Sign In
  • My Bookmarks
Indian Press House
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Reading: आया राम, गया राम: कैसे बदलती है विधायकों-सांसदों की वफादारी? समझिए स्प्लिट और मर्जर का पूरा कानूनी खेल
Share
Indian Press HouseIndian Press House
Font ResizerAa
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
Search
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.
Indian Press House > Blog > Trending News > आया राम, गया राम: कैसे बदलती है विधायकों-सांसदों की वफादारी? समझिए स्प्लिट और मर्जर का पूरा कानूनी खेल
Trending Newsफीचर

आया राम, गया राम: कैसे बदलती है विधायकों-सांसदों की वफादारी? समझिए स्प्लिट और मर्जर का पूरा कानूनी खेल

news desk
Last updated: June 10, 2026 10:27 am
news desk
Share
SHARE

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर एक बहुत बड़ा राजनीतिक और संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है। पार्टी के भीतर असंतोष इस कदर बढ़ चुका है कि टीएमसी अब दोफाड़ होने की कगार पर है।

Contents
1. क्या है एंटी-डिफेक्शन कानून (दलबदल विरोधी कानून)?2. ‘स्प्लिट’ (Split) बनाम ‘मर्जर’ (Merger): अब क्या हैं नियम?पार्टी में टूट के कानूनी नियम: एक नजर में3. विधानसभा और लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) की भूमिका क्यों है अहम?4. हाल के वर्षों में देश में हुई बड़ी राजनीतिक टूट (Case Studies)

पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के दो-तिहाई विधायकों ने एक अलग गुट बनाकर विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को पत्र सौंपा। इसके ठीक बाद, नई दिल्ली में टीएमसी के 20 लोकसभा सांसदों ने भी लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर सदन में एक अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग कर डाली है।

टीएमसी में मचे इस घमासान के बीच देश में पार्टी टूटने, विलय (Merger) होने और नए गुट को मान्यता मिलने के संवैधानिक नियमों को लेकर बहस छिड़ गई है। आइए विस्तार से समझते हैं कि क्या संविधान की 10वीं अनुसूची (Tenth Schedule) इन बागी सांसदों और विधायकों की सदस्यता बचा पाएगी या नहीं।

1. क्या है एंटी-डिफेक्शन कानून (दलबदल विरोधी कानून)?

भारत में राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने और ‘आया राम, गया राम’ की संस्कृति पर रोक लगाने के लिए साल 1985 में 52वें संविधान संशोधन के जरिए दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) को जोड़ा गया था।

  • सदस्यता कब जाती है: यदि कोई भी चुना हुआ सांसद या विधायक स्वेच्छा से अपनी मूल राजनीतिक पार्टी छोड़ता है, या सदन में पार्टी के व्हिप (निर्देश) के खिलाफ जाकर मतदान करता है, तो उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है।

2. ‘स्प्लिट’ (Split) बनाम ‘मर्जर’ (Merger): अब क्या हैं नियम?

अक्सर लोग सोचते हैं कि पार्टी के कुछ लोग अलग होकर नया गुट बना लें तो उनकी सदस्यता बच जाएगी, लेकिन कानूनी रूप से ऐसा नहीं है।

  • 1985 का पुराना नियम (स्प्लिट मान्य था): शुरुआती कानून के तहत, यदि किसी पार्टी के एक-तिहाई (1/3) सदस्य अलग होकर नया दल या गुट बनाते थे, तो उसे ‘वैध विभाजन’ (Split) माना जाता था और उनकी सदस्यता सुरक्षित रहती थी।
  • 2003 का नया नियम (स्प्लिट खत्म): साल 2003 में 91वें संविधान संशोधन के जरिए ‘स्प्लिट’ की व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया। अब कोई भी गुट यह कहकर नहीं बच सकता कि पार्टी टूट गई है।
  • मर्जर (विलय) ही एकमात्र रास्ता: वर्तमान कानून के अनुसार, दलबदल के तहत अयोग्यता से बचने का एकमात्र तरीका ‘मर्जर’ है। इसके लिए किसी भी विधायी दल (Legislative Party) के कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्यों का समर्थन अनिवार्य है। यदि दो-तिहाई सदस्य किसी अन्य दल में विलय करते हैं या मिलकर नया गुट बनाते हैं, तभी उनकी सदस्यता बच सकती है

