अयोध्या के श्री राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितता का यह हाई-प्रोफाइल मामला अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर आ गया है. नियमित ऑडिट के दौरान सामने आई वित्तीय गड़बड़ियों से शुरू हुआ यह विवाद अब एसआईटी (SIT) जांच, ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों और ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों के इस्तीफों तक पहुंच चुका है.
इसी बीच, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के उपाध्यक्ष और ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का 7 जुलाई को वायरल हुआ एक हस्ताक्षरित पत्र सामने आया है, जिसने इस पूरे कुप्रबंधन के पीछे छिपे कई बड़े राज उजागर कर दिए हैं। चंपत राय ने सीधे तौर पर ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की कार्यप्रणाली को इस महाविवाद के कटघरे में खड़ा कर दिया है।
1. महाकुंभ के दौरान हुआ था वो समझौता, जिसने बदली पूरी व्यवस्था
चंपत राय द्वारा एसआईटी को लिखे गए इस वायरल पत्र से साफ होता है कि इस पूरी गड़बड़ी की पटकथा महाकुंभ के दौरान लिखी गई थी।
- दान में हुआ कई गुना इजाफा: महाकुंभ के दौरान राम मंदिर में देश-विदेश से भक्तों का जनसैलाब उमड़ा, जिसके चलते चढ़ावे (दान की राशि) में पिछले महीनों के मुकाबले कई गुना की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- दबाव में जल्दबाजी का फैसला: अचानक बढ़े इस नकद प्रवाह के कारण ट्रस्ट पर नकदी गिनने की प्रक्रिया में तेजी लाने का भारी दबाव था।
- अनिल मिश्रा और एसबीआई का समझौता: इस दबाव के बीच, अनिल मिश्रा ने एसबीआई (SBI) की अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक गोविंद मिश्रा के साथ मिलकर एक नया समझौता ज्ञापन (MoU) साइन कर लिया। चंपत राय का दावा है कि अगस्त 2020 के बाद से एसबीआई के साथ सभी आधिकारिक पत्राचार उन्होंने स्वयं किए थे, लेकिन फरवरी 2025 में तैयार की गई इस नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को अनिल मिश्रा और बैंक अधिकारियों ने उनकी जानकारी या अनुमोदन के बिना संयुक्त रूप से तैयार किया था।
2. एसबीआई की कैश-काउंटिंग और आउटसोर्सिंग पर गंभीर सवाल
चंपत राय ने अपने पत्र में केवल अनिल मिश्रा को ही नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई (SBI) की कार्यप्रणाली को भी आड़े हाथों लिया है।
- नियमों का उल्लंघन: चंपत राय ने आरोप लगाया कि कैश रजिस्टर में नोटों के बंडलों को गिनने के लिए जो सामान्य और कड़े नियम बनाए गए हैं, उनका पालन बैंक द्वारा नहीं किया गया।
- निजी एजेंसी के कर्मचारियों पर शक: बैंक ने नकदी गिनने के काम को एक निजी एजेंसी के माध्यम से आउटसोर्स कर रखा था। चंपत राय के मुताबिक, इन आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा तय की गई बैंकिंग आचार संहिता और सामान्य नियमों का खुला उल्लंघन किया गया, जिसके कारण इतनी बड़ी चोरी को अंजाम देना आसान हो गया।
3. ‘वरिष्ठ बैंक प्रबंधन की जांच होना बेहद जरूरी’
पूर्व महासचिव चंपत राय ने एसआईटी से इस मामले में बैंक के शीर्ष अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की मांग की है। उनका कहना है कि फरवरी में जो समझौता ज्ञापन (MoU) साइन हुआ, उसने कैश काउंटिंग की पूरी सुरक्षा प्रणाली में खामियां पैदा कर दीं। यह समझौता वित्तीय सुरक्षा के सामान्य नियमों और संहिता के बिल्कुल अनुरूप नहीं लगता, इसलिए इसकी गहन जांच के लिए बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन को भी इस जांच के दायरे में शामिल किया जाना चाहिए।
3. राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद: अब तक की पूरी टाइमलाइन
- चरण 1 (नियमित ऑडिट में खुलासा): राम मंदिर ट्रस्ट के नियमित वित्तीय ऑडिट के दौरान चढ़ावे की रकम और बैंक खातों के मिलान में कथित अनियमितताएं और बड़ी विसंगतियां सामने आईं, जिससे हड़कंप मच गया.
- चरण 2 (SIT का गठन और गिरफ्तारियां): मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। जांच आगे बढ़ते ही अब तक इस मामले में संलिप्त आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।
- चरण 3 (ट्रस्ट में इस्तीफों का दौर): वित्तीय कुप्रबंधन की गाज गिरते ही ट्रस्ट के पदाधिकारियों के इस्तीफे शुरू हुए। महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा को अपने पदों से अलग होना पड़ा।
- चरण 4 (7 जुलाई – चंपत राय का पत्र वायरल): पूर्व महासचिव चंपत राय का हस्ताक्षरित पत्र वायरल हुआ, जिसने अनिल मिश्रा और एसबीआई की अयोध्या शाखा के बीच हुए सीक्रेट समझौते को सार्वजनिक कर दिया।
- आगामी घटनाक्रम (15 जुलाई): एसआईटी अपनी अंतिम और विस्तृत जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को सौंपने की तैयारी में है, जिसके बाद इस वित्तीय घोटाले में कई और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।