ग्लासगो/नई दिल्ली। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित 23वें राष्ट्रमंडल खेल (Commonwealth Games 2026) में भारतीय पैरा-एथलीटों का शानदार प्रदर्शन जारी है। भारत की स्टार पैरा-एथलीट शर्मिला धनकड़ ने महिलाओं के पैरा शॉट पुट (F57) इवेंट में इतिहास रचते हुए स्वर्ण पदक (Gold Medal) अपने नाम कर लिया है। मीराबाई चानू के बाद ग्लासगो 2026 में भारत का यह दूसरा गोल्ड मेडल है।
शर्मिला ने 9.81 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ इस स्पर्धा में पहला स्थान हासिल किया। वह इस कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं।
2 साल की उम्र में पोलियो और दहेज का दंश: जान देने की कगार पर पहुंच गई थीं शर्मिला
हरियाणा के झज्जर जिले के चितरौली गांव की रहने वाली शर्मिला का जीवन शुरुआती दौर से ही संघर्षों से घिरा रहा।
- बचपन में पोलियो: महज 2 साल की उम्र में पोलियो के कारण उनका बायां पैर प्रभावित हो गया। दृष्टिहीन मां और किसान पिता के तंगहाली भरे माहौल में पली-बढ़ीं शर्मिला के लिए रास्ते कभी आसान नहीं रहे।
- घरेलू हिंसा से बिगड़े हालात: 18 वर्ष की आयु में हुई पहली शादी के बाद उन्हें ससुराल में गंभीर घरेलू हिंसा, ताने और दहेज प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। रोज-रोज के शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न से तंग आकर एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्होंने अपनी जीवनलीला समाप्त करने (आत्महत्या) का मन बना लिया था।
28 की उम्र में दूसरी शादी ने बदली किस्मत, 34 में हुआ पैरा-डेब्यू
पहले पति से तलाक के बाद शर्मिला पर दो बेटियों के लालन-पालन की जिम्मेदारी आ गई। उन्होंने अपने पैरों पर खड़े होने के लिए कई छोटे-मोटे काम किए। 28 साल की उम्र में उनकी जिंदगी में नया मोड़ आया, जब उन्होंने अजीत सिंह से दूसरी शादी की।
- पति ने पहचाना हुनर: अजीत सिंह ने न सिर्फ शर्मिला को संभाला बल्कि उन्हें पैरा-एथलेटिक्स में किस्मत आजमाने के लिए प्रेरित किया।
- कोच टेकचंद का मार्गदर्शन: रेवाड़ी के राव तुलाराम स्टेडियम में पूर्व पैरा-एथलीट टेकचंद की देखरेख में उन्होंने कड़ी ट्रेनिंग शुरू की।
- देर से शुरुआत, बड़ा मुकाम: शर्मिला ने 34 वर्ष की उम्र में अपना ऑफिशियल डेब्यू किया।
बर्मिंघम 2022 का अधूरा सपना ग्लासगो 2026 में हुआ पूरा
4 साल पहले 2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में शर्मिला चौथे स्थान पर रहकर मेडल से चूक गई थीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और 2026 के ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में 9.81 मीटर के थ्रो के साथ न सिर्फ अपना पुराना हिसाब बराबर किया, बल्कि तिरंगा लहराकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया।