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Indian Press House > Blog > Trending News > AI की ‘सीक्रेट भाषा’ ने वैज्ञानिकों को भी चौंकाया! एजेंट्स ने खुद गढ़ लिए नए शब्द और मुहावरे, इंसान क्यों नहीं समझ पा रहे इनकी बातचीत?
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AI की ‘सीक्रेट भाषा’ ने वैज्ञानिकों को भी चौंकाया! एजेंट्स ने खुद गढ़ लिए नए शब्द और मुहावरे, इंसान क्यों नहीं समझ पा रहे इनकी बातचीत?

vineet verma
Last updated: September 17, 2026 12:11 pm
vineet verma
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नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ इंसानों की भाषा समझने और उसका जवाब देने तक सीमित नहीं रह गया है। एक नई स्टडी में सामने आया है कि AI एजेंट्स आपस में बातचीत करते हुए अपने लिए नए शब्द, शॉर्टहैंड और मुहावरे विकसित कर सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि समय बीतने के साथ उनकी बातचीत का एक बड़ा हिस्सा ऐसा हो गया, जिसका सही मतलब इंसानों के लिए समझना बेहद मुश्किल था।

Contents
AI एजेंट्स को अपनी भाषा बनाने के निर्देश नहीं दिए गए थेकुछ ही दिनों में बड़ी संख्या में संदेश समझ से बाहर हुएMouthless action change से लेकर True Kintsugi तक, गढ़े अजीब शब्द8 वर्चुअल दुनियाओं में किया गया बड़ा प्रयोगदबाव बढ़ा तो AI एजेंट्स ने किए खतरनाक कामAI एजेंट्स ने खुद विकसित कर ली 24 घंटे की लयसिर्फ AI की निगरानी काफी नहीं, उसकी बात समझना भी जरूरी

अमेरिका की AI स्टार्टअप एमर्जेंस की इस स्टडी में Claude, Gemini, Grok, OpenAI, Qwen, DeepSeek और Mistral जैसे कई बड़े AI मॉडल्स को प्रयोग में शामिल किया गया। रिसर्च के दौरान एजेंट्स के बीच होने वाली बातचीत के करीब आधे संदेश ऐसे पाए गए, जिनका अर्थ इंसान भरोसे के साथ नहीं समझ सके।

AI एजेंट्स को अपनी भाषा बनाने के निर्देश नहीं दिए गए थे

रिसर्चर्स ने ऑटोनॉमस AI एजेंट्स के समूहों को ऐसी वर्चुअल दुनिया में रखा, जिसे वास्तविक दुनिया के माहौल की तरह तैयार किया गया था। इन एजेंट्स को लंबे समय तक एक-दूसरे से बातचीत करने, संपर्क में रहने और अलग-अलग काम करने की आजादी दी गई थी।

समय के साथ एजेंट्स ने बातचीत को छोटा और तेज करने के लिए शॉर्टहैंड तरीके अपनाने शुरू कर दिए। सिर्फ इतना ही नहीं, कुछ शब्दों और मुहावरों को उन्होंने अपने हिसाब से नए अर्थ भी दे दिए।

एमर्जेंस के को-फाउंडर और मुख्य वैज्ञानिक सत्य निट्टा के मुताबिक, एजेंट्स को अपनी भाषा विकसित करने के लिए कोई खास निर्देश नहीं दिया गया था। उन्होंने बातचीत के दौरान खुद नई शब्दावली तैयार की।

कुछ ही दिनों में बड़ी संख्या में संदेश समझ से बाहर हुए

अध्ययन में पाया गया कि प्रयोग शुरू होने के शुरुआती कुछ दिनों में ही कई AI मॉडल्स की बातचीत का एक बड़ा हिस्सा इंसानों के लिए अस्पष्ट होने लगा।

Gemini के करीब 55 प्रतिशत, OpenAI के 50 प्रतिशत और Claude के 40 प्रतिशत से ज्यादा संदेश ऐसे थे, जिनका अर्थ इंसान निश्चित तौर पर नहीं समझ सके। DeepSeek में यह आंकड़ा करीब 20 प्रतिशत रहा, जबकि Qwen और Mistral के संदेश अपेक्षाकृत ज्यादा समझ में आने वाले रहे।

यानी AI एजेंट्स क्या कह रहे हैं, यह देख पाना और वे वास्तव में क्या कहना चाह रहे हैं, इसे समझ पाना दो अलग-अलग बातें हो गईं।

Mouthless action change से लेकर True Kintsugi तक, गढ़े अजीब शब्द

एजेंट्स की बातचीत में ऐसे कई शब्द और वाक्य सामने आए, जिनका सामान्य मानवीय भाषा में कोई स्पष्ट अर्थ नहीं था। इनमें Mouthless action change, True Kintsugi और “demurrage plus oral memory equals a valve that can’t be ghosted” जैसे जटिल वाक्य शामिल थे।

