नई दिल्ली: भारत में हर साल लाखों सड़क हादसों में हजारों लोगों की जान चली जाती है। अब इन दुर्घटनाओं को कम करने के लिए नई तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। दूरसंचार नियामक TRAI ने Vehicle-to-Everything (V2X) टेक्नोलॉजी को लेकर कंसल्टेशन पेपर जारी किया है और इस पर हितधारकों के साथ खुली चर्चा भी शुरू कर दी है। इस तकनीक का उद्देश्य गाड़ियों, सड़क के ढांचे, पैदल यात्रियों और मोबाइल नेटवर्क के बीच रियल-टाइम संवाद स्थापित कर सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाना है।
क्या है V2X टेक्नोलॉजी?
V2X यानी Vehicle-to-Everything ऐसी संचार तकनीक है, जिसके जरिए वाहन अपने आसपास मौजूद अन्य वाहनों, ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर, पैदल यात्रियों और मोबाइल नेटवर्क से सीधे जानकारी साझा कर सकते हैं। इसका मकसद संभावित दुर्घटनाओं को पहले ही पहचानकर ड्राइवर को सतर्क करना और जरूरत पड़ने पर स्वतः सुरक्षा कदम उठाना है।
चार हिस्सों में काम करती है यह तकनीक
V2V (Vehicle-to-Vehicle):
इस सिस्टम में दो वाहन शॉर्ट-रेंज वायरलेस तकनीक के जरिए एक-दूसरे से संपर्क करते हैं। यदि आगे चल रही गाड़ी अचानक ब्रेक लगाती है या गति कम करती है, तो पीछे आने वाले वाहन को तुरंत अलर्ट मिल सकता है।
V2I (Vehicle-to-Infrastructure):
वाहन ट्रैफिक सिग्नल, स्पीड ब्रेकर, सड़क संकेतक और अन्य स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़कर जरूरी जानकारी हासिल कर सकेंगे, जिससे सुरक्षित और व्यवस्थित ड्राइविंग संभव होगी।
V2P (Vehicle-to-Pedestrian):
यह तकनीक पैदल यात्रियों की मौजूदगी का पता लगाकर वाहन को चेतावनी दे सकती है। जरूरत पड़ने पर संभावित टक्कर से बचने के लिए वाहन स्वतः ब्रेक भी लगा सकता है।
V2N (Vehicle-to-Network):
मोबाइल नेटवर्क के जरिए वाहन रियल-टाइम ट्रैफिक अपडेट, आपातकालीन अलर्ट, मैप अपडेट, क्लाउड सेवाएं और अन्य डिजिटल सुविधाओं से जुड़े रहेंगे।
कैसे करता है काम?
V2X तकनीक में वाहन सेलुलर नेटवर्क, वाई-फाई और शॉर्ट-रेंज रेडियो फ्रिक्वेंसी जैसे वायरलेस कम्युनिकेशन सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं। इन्हीं माध्यमों से वाहन अपने आसपास मौजूद अन्य सिस्टम से लगातार डेटा का आदान-प्रदान करते हैं, जिससे सड़क की स्थिति और संभावित जोखिमों की जानकारी तुरंत मिल जाती है।
कहां हो रहा है इस्तेमाल?
दुनिया के कई देशों में V2X तकनीक का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक और ऑटोनॉमस वाहनों में किया जा रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों में यह ऊर्जा प्रबंधन और चार्जिंग सिस्टम का हिस्सा बन चुकी है, जबकि सेल्फ-ड्राइविंग कारों में सुरक्षित संचालन के लिए भी इसी तकनीक का सहारा लिया जाता है।
क्या होंगे बड़े फायदे?
- ट्रैफिक जाम और सड़क बंद होने की पहले से जानकारी मिलेगी।
- संभावित दुर्घटनाओं की चेतावनी समय रहते मिल सकेगी।
- आगे चल रहे वाहन के अचानक ब्रेक लगाने पर पीछे वाले वाहन को तुरंत अलर्ट मिलेगा।
- कोहरे या कम दृश्यता की स्थिति में भी आगे मौजूद वाहनों की सूचना मिलती रहेगी।
- एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता खाली करने संबंधी अलर्ट जारी किए जा सकेंगे।
- रियल-टाइम डेटा के जरिए सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर बनाया जा सकेगा।
भारत में क्यों है अहम?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर वर्ष करीब 4.8 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें लगभग 1.7 लाख लोगों की मौत होती है, जबकि 4.6 लाख से अधिक लोग घायल होते हैं। ओवरस्पीडिंग और लापरवाह ड्राइविंग इन हादसों की प्रमुख वजह मानी जाती है। ऐसे में V2X जैसी स्मार्ट तकनीक भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।