अयोध्या।अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) की कार्रवाई का आज दूसरा दिन है।
लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, सीबीआई (CBI) के अनुभव वाले आईजी किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन की तीन सदस्यीय हाई-प्रोफाइल टीम ने अयोध्या पहुंचकर मामले की कमान संभाल ली है।
सोमवार को दोपहर 2 बजे से लेकर रात 10 बजे तक (लगातार 8 घंटे) मंदिर परिसर और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यालय में चली मैराथन जांच के बाद आज टीम एक बार फिर छानबीन को आगे बढ़ाएगी।
3 अनुभवी अधिकारी, 3 अलग नजरिए: कैसे हो रही है कड़ाई से पड़ताल?
इस SIT में शामिल तीनों अधिकारियों को उनके संबंधित क्षेत्रों का विशेषज्ञ माना जाता है। जांच को पारदर्शी बनाने के लिए इसे तीन अलग-अलग स्तरों पर बांटा गया है:
- प्रशासनिक व्यवस्था (विजय विश्वास पंत): मंडलायुक्त मंदिर के भीतर की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था, नियम और मंदिर संचालन के तरीकों की कमियों को देख रहे हैं।
- क्राइम एंगल और लूपहोल्स (आईजी किरण एस.): सीबीआई में काम कर चुके आईजी किरण एस. पुलिसिया नजरिए से इस बात की जांच कर रहे हैं कि सुरक्षा में कहां चूक हुई और चोरी का तरीका क्या हो सकता है।
- फॉरेंसिक ऑडिट (नील रतन): वित्त विभाग के विशेष सचिव अकाउंट बुक्स, बही-खातों और बैंक में जमा होने वाली रकम के मिलान में किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी (Financial Fraud) की तलाश कर रहे हैं।
दान पेटी से बैंक तक: 50 लोगों की टीम और वाराणसी कनेक्शन की जांच
सोमवार को वीवीआईपी गेट से दाखिल होने के बाद SIT ने सबसे पहले रामलला के दर्शन किए और फिर परिसर में रखीं 40 दान पेटियों का बारीकी से मुआयना किया। अधिकारियों ने पाया कि दान पेटियों से सीधे पैसे निकालना लगभग असंभव है।
इसके बाद जांच का मुख्य केंद्र वह हॉल बना जहां चढ़ावे की गिनती होती है। इस प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों की पूरी कुंडली खंगाली जा रही है:
- वाराणसी कनेक्शन: वाराणसी की एक निजी कंपनी के 24 कर्मचारी यहां नोटों की गड्डियां बनाते हैं।
- निगरानी: इन कर्मचारियों पर ट्रस्ट के 12 कर्मचारी कड़ी नजर रखते हैं।
- गिनती की कमान: इसके बाद टीसीएस (TCS) और एसबीआई (SBI) के 14 अधिकारी/कर्मचारी मिलकर नोटों की फाइनल गिनती करते हैं।
SIT ने इन सभी कर्मचारियों के आने-जाने के समय का रजिस्टर, उनकी तलाशी (Frisking) की व्यवस्था और पिछले 1 साल के भीतर नौकरी छोड़ने वाले सभी कर्मियों का पूरा ब्यौरा अपने कब्जे में ले लिया है। इसके अलावा मंदिर के पूरे सीसीटीवी (CCTV) नेटवर्क और उसके बैकअप सिस्टम को भी खंगाला गया है।
अधिकारियों के सामने असहज दिखे ट्रस्ट के पदाधिकारी, 15 दिनों में आएगी रिपोर्ट
जांच के पहले दिन ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और व्यवस्थापक गोपाल राव कार्यालय में मौजूद रहे, जबकि अनिल मिश्रा खराब स्वास्थ्य के कारण उपस्थित नहीं हो सके। जांच के दौरान मंदिर व्यवस्थापक गोपाल राव काफी असहज नजर आए और उन्होंने मीडिया के तीखे सवालों से पूरी तरह दूरी बनाए रखी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित इस SIT को अपनी विस्तृत और गोपनीय रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपनी है। इस रिपोर्ट के आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि रामलला के चढ़ावे में कितनी बड़ी हेराफेरी हुई है और इसके पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है।