वाशिंगटन/तेहरान। मिडिल ईस्ट (Middle East) में पिछले कई महीनों से जारी भीषण सैन्य तनाव के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति के लिहाज से एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। कट्टर दुश्मन माने जाने वाले अमेरिका और ईरान (US-Iran) दुनिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक समुद्री रास्ते ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) पर एक विशेष मिलिट्री हॉटलाइन और कोऑर्डिनेशन सेंटर बनाने पर सहमत हो गए हैं।
इस ऐतिहासिक कदम के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति (Global Oil Supply) पर मंडरा रहा खतरे का बादल छंट गया है और किसी भी संभावित सैन्य टकराव की आशंका फिलहाल टल गई है।
स्विट्जरलैंड में लगी मुहर, ईरानी वार्ताकार ने की पुष्टि
स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ हुई उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत से लौटते समय ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) ने इस ऐतिहासिक समझौते की पुष्टि की है। गालिबफ ने स्पष्ट किया:
“अब होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से ईरानी व्यवस्थाओं के तहत मैनेज किया जाएगा। इस हॉटलाइन का मुख्य मकसद खाड़ी से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों के संबंध में किसी भी गलतफहमी को रोकना और सबसे ऊंचे स्तर की सुरक्षा को पक्का करना है।”
$12 बिलियन का फ्रोजन फंड और तेल प्रतिबंधों पर बनी बात
इस कूटनीतिक बातचीत में ईरान को एक बड़ी आर्थिक संजीवनी मिली है। समझौते के तहत निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी है:
- फ्रीज फंड की वापसी: अमेरिका द्वारा फ्रीज किए गए ईरान के 12 बिलियन डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये) के फंड तक अब तेहरान की पहुंच दोबारा बहाल होगी।
- तेल बैन से राहत: ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों को हटाने से जुड़ी अंतिम डिटेल्स को फाइनल कर लिया गया है।
- 80 मिनट की सीक्रेट मीटिंग: दोनों देशों के अधिकारियों के बीच करीब 80 मिनट तक चली इस बैठक में ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ के तहत प्रतिबद्धताओं को लागू करने पर फोकस रहा।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा- ‘बहुत अच्छा दिन’
वाशिंगटन में इस कूटनीतिक प्रगति पर खुशी जताते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने इसे एक “बहुत, बहुत अच्छा दिन” करार दिया। वेंस ने कहा कि दोनों पक्षों ने काफी सकारात्मक और ठोस प्रगति की है। यह क्वाड (Quad) फ्रेमवर्क के तहत बातचीत का पहला दौर था, जिसका अंतिम उद्देश्य वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक स्थायी शांति समझौता स्थापित करना है।
कैसे काम करेगी यह नई ‘मिलिट्री हॉटलाइन’?
होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का लगभग एक-तिहाई तेल गुजरता है। इस सुरक्षा सिस्टम के तहत:
- डायरेक्ट कनेक्टिविटी: यदि अमेरिकी नौसेना या किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय जहाज को रूटिंग, चेकिंग या सुरक्षा को लेकर कोई भी आपत्ति होगी, तो वे सीधे इस कोऑर्डिनेशन सेंटर को कॉल कर सकेंगे।
- गलतफहमी का अंत: समुद्र में आमने-सामने आने पर दोनों देशों की सेनाएं बिना देरी किए सीधे शीर्ष स्तर पर बात कर स्थिति को संभाल सकेंगी।
- अंतरराष्ट्रीय कानून: ईरान ने आश्वासन दिया है कि वह इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों को पूरी तरह लागू रखेगा।
वैश्विक बाजार के लिए क्यों बड़ी है यह खबर?
अमेरिका और ईरान के बीच इस कूटनीतिक सफलता से वैश्विक बाजारों ने राहत की सांस ली है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव कम होने से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में स्थिरता आएगी और शिपिंग कंपनियों का जोखिम कम होगा। यह समझौता साबित करता है कि महीनों की गोलाबारी के बाद आखिरकार कूटनीति की जीत हुई है।