हैदराबाद: तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम जिले में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। देर रात आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.8 दर्ज की गई। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार भूकंप रात करीब 2 बजकर 26 मिनट पर दर्ज किया गया। इसका केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। रात का समय होने के कारण बड़ी संख्या में लोग सो रहे थे, इसलिए कई लोगों को झटकों का एहसास भी नहीं हुआ।
कम तीव्रता होने से टला बड़ा नुकसान
विशेषज्ञों के अनुसार 3.8 तीव्रता का भूकंप आम तौर पर हल्की श्रेणी में माना जाता है। ऐसे भूकंप के दौरान कंपन महसूस हो सकता है, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में बड़े स्तर पर नुकसान की आशंका बेहद कम रहती है। भद्राद्री कोठागुडेम जिले में भी किसी संरचनात्मक क्षति या घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई।
स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों ने हल्के कंपन महसूस किए, लेकिन स्थिति जल्द सामान्य हो गई।
किस तीव्रता के भूकंप कितना असर डालते हैं?
भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल या आधुनिक मॉमेंट मैग्नीट्यूड स्केल पर मापी जाती है। यह एक लॉगरिदमिक प्रणाली होती है, जिसमें हर एक अंक बढ़ने पर कंपन की ताकत कई गुना बढ़ जाती है।
- 3.0 से कम: बहुत हल्का, आमतौर पर महसूस नहीं होता
- 3.0–3.9: हल्का, महसूस हो सकता है लेकिन नुकसान बहुत कम
- 4.0–4.9: हल्का से मध्यम, कमजोर ढांचों पर असर संभव
- 5.0–5.9: मध्यम, कमजोर इमारतों को नुकसान हो सकता है
- 6.0–6.9: मजबूत, बड़े इलाके में असर
- 7.0–7.9: गंभीर भूकंप, व्यापक नुकसान की आशंका
- 8.0 या उससे ऊपर: अत्यधिक विनाशकारी, बड़े पैमाने पर तबाही संभव
आखिर क्यों आते हैं भूकंप?
वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी की सतह कई टेक्टॉनिक प्लेटों में बंटी हुई है। ये प्लेटें लगातार गति करती रहती हैं। जब प्लेटें आपस में टकराती हैं, खिसकती हैं या अलग होती हैं तो उनके बीच जमा तनाव अचानक ऊर्जा के रूप में बाहर निकलता है। यही ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में महसूस होती है।
भारत इंडियन प्लेट पर स्थित है, जो यूरेशियन प्लेट की ओर बढ़ रही है। इसी भूगर्भीय गतिविधि के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में समय-समय पर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। तेलंगाना भूकंप की दृष्टि से अपेक्षाकृत कम सक्रिय क्षेत्र माना जाता है, लेकिन यहां भी कभी-कभी हल्के झटके दर्ज किए जाते हैं।