पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ गया है। टीएमसी (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी द्वारा बागी नेताओं को दिए गए ‘1 घंटे में इस्तीफे’ के ऑफर पर विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने करारा तंज कसा है। ऋतब्रत ने अभिषेक के बयान में बड़े विरोधाभास का आरोप लगाते हुए कहा कि जो कल तक दूसरों को ‘लुटेरा’ कह रहे थे, आज घुटनों पर आकर उन्हीं को वापस बुला रहे हैं। उन्होंने अभिषेक बनर्जी से तुरंत पार्टी पदों से इस्तीफा देने की मांग की है।
बंगाल के इस सियासी घमासान की 5 बड़ी बातें
- ऋतब्रत का तीखा हमला: विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि कल तक टीएमसी कह रही थी कि ‘लुटेरे’ ED और CBI के डर से भाग गए, और आज उन्हीं को वापस आने की मिन्नतें की जा रही हैं।
- अभिषेक बनर्जी का वो बड़ा दांव: अभिषेक बनर्जी ने बागी सांसदों-विधायकों को चुनौती दी थी कि अगर वे ममता बनर्जी के पास लौटते हैं, तो वह 1 घंटे के भीतर अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।
- इस्तीफे की मांग: ऋतब्रत ने कहा कि चुनाव नतीजों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अभिषेक को बहुत पहले ही (4 मई को) इस्तीफा दे देना चाहिए था।
- 2029 की खुली चुनौती: 60 विधायकों के समर्थन का दावा करने वाले ऋतब्रत ने कहा कि अभिषेक 2031 भूल जाएं, पहले 2029 के लोकसभा चुनाव में अपनी जमानत बचाकर दिखाएं।
- बुलडोजर/तोड़फोड़ पर नसीहत: पार्टी छोड़कर जाने और संपत्तियों पर कार्रवाई के मुद्दे पर ऋतब्रत ने कहा कि अगर कोई चीज अवैध नहीं है, तो कोर्ट जाकर न्याय मांगें, राजनीति न करें।
“कल तक लुटेरे, आज सगे?”-ऋतब्रत ने खोली अभिषेक के बयान की पोल
शनिवार को मीडिया से बात करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी के यू-टर्न पर जमकर क्लास लगाई। उन्होंने कहा कि टीएमसी नेतृत्व के बयानों में कोई निरंतरता नहीं है।
ऋतब्रत बनर्जी का बड़ा बयान: “अभिषेक बनर्जी ने आज यह बात कही है, लेकिन कल उनका रुख क्या था? उन्होंने खुद कहा था कि भ्रष्ट लोग जांच एजेंसियों के डर से टीएमसी छोड़कर भागे हैं। अब अगले ही दिन वह उन्हीं ‘लुटेरों’ को वापस आने के लिए कह रहे हैं। यह उनकी घबराहट और विरोधाभास को साफ दिखाता है।”
2029 के चुनाव को लेकर दी चेतावनी
मौजूदा समय में मजबूत राजनीतिक पकड़ रखने वाले ऋतब्रत बनर्जी ने अभिषेक के दावों को हवा में उड़ा दिया। उन्होंने कहा कि साल 2031 का विधानसभा चुनाव अभी बहुत दूर है, उससे पहले 2029 का लोकसभा चुनाव आएगा। बंगाल की जनता अब असलियत देख चुकी है। सरकार बनाने या जीतने का दावा करने से पहले अभिषेक को खुद मैदान में उतरकर अपनी जमानत बचाने की फिक्र करनी चाहिए।
क्या था अभिषेक बनर्जी का ‘1 घंटे वाला’ ओपन ऑफर?
दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब टीएमसी के सेकंड-इन-कमांड अभिषेक बनर्जी ने बागी नेताओं को एक खुली चुनौती दे डाली। उन्होंने कहा था कि अगर बागी सांसदों और विधायकों को उनसे (अभिषेक से) कोई निजी दिक्कत है और इसी वजह से उन्होंने बगावत की है, तो वे बेझिझक ममता बनर्जी के पास वापस लौट आएं। अगर बागी नेता वापस आते हैं, तो वह महज 1 घंटे के भीतर अपने सभी पदों से इस्तीफा दे देंगे।
क्या मोड़ लेगी बंगाल की राजनीति? विशेषज्ञों का मानना है कि ऋतब्रत बनर्जी के इस तीखे पलटवार और 60 विधायकों के संख्या बल के दावों के बाद टीएमसी के भीतर की गुटबाजी अब खुलकर सड़कों पर आ गई है, जो आने वाले दिनों में ममता सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है।