नई दिल्ली: अगर रात में बिस्तर पर लेटते ही कमर, कूल्हे या पैरों में तेज दर्द, झनझनाहट या करंट जैसा एहसास होने लगता है और नींद पूरी नहीं हो पाती, तो इसकी वजह साइटिका (Sciatica) हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, सही एक्सरसाइज, बेहतर पोस्चर और फिजियोथेरेपी से कई मरीजों को दर्द और जकड़न में राहत मिल सकती है।
क्या है साइटिका और क्यों बढ़ जाता है रात में दर्द?
लखनऊ स्थित फिजियोवेडिक फिजियोथेरेपी क्लिनिक के कंसल्टेंट फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. जीशान अली के अनुसार, साइटिका में सियाटिक नर्व पर दबाव बढ़ने से कमर से लेकर कूल्हे और पैरों तक दर्द, झनझनाहट, सुन्नपन और खिंचाव महसूस हो सकता है। कई मरीजों में यह परेशानी रात के समय अधिक बढ़ जाती है, जिससे नींद प्रभावित होती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यह एक मैकेनिकल समस्या है। ऐसी कोई दवा या इंजेक्शन नहीं है जो दबी हुई नस को तुरंत ठीक कर दे। इसलिए फिजियोथेरेपी, नियमित एक्सरसाइज, सही पोस्चर और जीवनशैली में सुधार इलाज का अहम हिस्सा हैं।
क्या हर मरीज को ऑपरेशन की जरूरत होती है?
डॉ. जीशान अली का कहना है कि साइटिका के अधिकांश मरीजों को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। ऑपरेशन की सलाह आमतौर पर तभी दी जाती है जब—
- रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो।
- नस पर गंभीर दबाव के कारण पैर की ताकत खत्म होने लगे।
- फुट ड्रॉप की समस्या हो जाए।
- पेशाब या मल पर नियंत्रण खत्म हो जाए।
- लगातार न्यूरोलॉजिकल कमजोरी बढ़ रही हो।
एक्सरसाइज से पहले करें यह जरूरी काम
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एक्सरसाइज शुरू करने से पहले 10 से 15 मिनट तक कमर पर हॉट वॉटर बैग या हीटिंग पैड से सिकाई करें। इससे मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और एक्सरसाइज करना आसान हो सकता है।
एक्सरसाइज 1: नर्व फ्लॉसिंग स्ट्रेच
यह एक्सरसाइज सियाटिक नर्व और हैमस्ट्रिंग पर स्ट्रेच देने में मदद कर सकती है।
कैसे करें?
- पैर को सीधा रखें और एड़ी को नीचे की ओर दबाएं।
- अब पंजे को अपनी ओर खींचें।
- ठुड्डी को छाती की ओर लाएं।
- इसके बाद कमर को हल्का आगे झुकाएं।
- यही प्रक्रिया दूसरे पैर से भी दोहराएं।
विशेषज्ञ के अनुसार, इसे नियमित रूप से करने से कई लोगों को दर्द में धीरे-धीरे राहत मिल सकती है। कुछ मरीजों को शुरुआती अभ्यास के बाद भी आराम महसूस हो सकता है।
एक्सरसाइज 2: बैठे-बैठे लोअर बैक स्ट्रेच
यह एक्सरसाइज कमर, कूल्हों और पैरों की मांसपेशियों में स्ट्रेच देने में मदद करती है।
कैसे करें?
- कुर्सी या बेड के किनारे सीधा बैठें।
- एक पैर आगे रखें और एड़ी को जमीन पर दबाकर रखें।
- दोनों हाथ सामने रखें।
- धीरे-धीरे शरीर को पहले दाईं ओर और फिर बाईं ओर मोड़ें।
- पूरे समय पैर की स्थिति बनाए रखें।
इससे लोअर बैक की जकड़न कम करने और साइटिका से जुड़े दर्द में राहत मिलने में मदद मिल सकती है।
फिजियोथेरेपी क्यों है जरूरी?
डॉ. जीशान अली के अनुसार फिजियोथेरेपी से—
- टाइट मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं।
- कमजोर मांसपेशियां मजबूत बनती हैं।
- रीढ़ की गतिशीलता बेहतर होती है।
- नस पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
- चलने-फिरने में सुधार हो सकता है।
सिकाई और सही पोस्चर भी हैं जरूरी
साइटिका के मरीज कमर से लेकर पैर तक गर्म सिकाई कर सकते हैं। साथ ही बैठते समय सही पोस्चर बनाए रखना भी बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं—
- जमीन या पटरे पर लंबे समय तक बैठने से बचें।
- हमेशा कुर्सी पर सही मुद्रा में बैठें।
- बेड का इस्तेमाल केवल सोने के लिए करें, बैठने के लिए नहीं।
सुबह और रात में करें ये एक्सरसाइज
- पेल्विक टिल्ट
- ब्रिजिंग
- नर्व फ्लॉसिंग
- हिप स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज
इनसे स्पाइन, कमर और कूल्हों की मांसपेशियां मजबूत रखने में मदद मिल सकती है।
इन बातों का भी रखें ध्यान
- लंबे समय तक झुककर न बैठें।
- एक ही स्थिति में देर तक न रहें।
- कब्ज से बचें।
- फाइबर युक्त हल्का भोजन करें।
- नियमित रूप से हल्की शारीरिक गतिविधि करते रहें।
ध्यान दें: यदि दर्द लगातार बढ़ रहा हो, पैर में कमजोरी आने लगे, सुन्नपन बढ़ जाए या पेशाब-मल पर नियंत्रण में समस्या हो, तो बिना देर किए विशेषज्ञ डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लें।