नई दिल्ली/ढाका। बांग्लादेश में मचे भारी राजनीतिक घमासान और तख्तापलट के बाद भारत में शरण ले रखीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अब तक का सबसे बड़ा और सनसनीखेज दावा किया है। एक विशेष ईमेल इंटरव्यू में शेख हसीना ने साफ कर दिया है कि वह इसी साल (2026 में) हर हाल में बांग्लादेश लौटेंगी। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ कोर्ट से आया मौत की सजा का फैसला कोई न्याय नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध है और वह मौत के डर से पीछे हटने वाली नहीं हैं।
शेख हसीना ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस और बीएनपी (BNP) गठबंधन पर देश को ‘पाकिस्तानी रास्ते’ पर धकेलने का गंभीर आरोप लगाया है।
‘अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाना नामुमकिन, हम जनता की ताकत हैं’
अवामी लीग (Awami League) पर लगे राजनीतिक प्रतिबंध और दमन चक्र पर बोलते हुए शेख हसीना ने कहा:
- 77 साल पुराना इतिहास: अवामी लीग कोई कागजी पार्टी नहीं है जिसे एक आदेश से मिटाया जा सके। यह बंगाल की मिट्टी और इतिहास से जुड़ी पार्टी है।
- दमन से वापसी का रिकॉर्ड: इतिहास गवाह है कि अवामी लीग पर पहले भी कई बार प्रतिबंध लगे, नेताओं की हत्याएं हुईं, लेकिन हर बार पार्टी और मजबूत होकर उभरी। पार्टी किसी सरकार की ‘कृपा’ या बीएनपी के साथ किसी ‘गुप्त समझौते’ के भरोसे नहीं, बल्कि जनता के समर्थन से वापसी करेगी।
शेख हसीना ने वर्तमान यूनुस और बीएनपी शासन के दौरान देश की कानून-व्यवस्था और कट्टरपंथ को लेकर वैश्विक समुदाय को आगाह किया है:
- मुक्ति संग्राम की भावना पर चोट: 5 अगस्त के घटनाक्रम के बाद से स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान किया जा रहा है। ‘जय बंगला’ के नारे को अपराध बना दिया गया और राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर रहमान के स्मारकों को तोड़ा गया।
- अल्पसंख्यकों पर अत्याचार: देश में हिंदू, बौद्ध, ईसाई, अहमदिया और सूफी दरगाहें अब सुरक्षित नहीं हैं। मंदिरों में तोड़फोड़ हो रही है। अल्पसंख्यकों के हक की आवाज उठाने वाले हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास (Chinmoy Krishna Das) को आज भी झूठे मुकदमों में जेल में बंद रखा गया है। उन्होंने साफ कहा कि अल्पसंख्यक कोई वोट बैंक नहीं, बल्कि देश के समान नागरिक हैं।
आर्थिक तबाही का दावा: ‘हमारे दौर में दुनिया की 35वीं बड़ी इकोनॉमी था बांग्लादेश’
अपनी सरकार के कामकाज की तुलना आज के हालात से करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके समय बांग्लादेश विकास की नई मिसाल बना था:
- शानदार आर्थिक आंकड़े: साल 2023 में बांग्लादेश की जीडीपी (GDP) ग्रोथ रेट 7.25% थी और प्रति व्यक्ति आय 2,793 डॉलर पहुंच चुकी थी।
- बड़े प्रोजेक्ट्स का जिक्र: उनके कार्यकाल में पद्मा ब्रिज, मेट्रो रेल, कर्णफुली टनल और बंगबंधु सैटेलाइट जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स पूरे हुए। लेकिन आज अर्थव्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर है और उग्रवाद चरम पर है।
‘शारीरिक रूप से भारत में हूँ, लेकिन दिल बांग्लादेश में धड़कता है’
भारत में अपने निर्वासन के दिनों को साझा करते हुए शेख हसीना ने भावुक लहजे में कहा कि उनका व्यक्तिगत जीवन अब समाप्त हो चुका है और उनका पूरा जीवन बांग्लादेश की जनता के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा, “मैं भारत की धरती पर जरूर हूँ, लेकिन मेरा दिल हर पल बांग्लादेश के पीड़ित कार्यकर्ताओं और वहां की जनता के लिए धड़कता है। मैं अपनी आखिरी सांस तक बांग्लादेश में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की बहाली के लिए लड़ती रहूंगी।”