नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके के परिवार में भावुक माहौल देखने को मिला। बेटे के लंबे आंदोलन और संघर्ष को याद करते हुए उनकी मां अनीता दीपके की आंखें भर आईं। उन्होंने कहा कि यह जीत आसानी से नहीं मिली, बल्कि इसके लिए अभिजीत ने कई मुश्किलों का सामना किया।
अनीता दीपके ने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है। उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान अभिजीत को थप्पड़ मारे गए, उस पर स्याही फेंकी गई और कई रातें उसे खुले में मच्छरों के बीच गुजारनी पड़ीं। उन्होंने कहा, “आज मेरा बेटा जीत गया। उसने इतनी कम उम्र में बड़ा काम कर दिखाया है।”
‘कई रातों तक नहीं आई नींद, खाना भी नहीं खा पाई’
मीडिया से बातचीत के दौरान अनीता दीपके भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि बेटे के साथ हुई घटनाओं के बाद वह लगातार चिंता में रहीं। कई रातों तक उन्हें नींद नहीं आई और वह ठीक से खाना भी नहीं खा सकीं।
उन्होंने कहा, “मुझे हमेशा डर लगा रहता था कि उसके साथ क्या होगा। उसे पीटा गया, थप्पड़ मारे गए। यह सब देखकर मैं अंदर से टूट गई थी। सुबह तीन-चार बजे तक जागती रहती थी। 7 जून से घर में किसी काम में मन नहीं लगा।”
‘इतनी छोटी उम्र में बड़ी लड़ाई लड़ी’
अनीता दीपके ने कहा कि अभिजीत अभी बहुत युवा है, लेकिन उसने जिस साहस और धैर्य के साथ अपनी बात रखी, उस पर पूरे परिवार को गर्व है। उनके मुताबिक, इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी लड़ाई लड़ना आसान नहीं होता।
इस्तीफे के बाद भी जारी रहेगा आंदोलन
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ ही देर बाद अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर मौजूद समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यह साबित हो गया है कि लोकतंत्र में बिना डरे संघर्ष किया जाए तो परिणाम मिलते हैं।
दो मांगों पर अब भी अड़ा है संगठन
अभिजीत दीपके ने कहा कि संगठन की दो प्रमुख मांगें अभी भी बाकी हैं। उन्होंने मांग दोहराई कि पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। साथ ही 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई में शामिल कर्मियों पर भी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि इन दोनों मांगों के पूरा होने तक आंदोलन जारी रहेगा।