भारत के सियासी इतिहास में 26 मई 2014 की तारीख सिर्फ एक सरकार बदलने का दिन नहीं थी, बल्कि यह उस टाइमलाइन की शुरुआत थी जिसने आज भारतीय लोकतंत्र की पूरी बिसात बदल दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में लगातार सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं।
उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के लगातार निर्वाचित 12 साल के कार्यकाल उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है, जिसे कभी ‘अभेद्य’ माना जाता था। 2014, 2019 और फिर 2024 की हैट्रिक ने नरेंद्र मोदी को उस मुकाम पर ला खड़ा किया है, जहाँ वह आधुनिक भारत की राजनीतिक दिशा तय करने वाले सबसे बड़े ध्रुव बन चुके हैं।
प्रधानमंत्री के रूप में 4,399 दिनों से ज्यादा का यह सफर सिर्फ कैलेंडर की तारीखें बदलना नहीं है। इस दौरान भारत ने कई बड़े बदलाव देखे हैं:
कल्याणकारी योजनाओं का स्केल: जनधन, उज्ज्वला, और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं ने देश के सबसे निचले तबके तक सीधे मदद पहुंचाई।
डिजिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति: यूपीआई (UPI) से लेकर देश के कोने-कोने में बिछते एक्सप्रेसवे और वंदे भारत जैसी ट्रेनों ने भारत की रफ्तार बदल दी।
मजबूत विदेश नीति: आज भारत रूस-यूक्रेन संकट हो या मध्य-पूर्व का तनाव, दोनों पक्षों से आँख में आँख डालकर बात करने की कूटनीतिक हैसियत रखता है।
इतिहास के पन्नों में दर्ज़
पंडित नेहरू ने आजादी के बाद बिखरे हुए भारत को एक सुदृढ़ लोकतांत्रिक ढांचा दिया था। वहीं, नरेंद्र मोदी ने उस ढांचे को वैश्विक मंच पर एक ‘महाशक्ति’ के रूप में स्थापित करने का काम किया है। 12 साल का यह अटूट कार्यकाल इस बात की गवाही है कि भारत की जनता ने स्थिरता, कड़े फैसलों और ‘असंभव को संभव’ करने वाली राजनीति पर अपनी मुहर लगाई है।