वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा गतिरोध अब खत्म हो गया है और तेहरान ने भविष्य में कभी परमाणु हथियार न बनाने पर सहमति जता दी है। हालांकि, ईरान ने अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, जिससे इस शांति वार्ता पर सस्पेंस बना हुआ है।
ट्रंप के दावे और ईरान का रुख: मुख्य बिंदु
- शांति की ओर कदम: एक ऑनलाइन रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, “हमने ईरान के साथ युद्ध खत्म कर दिया है। परमाणु हथियार न रखने की शर्त पर सहमति बनी है, जो हमारा मुख्य लक्ष्य था।”
- ईरान की चुप्पी: ट्रंप के दावों के विपरीत, ईरान की ‘तस्नीम समाचार एजेंसी’ ने इसे खारिज करते हुए कहा कि पिछले दो महीनों में ट्रंप 38 बार ऐसे दावे कर चुके हैं। तेहरान का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी तरफ से घोषणा न हो, इसे अंतिम न माना जाए।
- सैन्य कार्रवाई पर रोक: राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी दी कि प्रस्तावित सैन्य हमले रद्द कर दिए गए हैं क्योंकि बातचीत सफल होती दिख रही है।
समझौते का ‘ब्लूप्रिंट’ और चुनौतियां
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस शांति समझौते के ड्राफ्ट को इजराइल, सऊदी अरब, कतर, यूएई, तुर्किये और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रीय देशों का समर्थन प्राप्त है। हालांकि, इजराइल का रुख इस समझौते को लेकर पहले से ही संदेहास्पद रहा है।
अहम बातें:
- होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी: समझौते के अंतिम रूप लेने तक होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी।
- यूरोप में दस्तखत: जानकारी के अनुसार, इस समझौते पर हस्ताक्षर इसी सप्ताहांत यूरोप में हो सकते हैं, जहाँ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मौजूद रह सकते हैं।
- विफल होने की आशंका: राजनयिक सूत्रों का कहना है कि समझौते के कई बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है, लेकिन अभी भी इसके टूटने की 50% संभावना बनी हुई है।
क्या यह शांति का नया युग है?
एक तरफ ट्रंप इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि जब तक दोनों देशों के बीच औपचारिक हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक इस ‘युद्ध विराम’ को अस्थायी माना जाना चाहिए। क्या वाकई ईरान परमाणु हथियारों की दौड़ से पीछे हटेगा, या यह सिर्फ एक और कूटनीतिक पैंतरा है? दुनिया की नजरें अब इस वीकेंड होने वाली बैठकों पर टिकी हैं।