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Reading: मृत्यु से पहले क्यों चलती है ‘उल्टी सांस’? जानिए शरीर में क्या होता है उस वक्त, क्या व्यक्ति को होता है दर्द?
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Indian Press House > Blog > Latest News > मृत्यु से पहले क्यों चलती है ‘उल्टी सांस’? जानिए शरीर में क्या होता है उस वक्त, क्या व्यक्ति को होता है दर्द?
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मृत्यु से पहले क्यों चलती है ‘उल्टी सांस’? जानिए शरीर में क्या होता है उस वक्त, क्या व्यक्ति को होता है दर्द?

vineet verma
Last updated: June 25, 2026 7:17 am
vineet verma
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नई दिल्ली : अक्सर लोगों ने अपने आसपास यह बात सुनी या देखी होती है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु से पहले उसकी “उल्टी सांस” चलने लगती है। आम बोलचाल में इस शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन मेडिकल विज्ञान में इसे सांस लेने के एक विशेष और अनियमित पैटर्न के रूप में समझा जाता है। यह स्थिति अक्सर जीवन के अंतिम चरण में दिखाई दे सकती है और कई लोगों के लिए भावनात्मक रूप से परेशान करने वाली होती है।

Contents
क्या होती है ‘उल्टी सांस’?मृत्यु के करीब आने पर ऐसा क्यों होता है?क्या इस दौरान व्यक्ति को दर्द होता है?क्या यह केवल मृत्यु से पहले ही होती है?विज्ञान ने इस पैटर्न को कैसे समझा?

विशेषज्ञों के अनुसार, यह सामान्य सांस लेने जैसी प्रक्रिया नहीं होती। इसमें सांसों की गति, गहराई और अंतराल बदल जाते हैं। कई मामलों में इसे अंतिम सांसों का पैटर्न या डेथ रेटल जैसे शब्दों से भी जोड़ा जाता है।

क्या होती है ‘उल्टी सांस’?

सामान्य स्थिति में सांस लेने पर छाती और पेट एक नियमित लय में काम करते हैं। लेकिन जीवन के अंतिम चरण में सांस लेने का तरीका बदल सकता है।

इस दौरान व्यक्ति कुछ समय तक बहुत गहरी सांस ले सकता है, फिर सांस धीमी पड़ सकती है और कुछ सेकेंड तक पूरी तरह रुक भी सकती है। इसके बाद फिर अचानक लंबी और गहरी सांस आ सकती है। कई बार इस दौरान गले या छाती से घरघराहट जैसी आवाज भी सुनाई देती है। इसी अनियमित पैटर्न को आम भाषा में उल्टी सांस कहा जाता है।

मृत्यु के करीब आने पर ऐसा क्यों होता है?

मेडिकल दृष्टि से इसके पीछे कई शारीरिक बदलाव जिम्मेदार माने जाते हैं।

पहला कारण मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की कम होती आपूर्ति माना जाता है। जब शरीर के अंग धीरे-धीरे काम कम करने लगते हैं, तो सांस नियंत्रित करने वाले हिस्से की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

दूसरा कारण शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड का बढ़ना हो सकता है। ऐसी स्थिति में शरीर कभी-कभी अचानक गहरी सांस लेकर संतुलन बनाने की कोशिश करता है।

तीसरा कारण निगलने की क्षमता कम होना माना जाता है, जिससे गले में लार या तरल जमा हो सकता है और सांस के साथ घरघराहट जैसी आवाज पैदा हो सकती है।

क्या इस दौरान व्यक्ति को दर्द होता है?

चिकित्सकीय समझ के अनुसार, जीवन के अंतिम चरण में इस तरह की सांसें हमेशा दर्द का संकेत नहीं मानी जातीं। कई मामलों में व्यक्ति की चेतना कम हो चुकी होती है और वह बाहरी अनुभवों को पहले जैसा महसूस नहीं करता।

हालांकि हर व्यक्ति की स्थिति अलग हो सकती है और दर्द या असुविधा का अनुभव बीमारी, स्थिति और देखभाल पर निर्भर करता है। इसलिए इसे हर मामले में एक जैसा नहीं माना जाता।

क्या यह केवल मृत्यु से पहले ही होती है?

नहीं। इसी तरह की अनियमित सांसें कुछ गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों में भी दिखाई दे सकती हैं। इनमें गंभीर हृदय समस्याएं, मस्तिष्क से जुड़ी स्थितियां, फेफड़ों के गंभीर रोग, निमोनिया, स्ट्रोक या ऑक्सीजन की भारी कमी जैसी परिस्थितियां शामिल हो सकती हैं।

अगर किसी व्यक्ति में अचानक सांस रुक-रुक कर चलने लगे, घरघराहट हो या सांस लेने में गंभीर कठिनाई दिखे, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो सकता है।

विज्ञान ने इस पैटर्न को कैसे समझा?

सांस लेने के इस तरह के पैटर्न का अध्ययन लंबे समय से किया जा रहा है। समय के साथ वैज्ञानिकों ने पाया कि शरीर के अंतिम चरण या कुछ गंभीर चिकित्सकीय स्थितियों में सांस नियंत्रण की प्रक्रिया बदल सकती है।

आज चिकित्सा विज्ञान इस तरह के सांस पैटर्न को कई गंभीर स्थितियों की पहचान और निगरानी में भी उपयोगी संकेत के रूप में देखता है।

 

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