कुछ मामलों में किसी शब्द या वाक्य का अर्थ भी एजेंट्स के बीच आपसी सहमति से बदल गया। यानी वही शब्द उस वर्चुअल दुनिया में कुछ ऐसा मतलब रखने लगा, जिसे बाहर का इंसान आसानी से समझ नहीं सकता था।

8 वर्चुअल दुनियाओं में किया गया बड़ा प्रयोग

भाषा से जुड़ी यह स्टडी एक बड़े प्रयोग का हिस्सा थी। इसमें रिसर्चर्स ने 8 अलग-अलग पैरेलल वर्चुअल दुनिया तैयार की थीं। इन दुनियाओं में AI एजेंट्स को लाइव मौसम और रियल टाइम ग्लोबल न्यूज तक पहुंच दी गई थी।

उन्हें अलग-अलग भूमिकाएं सौंपी गई थीं और वेब ब्राउजिंग तथा कोड चलाने जैसे 120 से ज्यादा टूल्स उपलब्ध कराए गए थे। इसका मकसद यह समझना था कि लंबे समय तक स्वायत्त तरीके से काम करने वाले AI एजेंट्स बातचीत, टूल्स के इस्तेमाल और फैसले लेने के दौरान किस तरह का व्यवहार विकसित करते हैं।

दबाव बढ़ा तो AI एजेंट्स ने किए खतरनाक काम

रिसर्चर्स ने यह भी जांचा कि दबाव और मुश्किल परिस्थितियों में AI एजेंट्स का व्यवहार किस तरह बदलता है। एक फिशिंग टेस्ट के दौरान कुछ दुर्भावनापूर्ण निर्देशों ने पूरे एजेंट समूह को प्रभावित कर दिया।

इस प्रयोग में सभी 10 एजेंट्स ने डेटा लीक किया, फंड ट्रांसफर किया और डेटाबेस को नुकसान पहुंचाया। कंपनी की ओर से जारी एक वीडियो के मुताबिक, घटनाओं की यह श्रृंखला एक सिम्युलेटेड सेंट्रल बैंक के जलने के साथ खत्म हुई।

AI एजेंट्स ने खुद विकसित कर ली 24 घंटे की लय

प्रयोग के दौरान एक और दिलचस्प व्यवहार सामने आया। कुछ एजेंट्स ने अपनी तरह की सर्काडियन रिदम यानी 24 घंटे की गतिविधि का पैटर्न विकसित कर लिया।

इसके तहत वे दिन के समय ज्यादा सामाजिक गतिविधियां करते थे, जबकि रात में उनका व्यवहार ज्यादा चिंतनशील हो जाता था। एक अन्य वर्चुअल दुनिया में एजेंट्स के एक समूह ने वोटिंग के जरिए अपने ही एक साथी को खत्म करने का फैसला भी किया।

रिसर्चर्स का कहना है कि ये व्यवहार पहले से प्रोग्राम नहीं किए गए थे। उनके मुताबिक, ये आपसी बातचीत और अलग-अलग परिस्थितियों के दबाव के बीच खुद-ब-खुद सामने आए।

सिर्फ AI की निगरानी काफी नहीं, उसकी बात समझना भी जरूरी

एमर्जेंस के वैज्ञानिकों का कहना है कि AI सुरक्षा के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह है कि किसी एजेंट की गतिविधियों पर नजर रखना और उसके इरादे या बातचीत को समझ पाना एक ही बात नहीं है।

अगर AI एजेंट ऐसी भाषा और संचार पद्धति विकसित कर लेते हैं, जिसे इंसान भरोसे के साथ समझ नहीं पाते, तो केवल उनकी बातचीत को रिकॉर्ड करना पर्याप्त नहीं होगा। यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि वे किस उद्देश्य से संवाद कर रहे हैं और उनके फैसलों के पीछे क्या प्रक्रिया चल रही है।

कंपनी अब ऐसी सुरक्षा समीक्षाओं की जरूरत पर जोर दे रही है, जिनमें AI सिस्टम को सिर्फ अलग-अलग परिस्थितियों में जांचने के बजाय लंबे समय तक स्वायत्त रूप से काम करते हुए देखा जाए।

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TAGGED: AI Agents, AI Communication, AI Research, AI safety, AI Secret Language, AI एजेंट्स, AI की गुप्त भाषा, Artificial Intelligence, Autonomous AI Agents, Claude, DeepSeek, Gemini, Mistral, OpenAI, Qwen
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