नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की नई रणनीति को लेकर हलचल तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम अगले सप्ताह लंदन में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित कर सकते हैं, जिसमें पश्चिमी और मध्य-पूर्व के देशों के रक्षा मंत्री और शीर्ष सैन्य अधिकारी शामिल हो सकते हैं। बैठक का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए संभावित अंतरराष्ट्रीय सैन्य गठबंधन पर चर्चा करना बताया जा रहा है।
ईरान की ओर से होर्मुज क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों और समुद्री तनाव के बीच यह पहल ऐसे समय सामने आई है, जब एक तरफ अमेरिका सख्त रुख अपनाए हुए है तो दूसरी ओर ओमान कूटनीतिक प्रयासों के जरिए हालात सामान्य करने की कोशिश कर रहा है।
लंदन में हाई-लेवल बैठक की तैयारी
एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम अगले सप्ताह लंदन में उच्चस्तरीय बैठक की योजना बना रहे हैं। इस बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
रक्षा मंत्री और सैन्य अधिकारी हो सकते हैं शामिल
सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित बैठक में पश्चिमी देशों और मध्य-पूर्व के कई देशों के रक्षा मंत्री तथा वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हिस्सा ले सकते हैं। खबर है कि अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन भी इसमें शामिल हो सकते हैं। हालांकि, बैठक की अंतिम तारीख अभी तय नहीं हुई है।
ब्रिटिश दूतावास ने टिप्पणी से किया इनकार
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इस संयुक्त पहल की पुष्टि की है। वहीं, अमेरिका स्थित ब्रिटिश दूतावास ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार किया है।
अमेरिका सहयोगी देशों से क्या चाहता है?
सूत्रों का कहना है कि अमेरिका चाहता है कि उसके सहयोगी देश होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए माइंस हटाने वाले जहाज, युद्धपोत और ड्रोन उपलब्ध कराएं। बताया जा रहा है कि यह पहल उन चर्चाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश है, जिन्हें पहले यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस कई देशों के साथ शुरू कर चुके हैं।
क्या टकराव से बाहर निकलने की रणनीति है?
यूरोप के एक राजदूत के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि यह पहल ईरान के साथ जारी तनाव से अमेरिका के संभावित रणनीतिक निकास का हिस्सा भी हो सकती है। उनके अनुसार, अमेरिका इस संकट से निकलने का रास्ता तलाश रहा है और इसमें सहयोगी देशों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ट्रंप ने फिर दी सख्त चेतावनी
इस घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़ा रुख दोहराया है। उन्होंने कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले किसी भी वाणिज्यिक जहाज पर हमला होता है तो उसके जवाब में अमेरिका ईरान के पुलों या बिजली संयंत्रों को निशाना बनाएगा।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका फिलहाल अपने सैन्य अभियान को समाप्त करने के मूड में नहीं है। उनके मुताबिक, ईरान पर अभी और दबाव बनाए जाने की जरूरत है।
होर्मुज संकट से बढ़ा कच्चे तेल पर दबाव
रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कच्चे तेल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। इसका असर घरेलू ईंधन कीमतों पर भी पड़ सकता है।
ओमान की मध्यस्थता से जारी हैं कूटनीतिक प्रयास
सैन्य तनाव के समानांतर कूटनीतिक स्तर पर भी बातचीत जारी है। 24 जुलाई को ओमान का एक प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा, जहां होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा हुई।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची और ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी के बीच भी फोन पर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात, समुद्री सुरक्षा और फारस की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित संचालन पर विचार-विमर्श किया।
ईरान ने दोहराया अपना रुख
शंघाई सहयोग संगठन की विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि क्षेत्र में स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका धमकी और दबाव की नीति छोड़ता है या नहीं। उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।