देश में ‘छोटू’, ‘मुन्ना’ और ‘अप्पू’ जैसे आकर्षक नामों से मशहूर 5 किलोग्राम वाले पोर्टेबल फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलेंडरों की मांग में 80 से 90 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है। वेस्ट एशिया (पश्चिम एशिया) संकट और ईरान युद्ध के चलते वैश्विक स्तर पर गैस की कीमतों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है।
प्रवासी मजदूरों, छात्रों और स्ट्रीट वेंडर्स के बीच बेहद लोकप्रिय इन छोटे सिलेंडरों की कीमतें पिछले कुछ महीनों में दोगुनी से ज्यादा हो चुकी हैं, जिसने आम उपभोक्ताओं के बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है।
क्यों आई छोटे LPG सिलेंडर्स की मांग में भारी गिरावट?
एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स के अनुसार, मांग घटने के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण हैं:
- कीमतों में रिकॉर्ड उछाल: दिल्ली में मार्च के महीने में जिस 5 किलो वाले FTL सिलेंडर की कीमत ₹323 थी, वह जून में बढ़कर ₹821.50 तक पहुंच गई। हालांकि, हाल ही में ओएमसी (OMCs) द्वारा कमर्शियल गैस के दामों में की गई कटौती के बाद अब यह दिल्ली में ₹805.50 में मिल रहा है, जो कि अभी भी बेहद ज्यादा है।
- नए कनेक्शन की लागत बढ़ी: बुधवार से नए FTL सिलेंडर कनेक्शन की कीमतों में करीब ₹160 की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में अब नया कनेक्शन ₹1,765.50 से बढ़कर ₹1,929.50 का हो गया है।
- 19kg कमर्शियल सिलेंडर से भी महंगा: ऑल-इंडिया LPG डिस्ट्रीब्यूशन फेडरेशन (उत्तर प्रदेश सर्कल) के प्रेसिडेंट जगदीश राज के मुताबिक, प्रति किलो के हिसाब से देखें तो 5kg वाला FTL सिलेंडर अब 19kg वाले बड़े कमर्शियल सिलेंडर से भी महंगा पड़ रहा है। दिल्ली में बड़े कमर्शियल सिलेंडर की दर ₹154.2 प्रति किलो है, जबकि FTL में यही गैस ₹161.1 प्रति किलो पड़ रही है।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के प्रमुख FTL ब्रांड्स
भारत में सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) इन पोर्टेबल सिलेंडरों को बिना किसी भारी कागजी कार्रवाई के, सिर्फ पहचान पत्र वेरिफिकेशन के जरिए सीधे काउंटर पर बेचती हैं:
| कंपनी का नाम | FTL ब्रांड का नाम | साइज (किलोग्राम) |
|---|---|---|
| इंडियनऑयल (IOCL) | छोटू और मुन्ना | 2kg और 5kg |
| बीपीसीएल (BPCL) | भारतगैस मिनी | 5kg |
| एचपीसीएल (HPCL) | HP गैस अप्पू | 5kg |
प्रवासी मजदूरों के पलायन और रोजगार पर पड़ा सीधा असर
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट के चेयरमैन एस. इरुदया राजन के अनुसार, ईंधन संकट और आसमान छूती कीमतों के कारण छोटे कारोबार, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड वेंडर्स बंद होने की कगार पर पहुंच गए। इसके चलते बड़े पैमाने पर प्रवासी मजदूर (जैसे केरल और अन्य औद्योगिक शहरों से) अपने गृहनगर लौटने को मजबूर हुए।
“युद्ध और सप्लाई चेन बाधित होने से लोगों की नौकरियां गईं और कर्ज का बोझ बढ़ा, जिसके कारण मजदूरों को शहरों से पलायन करना पड़ा। यही वजह है कि अब लोग सिलेंडरों को रिफिल कराने वापस नहीं आ रहे हैं।”
औद्योगिक शहरों में वापसी, पर रिफिलिंग की चुनौती बरकरार
फेडरेशन ऑफ पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रेसिडेंट बदीश जिंदल ने बताया कि लुधियाना जैसे औद्योगिक शहरों में 85-90 फीसदी इंडस्ट्रियल वर्कर अब काम पर लौटने लगे हैं। हालांकि, आधिकारिक चैनलों से एलपीजी सिलेंडर रिफिल मिलना अभी भी एक बड़ी चुनौती है। इसके चलते कई प्रवासी मजदूर अनऑथराइज्ड (अवैध) रिफिलिंग सेंटर्स पर निर्भर हैं, जहां उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
सरकार और तेल कंपनियां इन पोर्टेबल सिलेंडरों की पहुंच बढ़ाने के लिए विशेष कैंप भी आयोजित कर रही हैं, लेकिन जब तक कीमतों में बड़ी राहत नहीं मिलती, तब तक ‘छोटू’ और ‘मुन्ना’ की मांग का पटरी पर लौटना मुश्किल नजर आ रहा है।