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Reading: आसमान साफ, फिर भी मौसम विभाग कैसे बता देता है बारिश? जानिए बादलों से पहले कैसे पकड़ ली जाती है बारिश की आहट
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आसमान साफ, फिर भी मौसम विभाग कैसे बता देता है बारिश? जानिए बादलों से पहले कैसे पकड़ ली जाती है बारिश की आहट

vineet verma
Last updated: June 25, 2026 7:15 am
vineet verma
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नई दिल्ली : कई बार आसमान बिल्कुल साफ दिखाई देता है, तेज धूप पड़ रही होती है और अचानक मौसम विभाग बारिश का अलर्ट जारी कर देता है। कुछ घंटों बाद सचमुच बादल घिरते हैं और बारिश शुरू हो जाती है। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि आखिर मौसम विभाग को पहले से कैसे पता चल जाता है कि बारिश होने वाली है?

Contents
मौसम स्टेशन हर मिनट भेजते हैं आसमान का हालआसमान में छोड़े जाते हैं मौसम गुब्बारेसमुद्र से भी मिलते हैं बारिश के संकेतहवाई जहाज भी बन जाते हैं मौसम के रिपोर्टरडॉप्लर रडार ऐसे पकड़ता है बारिश का संकेतउपग्रह रखता है पूरी धरती पर नजरबारिश होने का अंतिम संकेत क्या होता है?फिर भी कई बार क्यों गलत हो जाता है मौसम का अनुमान?

दरअसल, मौसम का पूर्वानुमान अनुमान नहीं बल्कि वैज्ञानिक विश्लेषण की एक जटिल प्रक्रिया है। इसमें वायुमंडल, समुद्र, हवा, तापमान और बादलों से जुड़े लाखों आंकड़ों का अध्ययन करके आने वाले मौसम का अनुमान लगाया जाता है।

मौसम स्टेशन हर मिनट भेजते हैं आसमान का हाल

मौसम की जानकारी जुटाने के लिए जमीन पर स्थापित मौसम स्टेशन लगातार काम करते हैं। ये तापमान, वायुदाब, हवा की दिशा और गति के साथ वातावरण में नमी को रिकॉर्ड करते हैं।

दुनियाभर में हजारों मौसम स्टेशन सक्रिय हैं और भारत में भी बड़ी संख्या में ऐसे केंद्र लगातार डेटा भेजते रहते हैं। यही जानकारी आगे मौसम मॉडल तैयार करने में इस्तेमाल होती है।

आसमान में छोड़े जाते हैं मौसम गुब्बारे

मौसम विभाग केवल जमीन पर निर्भर नहीं रहता। इसके लिए नियमित रूप से विशेष मौसम गुब्बारे भी छोड़े जाते हैं।

इन गुब्बारों के साथ रेडियोसोंड नाम की मशीन लगी होती है, जो ऊंचाई पर जाकर तापमान, आर्द्रता, वायुदाब और हवा की दिशा से जुड़ा डेटा भेजती रहती है। इससे पता चलता है कि ऊपर के वायुमंडल में क्या बदलाव हो रहे हैं।

समुद्र से भी मिलते हैं बारिश के संकेत

बारिश और मानसून को समझने में समुद्र की भूमिका बेहद अहम होती है। समुद्री सतह का तापमान, लहरों का व्यवहार, धाराएं और नमी का स्तर लगातार मापा जाता है।

इसके लिए समुद्र में तैरने वाले विशेष उपकरण और निगरानी प्रणालियां काम करती हैं, जो मौसम वैज्ञानिकों तक लगातार जानकारी पहुंचाती हैं।

हवाई जहाज भी बन जाते हैं मौसम के रिपोर्टर

बहुत कम लोग जानते हैं कि दुनिया भर में हजारों वाणिज्यिक विमान उड़ान के दौरान मौसम संबंधी आंकड़े भी इकट्ठा करते हैं।

ये विमान ऊपरी वायुमंडल में तापमान, नमी और हवाओं की स्थिति रिकॉर्ड करके सिस्टम तक पहुंचाते हैं, जिससे पूर्वानुमान और सटीक बनाने में मदद मिलती है।

डॉप्लर रडार ऐसे पकड़ता है बारिश का संकेत

बारिश का अनुमान लगाने में सबसे अहम भूमिका डॉप्लर वेदर रडार निभाता है। यह रेडियो तरंगें भेजता है, जो बादलों में मौजूद पानी की बूंदों और बर्फ से टकराकर वापस लौटती हैं।

इन संकेतों के आधार पर वैज्ञानिक समझते हैं कि बादल कितने घने हैं, किस दिशा में बढ़ रहे हैं और कब तक बारिश कर सकते हैं।

उपग्रह रखता है पूरी धरती पर नजर

मौसम उपग्रह अंतरिक्ष से लगातार बादलों की गतिविधि, समुद्री तापमान, नमी, बर्फ और मानसून की चाल पर नजर रखते हैं।

इन्हीं आंकड़ों की मदद से बड़े मौसम बदलाव, चक्रवात और बारिश के पैटर्न को पहले से समझा जाता है।

बारिश होने का अंतिम संकेत क्या होता है?

जब तापमान बढ़ता है तो गर्म हवा ऊपर उठती है और अपने साथ नमी लेकर जाती है। ऊपर जाकर यह ठंडी होती है और बादल बनने लगते हैं।

अगर हवा में नमी का स्तर अधिक हो और वातावरण में ऊपर उठने वाली गतिविधि तेज हो जाए, तो बारिश की संभावना मजबूत हो जाती है। वैज्ञानिक इन्हीं संकेतों को जोड़कर पूर्वानुमान तैयार करते हैं।

फिर भी कई बार क्यों गलत हो जाता है मौसम का अनुमान?

वायुमंडल बेहद जटिल प्रणाली है। डेटा में थोड़ी सी कमी, अचानक बदलती हवा या स्थानीय बदलाव भी पूरे पूर्वानुमान को प्रभावित कर सकते हैं।

इसी वजह से कई बार मौसम विभाग के अनुमान पूरी तरह सटीक नहीं बैठते, हालांकि आधुनिक तकनीकों के कारण पहले के मुकाबले पूर्वानुमान काफी बेहतर और तेज हुए हैं।

 

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