पश्चिम बंगाल के बाहर राष्ट्रीय स्तर पर पैर पसारने की कोशिशों में जुटी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और तगड़ा झटका लगा है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की बेहद भरोसेमंद और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव (Sushmita Dev) ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
सांसदों और विधायकों की आंतरिक बगावत से पहले से ही जूझ रही टीएमसी के लिए सुष्मिता देव का यह कदम किसी बड़े सियासी भूकंप से कम नहीं है। राजनीतिक गलियारों में इस इस्तीफे को ममता बनर्जी के ‘राष्ट्रीय विस्तार’ के सपने के अंत के रूप में देखा जा रहा है।
ममता की ‘खास’ और टीएमसी का राष्ट्रीय चेहरा थीं सुष्मिता
सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे मोड़ पर आया है जब टीएमसी के कई बड़े नेता और सांसद पहले ही अलग गुट बनाने की राह पर हैं। सुष्मिता देव के इस्तीफे के मायने इन 3 बिंदुओं से समझिए:
- पूर्वोत्तर में बड़ा चेहरा: कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में शामिल हुईं सुष्मिता देव को ममता बनर्जी ने असम और त्रिपुरा जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में पार्टी का आधार मजबूत करने की कमान सौंपी थी।
- राष्ट्रीय पहचान को झटका: सुष्मिता देव न सिर्फ राज्यसभा सांसद थीं, बल्कि वह दिल्ली के राजनीतिक हलकों में टीएमसी की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर सबसे सक्रिय और मुखर चेहरा मानी जाती थीं।
- इस्तीफे का सस्पेंस: हालांकि, सुष्मिता देव ने अभी तक अपने इस्तीफे के पीछे की असली वजहों का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि वह पार्टी के भीतर चल रहे अंदरूनी असंतोष और फैसले लेने की प्रक्रिया से नाराज थीं।
टीएमसी संकट: एक नजर में मुख्य आंकड़े
| मुख्य विवरण | राजनीतिक अपडेट (2026) |
| इस्तीफा देने वाली नेता | सुष्मिता देव (राज्यसभा सांसद, TMC) |
| राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र | असम, पूर्वोत्तर और राष्ट्रीय स्तर (दिल्ली) |
| टीएमसी संकट का पैमाना | 20 लोकसभा सांसद और 2/3 विधायक पहले ही बागी |
| इस्तीफे का संभावित कारण | पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह और नेतृत्व से नाराजगी |
क्या खंड-खंड हो रही है तृणमूल कांग्रेस?
असम से आने वाली सुष्मिता देव का इस्तीफा टीएमसी के ताबूत में आखिरी कील साबित हो सकता है, क्योंकि पार्टी पहले से ही अभूतपूर्व बिखराव के दौर से गुजर रही है:
- विधायकों की बगावत: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी के दो-तिहाई (2/3) से अधिक विधायकों ने पहले ही अलग गुट बनाने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंप रखा है।
- 20 सांसदों की अलग राह: अभी दो दिन पहले ही नई दिल्ली में टीएमसी के 20 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को पत्र लिखकर सदन में अलग बैठने और नया गुट बनाने की अनुमति मांगी थी।
- अभिषेक बनर्जी पर शिकंजा: फर्जी सिग्नेचर मामले में सीआईडी (CID) और अन्य जांच एजेंसियों का शिकंजा कसने के बाद से टीएमसी का शीर्ष नेतृत्व बैकफुट पर है।
सुष्मिता देव के इस कदम के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि वह वापस कांग्रेस का दामन थाम सकती हैं या किसी अन्य राष्ट्रीय दल में शामिल हो सकती हैं। बहरहाल, उनका जाना इस बात का साफ संकेत है कि ममता बनर्जी का किला अब पूरी तरह दरक चुका है और दिल्ली से लेकर कोलकाता तक टीएमसी गंभीर अस्तित्व के संकट से गुजर रही है।