नई दिल्ली: 22 जुलाई 2026, बुधवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस दिन आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि रहेगी और आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का नौवां दिन मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन मां भगवती की आराधना, साधना और मंत्र जाप विशेष फलदायी होता है। यदि आप पूजा, यात्रा, नया कार्य या कोई शुभ शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं, तो पहले दिन के शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय जान लेना लाभकारी माना जाता है।
22 जुलाई 2026 का पंचांग
- तिथि: आषाढ़ शुक्ल पक्ष नवमी (23 जुलाई सुबह 7:04 बजे तक)
- वार: बुधवार
- योग: साध्य योग (शाम 6:42 बजे तक)
- नक्षत्र: स्वाती (रात 11:04 बजे तक)
- विशेष: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की नवमी
22 जुलाई के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:45 बजे से 5:28 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: नहीं
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:56 बजे से 3:48 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:18 बजे से 7:39 बजे तक
- अमृत काल: दोपहर 1:26 बजे से 3:11 बजे तक
22 जुलाई के अशुभ मुहूर्त
- राहुकाल: दोपहर 12:45 बजे से 2:23 बजे तक
- यमगंड: सुबह 7:50 बजे से 9:28 बजे तक
- आडल योग: रात 11:03 बजे से 23 जुलाई सुबह 6:12 बजे तक
- दुर्मुहूर्त: दोपहर 12:19 बजे से 1:11 बजे तक
- गुलिक काल: सुबह 11:07 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक
प्रमुख शहरों में राहुकाल का समय
- दिल्ली: दोपहर 12:27 बजे से 2:10 बजे तक
- मुंबई: दोपहर 12:45 बजे से 2:23 बजे तक
- चंडीगढ़: दोपहर 12:29 बजे से 2:13 बजे तक
- लखनऊ: दोपहर 12:13 बजे से 1:54 बजे तक
- भोपाल: दोपहर 12:26 बजे से 2:06 बजे तक
- कोलकाता: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 1:23 बजे तक
- अहमदाबाद: दोपहर 12:46 बजे से 2:26 बजे तक
- चेन्नई: दोपहर 12:15 बजे से 1:51 बजे तक
गुप्त नवरात्रि की नवमी का महत्व
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि को तंत्र-मंत्र, साधना और आध्यात्मिक उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन नौ दिनों में मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की आराधना की जाती है। इनमें मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और देवी कमला शामिल हैं। मान्यता है कि इस अवधि में गुप्त रूप से की गई साधना विशेष फल प्रदान करती है।
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
- सूर्योदय: सुबह 6:12 बजे
- सूर्यास्त: शाम 7:18 बजे