शिमला: भारत में सामान्य ज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान अक्सर एक सवाल पूछा जाता है कि देश का सबसे ज्यादा पर्वतीय क्षेत्र वाला राज्य कौन सा है। इस सवाल पर ज्यादातर लोग उत्तराखंड, सिक्किम या जम्मू-कश्मीर का नाम लेते हैं, लेकिन भौगोलिक आधार पर जवाब कुछ और माना जाता है। पर्वतीय क्षेत्र के विस्तार और भौगोलिक संरचना के आधार पर हिमाचल प्रदेश को देश के सबसे अधिक पर्वतीय राज्यों में गिना जाता है।
क्यों माना जाता है हिमाचल प्रदेश सबसे ज्यादा पर्वतीय राज्य?
हिमाचल प्रदेश का कुल क्षेत्रफल करीब 55,673 वर्ग किलोमीटर है और इसका बड़ा हिस्सा पर्वतीय भूभाग से बना हुआ है। राज्य की पहचान ऊंचे पहाड़ों, घाटियों, हिमाच्छादित क्षेत्रों और पहाड़ी जीवनशैली से जुड़ी हुई है। यहां का अधिकांश भूभाग पहाड़ी ढलानों और पर्वतीय संरचनाओं पर आधारित है।
तीन बड़े पर्वतीय क्षेत्रों में बंटा है पूरा राज्य
हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक संरचना मुख्य रूप से तीन हिस्सों में विभाजित मानी जाती है। इसमें बाहरी हिमालय यानी शिवालिक क्षेत्र, मध्य हिमालय जिसमें धौलाधार और पीर पंजाल क्षेत्र शामिल हैं, और आंतरिक या महान हिमालय क्षेत्र शामिल है। राज्य की ऊंचाई लगभग 350 मीटर से लेकर 7 हजार मीटर तक फैली हुई है।
राज्य की सबसे ऊंची चोटी रियो पुरग्यिल मानी जाती है, जिसकी ऊंचाई 6,816 मीटर बताई जाती है।
लोग उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर को क्यों समझ लेते हैं आगे?
इस सवाल में अक्सर लोग सबसे ऊंची चोटियों और प्रसिद्ध पर्वतों को आधार बना लेते हैं। उत्तराखंड में कई ऊंची चोटियां मौजूद हैं और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख क्षेत्र में विश्व स्तर की पर्वत श्रृंखलाएं हैं, लेकिन कुल पर्वतीय क्षेत्र, उसकी घनत्व और भौगोलिक विस्तार का आकलन अलग तरीके से किया जाता है।
सिक्किम भी पूरी तरह पर्वतीय राज्य माना जाता है, लेकिन उसका कुल क्षेत्रफल अपेक्षाकृत छोटा है।
नदियां, घाटियां और पहाड़ बनाते हैं हिमाचल की पहचान
हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में चोटियां, घाटियां, ग्लेशियर और नदी तंत्र मौजूद हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था भी काफी हद तक पर्वतीय परिस्थितियों पर आधारित है। पर्यटन, सेब उत्पादन, जल विद्युत परियोजनाएं और वन आधारित गतिविधियां यहां के प्रमुख क्षेत्र हैं।
मनाली, शिमला, डलहौजी, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जैसे इलाके देश और दुनिया के पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हैं।
जलवायु परिवर्तन बना नई चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिवर्तन का असर भी दिखाई दे रहा है। ग्लेशियरों के पिघलने, भूस्खलन और अचानक मौसम बदलाव जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास पर लगातार काम किया जा रहा है।