स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा एक बार फिर बड़े कानूनी पंगे में फंसते नजर आ रहे हैं। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान दिए गए एक बयान पर उनके खिलाफ मोर्चा खुल गया है। सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने कामरा को कानूनी नोटिस भेजकर तुरंत माफी मांगने और सोशल मीडिया से इस बयान का वीडियो हटाने की मांग की है।
क्या है पूरा ‘सीता-नीता’ विवाद?
दरअसल, नीट परीक्षा में हुई धांधली के विरोध में और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन चल रहा था, जहां जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी अनशन पर बैठे थे। इस आंदोलन को अपना सपोर्ट देने पहुंचे कुणाल कामरा ने मंच से सरकार पर तीखा तंज कसा।
कामरा ने अपने भाषण में कहा, “ये सीता के पति का नाम ले रहे हैं और नीता के पति का काम कर रहे हैं।”
इस टिप्पणी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील ने इसे हिंदू धर्म और आराध्य देव का अपमान बताया है। लीगल नोटिस में साफ कहा गया है कि आस्था के साथ खिलवाड़ और भगवान का अनादर किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
‘गोडसेवादी’ और ‘अंधभक्तों’ पर भी साधा निशाना
कामरा का यह भाषण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने सरकार और समर्थकों पर कई और तीखे कमेंट्स किए हैं:
वांगचुक की तुलना गांधी से: उन्होंने सोनम वांगचुक को देश का दूसरा ‘गांधी’ बताते हुए कहा कि गोडसेवादी सोच वाले लोगों को इस अनशन से कोई फर्क नहीं पड़ता।
छात्रों को अनोखी सलाह: आंदोलन में शामिल युवाओं से कामरा ने कहा, “अगर कोई अंधभक्त या मोदी समर्थक मिले तो बहस में टाइम वेस्ट मत करो। वहां से चुपचाप निकल जाओ, क्योंकि हमें मरीज का नहीं, बीमारी का इलाज करना है।”
CJI का शुक्रिया: कामरा ने छात्रों की तरफ से देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) का आभार जताते हुए दावा किया कि इस आंदोलन की पहली ईंट उन्होंने ही रखी थी।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस बयान के सामने आने के बाद इंटरनेट पर भी माहौल गर्मा गया है। जहां एक तरफ नेटिजन्स कुणाल कामरा को उनकी इस टिप्पणी के लिए जमकर ट्रोल कर रहे हैं और इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इसे सिर्फ एक पॉलिटिकल सटायर मान रहे हैं। फिलहाल, इस लीगल नोटिस पर कुणाल कामरा की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।