कर्नाटक चुनाव के दौरान बजरंग दल को लेकर दिया गया बयान एक बार फिर कांग्रेस पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व के लिए कानूनी मुसीबत बन गया है। पंजाब की संगरूर सिविल कोर्ट ने इस विवादित टिप्पणी पर दायर मानहानि याचिका पर एक्शन लेते हुए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को समन जारी किया है।
आखिर क्या है पूरा विवाद?
इस कानूनी लड़ाई की जड़ें कर्नाटक विधानसभा चुनाव से जुड़ी हैं। चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने अपने मैनिफेस्टो में ऐलान किया था कि सत्ता में आने पर बजरंग दल और प्रतिबंधित संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) जैसे समूहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर बैन भी लगाया जाएगा।
कांग्रेस के इस चुनावी वादे पर तीखी प्रतिक्रिया हुई। ‘हिंदू सुरक्षा परिषद’ के फाउंडर हितेश भारद्वाज ने संगरूर अदालत का दरवाजा खटखटाया और 100 करोड़ रुपए का मानहानि केस दर्ज करा दिया। याचिका में साफ तौर पर कहा गया कि बजरंग दल की तुलना राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल PFI से करना पूरी तरह गलत है और इससे करोड़ों कार्यकर्ताओं व हिंदू समाज की भावनाओं को गहरा ठेस पहुंचा है।
कोर्ट का एक्शन और आगे क्या?
मामले पर सुनवाई करते हुए संगरूर सिविल जज की अदालत ने नोटिस जारी कर कांग्रेस अध्यक्ष से जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि किसी भी स्थापित सामाजिक या सांस्कृतिक संगठन की साख को इस तरह नुकसान पहुंचाना कानूनन मानहानि की श्रेणी में आता है, और इसके लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की जवाबदेही तय होनी चाहिए।