रायपुर: छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बावा मोहतरा गांव की एक अनोखी कहानी अब देशभर के बच्चों तक पहुंचेगी। गांव के तालाब में करीब 130 साल तक रहने वाले ‘गंगाराम’ नाम के मगरमच्छ की कहानी को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने अपने पाठ्यक्रम में शामिल किया है। यह वही मगरमच्छ है, जिसकी मौत पर पूरा गांव शोक में डूब गया था और कई घरों में उस दिन चूल्हे तक नहीं जले थे।
130 साल तक गांव के तालाब में रहा, कभी किसी इंसान को नहीं पहुंचाया नुकसान
बेमेतरा जिले के बावा मोहतरा गांव के तालाब में रहने वाला गंगाराम ग्रामीणों के लिए सिर्फ एक वन्यजीव नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य बन चुका था। ग्रामीणों के अनुसार, करीब 130 साल के अपने पूरे जीवन में उसने कभी किसी इंसान पर हमला नहीं किया। गांव की महिलाएं तालाब से पानी भरती थीं, किसान अपने मवेशियों को वहीं पानी पिलाते थे और बच्चे तालाब के किनारे बेखौफ खेलते थे, लेकिन गंगाराम ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया।
पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन इंसान और मगरमच्छ का रिश्ता नहीं बदला
समय के साथ गांव में कई पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन गंगाराम उसी तालाब में बना रहा। धीरे-धीरे वह पूरे गांव की पहचान बन गया। दूर-दूर से लोग इस अनोखे रिश्ते को देखने और गंगाराम की कहानी सुनने बावा मोहतरा पहुंचते थे। ग्रामीण उसे किसी खतरनाक शिकारी की तरह नहीं, बल्कि अपने साथी की तरह मानते थे।
2019 में मौत हुई तो पूरे गांव ने दी अंतिम विदाई
साल 2019 में प्राकृतिक कारणों से गंगाराम की मौत हो गई। उसकी मौत की खबर से पूरा गांव गमगीन हो उठा। ग्रामीणों ने पूरे सम्मान के साथ उसकी शवयात्रा निकाली, अंतिम संस्कार किया और कई परिवारों ने उस दिन अपने घरों में चूल्हा तक नहीं जलाया। उस समय गंगाराम की अंतिम विदाई की तस्वीरें देशभर में चर्चा का विषय बनी थीं।
अब NCERT की किताब में पढ़ेंगे बच्चे
गंगाराम की इसी अनोखी कहानी को अब NCERT ने अपने पाठ्यक्रम में शामिल किया है। ‘My India! – A Bond Between Humans and Animals’ शीर्षक के तहत बच्चों को इंसान और वन्यजीवों के बीच भरोसे, सम्मान और सह-अस्तित्व की मिसाल के रूप में यह कहानी पढ़ाई जाएगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रकृति और वन्यजीवों के साथ संतुलित और संवेदनशील संबंधों का महत्व समझाना है।