेवल मीटिंग, राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर हमला
सदन की कार्यवाही में बार-बार आ रहे व्यवधान और विपक्ष के वॉकआउट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन में ही वरिष्ठ मंत्रियों के साथ हाई-लेवल मीटिंग की। इस रणनीति बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह, निर्मला सीतारमण, जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू जैसे शीर्ष नेता मौजूद रहे।
वहीं, संसद के बाहर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी और शिवसेना (UBT) प्रवक्ता आनंद दुबे ने भी केंद्र को घेरा। प्रमोद तिवारी ने राम मंदिर चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोपों पर गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की, जबकि आनंद दुबे ने कहा कि पेपर लीक करने वाले ‘देशद्रोही’ हैं और उन पर बिना किसी पक्षपात के सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।