अयोध्या / लखनऊ। अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। शुरुआती जांच में सामने आईं चौंकाने वाली वित्तीय गड़बड़ियों को देखते हुए एसआईटी अब पिछले 5 साल के पूरे ऑडिट की परत-दर-परत री-चेकिंग करने जा रही है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब ‘पाई-पाई’ का हिसाब लिया जाएगा और जांच की आंच ट्रस्ट के सबसे बड़े पदाधिकारियों तक पहुंचनी तय मानी जा रही है। एसआईटी अब अपनी अंतिम और विस्तृत रिपोर्ट 15 जुलाई, 2026 को सरकार को सौंपेगी।
‘अंदरूनी भेदियों’ पर नकेल: अब मंदिर से बाहर निकलते समय भी होगी चेकिंग
इस महाविवाद के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर परिसर की सुरक्षा में अब तक का सबसे बड़ा ऐतिहासिक बदलाव लागू कर दिया है।
नया नियम: अब केवल श्रद्धालुओं की ही नहीं, बल्कि मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारियों, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के जवानों और हर एक अधिकृत व्यक्ति की प्रवेश (Entry) के साथ-साथ निकास (Exit) के समय भी अनिवार्य रूप से गहन तलाशी ली जाएगी।
क्यों बदलना पड़ा सुरक्षा का नियम?
अब तक मंदिर परिसर में एंट्री के वक्त तो बायोमीट्रिक और फेस रीडिंग जैसी सख्त व्यवस्था थी, लेकिन ड्यूटी खत्म करके बाहर निकलते समय नियमित तलाशी नहीं होती थी। परिचित होने के कारण कर्मचारियों को आसानी से जाने दिया जाता था। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने इसी ढील का फायदा उठाया और भगवान के चढ़ावे की भारी-भरकम धनराशि को चुपचाप परिसर से बाहर ठिकाने लगा दिया।
जांच के रडार पर ट्रस्ट के ‘बड़े नाम’, कोषाध्यक्ष से भी होगी पूछताछ
एसआईटी ने शुरुआती दौर में केवल आपराधिक पहलू (चोरी) की जांच कर एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें अब तक 8 आरोपी गिरफ्तार होकर सलाखों के पीछे जा चुके हैं। लेकिन अब जांच का दायरा वित्तीय हेरफेर और निर्माण कार्यों तक फैल गया है:
- बड़े चेहरों से पूछताछ: पूर्व महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा से पहले ही पूछताछ हो चुकी है।
- कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी निशाने पर: चूंकि मंदिर की पूरी वित्तीय देखरेख की जिम्मेदारी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी के पास थी, इसलिए एसआईटी जल्द ही उनसे भी कड़ी पूछताछ करने वाली है।
- एक्सपर्ट्स की एंट्री: ऑडिट रिपोर्ट में छिपी गड़बड़ियों और कमियों को पकड़ने के लिए एसआईटी अब चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) और वित्तीय विशेषज्ञों की मदद ले रही है।
करोड़ों हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़, 15 जुलाई को बड़ा धमाका!
अयोध्या में डेरा डाले एसआईटी के आला अधिकारी लगातार नए साक्ष्य जुटा रहे हैं। जांच टीम को कुछ ऐसे ‘अहम सुराग’ मिले हैं जो सीधे तौर पर संकेत देते हैं कि यह सिर्फ एक साधारण चोरी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वित्तीय लापरवाही थी।
भगवान राम के नाम पर देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं द्वारा भेजे गए दान में हुई इस कथित धांधली पर से पर्दा उठाने के लिए 15 जुलाई की तारीख बेहद अहम होने वाली है, जब योगी सरकार के टेबल पर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट होगी।