नई दिल्ली। देश में मानसून की दस्तक के साथ ही भारी बारिश आफत बनकर बरस रही है। मूसलाधार बारिश ने न सिर्फ सड़कों को समंदर बना दिया है, बल्कि जर्जर और कमजोर इमारतों के लिए यह ‘डेथ वारंट’ साबित हो रही है। पिछले 24 घंटों में दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान से मकान व व्यावसायिक इमारतें ढहने के दर्दनाक हादसे सामने आए हैं। इन हादसों ने एक बार फिर मानसून से निपटने की प्रशासनिक तैयारियों और इमारतों के फिटनेस ऑडिट पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
1. दिल्ली: रोहिणी में 4 मंजिला इमारत जमींदोज, 3 की मौत
देश की राजधानी दिल्ली के रोहिणी इलाके में बुधवार को एक निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई।
- बढ़ रहा मौतों का आंकड़ा: इस दर्दनाक हादसे में अब तक 3 मजदूरों की मौत हो चुकी है। मलबे से राम किशोर (42) सहित अन्य शवों को निकाला गया।
- लापरवाही पर एक्शन: हादसे में कई लोग घायल हैं, जिनका बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बिल्डिंग मालिक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और एहतियात के तौर पर आसपास की इमारतों को खाली करा लिया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ट्वीट कर बताया कि जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर लगातार स्थिति की निगरानी कर रही हैं।
2. पुणे (महाराष्ट्र): वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट पर गिरा मलबे का पहाड़, सेना और NDRF तैनात
महाराष्ट्र के पुणे (पिंपरी-चिंचवड़) के मोशी इलाके में प्रकृति का सबसे खौफनाक रूप देखने को मिला। यहाँ भारी बारिश के कारण पास मौजूद कूड़े का एक विशाल पहाड़ भरभराकर वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट की इमारत पर गिर गया।
- मलबे में दबीं जिंदगियां: इस हादसे के बाद पूरी इमारत मलबे के नीचे छिप गई।
- युद्धस्तर पर रेस्क्यू: सेना, एनडीआरएफ (NDRF) और अग्निशमन दल ने संयुक्त ऑपरेशन चलाकर अब तक 9 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। हालांकि, ग्राउंड फ्लोर पर अभी भी करीब 8 कर्मचारियों के दबे होने की आशंका है, जिन्हें बचाने के लिए रात-दिन रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
3. मध्य प्रदेश: जबलपुर में टला बड़ा हादसा, समय रहते खाली कराई 5 मंजिला बिल्डिंग
प्रशासनिक सतर्कता की एक अच्छी मिसाल मध्य प्रदेश के जबलपुर से सामने आई। यहाँ के व्यस्त बाजार ‘बड़ा फुहारा’ इलाके में एक पुरानी पांच मंजिला व्यावसायिक इमारत भरभराकर गिर गई।
- मुस्तैदी से बची जान: गनीमत यह रही कि प्रशासन ने मानसून के खतरे को देखते हुए इस जर्जर इमारत को पहले ही ‘खतरनाक’ घोषित कर खाली करा लिया था। शाम करीब 7:30 बजे जब यह इमारत गिरी, तो बाजार में दहशत फैल गई, लेकिन कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। स्थानीय भाजपा सांसद आशीष दुबे ने मौके का मुआयना कर कहा कि यह घटना सिखाती है कि मानसून से पहले पुरानी इमारतों की जांच कितनी जरूरी है।
4. राजस्थान: अजमेर में मकान ढहा, बाल-बाल बचा परिवार
राजस्थान के अजमेर (किशनगढ़) में भी लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते एक रिहायशी मकान ढह गया। मदनगंज थाना पुलिस और स्थानीय रेस्क्यू टीम ने तत्परता दिखाते हुए मलबे में फंसे परिवार के सभी सदस्यों को सकुशल बाहर निकाल लिया। हादसे के बाद प्रशासन ने अलर्ट जारी करते हुए लोगों से जर्जर मकानों को तुरंत खाली करने की अपील की है।
बड़ा सवाल: मानसून की पहली बारिश में ही दिल्ली से लेकर मुंबई तक जिस तरह जलभराव और इमारतें गिरने के हादसे हो रहे हैं, उसने नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों के दावों की पोल खोल दी है। आखिर इन खतरनाक कंस्ट्रक्शन्स और जर्जर इमारतों पर मानसून से पहले कार्रवाई क्यों नहीं होती?