ढाका / नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा इस वर्ष के अंत तक बांग्लादेश लौटने के ऐलान के बाद देश की राजनीति में जबरदस्त हलचल मच गई है। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार ने इस घोषणा के बाद आनन-फानन में राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन पर पद छोड़ने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेशी राष्ट्रपति कार्यालय के सूत्रों ने पुष्टि की है कि सरकार ने राष्ट्रपति शहाबुद्दीन को अगस्त 2026 तक इस्तीफा देने की मोहलत दी है, जबकि उनका आधिकारिक कार्यकाल 2028 तक है।
शेख हसीना का खौफ? क्यों राष्ट्रपति को हटाना चाहती है रहमान सरकार
राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन को पद से हटाने के फैसले के पीछे तीन मुख्य राजनीतिक कारण देखे जा रहे हैं:
- शेख हसीना से करीबी: शहाबुद्दीन को 2023 में शेख हसीना की सरकार के दौरान ही राष्ट्रपति चुना गया था। उन्हें आवामी लीग का करीबी माना जाता है।
- संवैधानिक शक्तियों का डर: बीएनपी (BNP) नीत सरकार को आशंका है कि यदि शेख हसीना ढाका लौटती हैं, तो राष्ट्रपति अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल कर हसीना के पक्ष में कोई बड़ा सियासी कदम उठा सकते हैं।
- खराब स्वास्थ्य का हवाला: सरकार चाहती है कि राष्ट्रपति शहाबुद्दीन अपनी हालिया लंदन में हुई हार्ट सर्जरी और सेहत से जुड़ी समस्याओं का हवाला देकर खुद पद से हट जाएं, ताकि कोई नया विवाद न खड़ा हो।
तख्तापलट से वापसी तक: बांग्लादेश का घटनाक्रम
अगस्त 2024 में व्यापक जनआंदोलन और तख्तापलट के बाद 79 वर्षीय शेख हसीना को ढाका छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी। इसके बाद अंतरिम व्यवस्था और फरवरी 2026 में हुए आम चुनावों के बाद तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ।
- 600 से अधिक मामले: बांग्लादेश में शेख हसीना पर 600 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं और लगभग 10 मामलों में उन्हें मौत की सजा तक सुनाई जा चुकी है।
- हसीना का अडिग रुख: तमाम मुकदमों और पार्टी पर लगे प्रतिबंधों के बावजूद शेख हसीना ने घोषणा की है कि उनका सियासी संघर्ष जारी रहेगा और वे इसी साल स्वदेश लौटेंगी।
हसीना के इस रुख ने ढाका के सियासी गलियारों में नई घबराहट पैदा कर दी है, जिसकी पहली गाज अब राष्ट्रपति शहाबुद्दीन पर गिरती नजर आ रही है।