पार्टी में टूट के कानूनी नियम: एक नजर में

स्थिति (Scenario)पुराना नियम (1985)वर्तमान नियम (2003 से अब तक)सदस्यता की स्थिति
स्प्लिट (Split)1/3 संख्या होने पर वैधअमान्य (पूरी तरह खत्म)सदस्यता रद्द हो जाएगी
मर्जर (Merger)1/3 संख्या पर मान्य2/3 संख्या अनिवार्यसदस्यता सुरक्षित रहेगी
स्वतंत्र गुट बनानासंख्या बल के आधार पर राहतबिना 2/3 के अमान्यस्पीकर के निर्णय पर निर्भ

3. विधानसभा और लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) की भूमिका क्यों है अहम?

दलबदल से जुड़े किसी भी मामले में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार सदन के अध्यक्ष (लोकसभा अध्यक्ष या विधानसभा अध्यक्ष) के पास होता है।

अध्यक्ष मुख्य रूप से इन तथ्यों की जांच करते हैं:

  1. बागी गुट के पास सदन में पार्टी के कुल सदस्यों की दो-तिहाई (2/3) संख्या है या नहीं?
  2. क्या सदस्यों ने स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ी है या वे केवल सदन में अलग बैठने की मांग कर रहे हैं?
  3. क्या उनके खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों के तहत अयोग्यता याचिका दाखिल की गई है?

क्या कोर्ट बदल सकता है स्पीकर का फैसला? पहले स्पीकर के फैसले को अंतिम माना जाता था, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसलों (किहोतो होलोहन केस) के बाद अब स्पीकर का निर्णय भी न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे में आता है। यदि किसी पक्ष को लगता है कि स्पीकर का फैसला राजनीति से प्रेरित है, तो वह हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।

4. हाल के वर्षों में देश में हुई बड़ी राजनीतिक टूट (Case Studies)

भारतीय राजनीति में संख्या बल के दम पर सत्ता और गुट बदलने के कई बड़े उदाहरण सामने आए हैं:

  • मध्य प्रदेश (2020): ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में कांग्रेस के 22 विधायकों ने इस्तीफा दिया, जिससे कमलनाथ सरकार गिर गई। चूंकि उन्होंने इस्तीफा दिया था, इसलिए बाद में उन्हें उपचुनाव लड़ना पड़ा।
  • महाराष्ट्र (2022-2023): पहले एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के दो-तिहाई से अधिक विधायक अलग हुए, जिससे उद्धव सरकार गिरी। इसके बाद अजित पवार के नेतृत्व में एनसीपी (NCP) के दो-तिहाई विधायकों ने अलग राह चुनी। इन दोनों मामलों में ‘दो-तिहाई संख्या बल’ के कारण बागियों की सदस्यता बची रही और चुनाव आयोग ने उन्हें ही असली पार्टी माना।
  • आम आदमी पार्टी (AAP): हाल ही में राज्यसभा में राघव चड्ढा के नेतृत्व में दो-तिहाई सदस्यों द्वारा दल छोड़ने की घोषणा के बाद अयोग्यता को लेकर बड़ी बहस छिड़ी थी, हालांकि संख्या बल मजबूत होने के कारण सदस्यों की सदस्यता बरकरार रही।

टीएमसी के बागी सांसदों और विधायकों का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वे लोकसभा और विधानसभा में अपनी ‘दो-तिहाई’ की कानूनी संख्या को दस्तावेजों में साबित कर पाते हैं या नहीं। यदि संख्या बल में जरा भी चूक हुई, तो एंटी-डिफेक्शन कानून के तहत उनकी सदस्यता जानी तय है।

Subscribe to Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

TAGGED: Anti Defection Law Rules, Lok Sabha Speaker Power, Maharashtra Shiv Sena NCP Case, Political Explainer Hindi., Tenth Schedule Indian Constitution, TMC MP and MLA Split
Share This Article
Twitter Email Copy Link Print
Previous Article Women’s T20 WC 2026: महामुकाबले से पहले पाकिस्तान के छूटे पसीने, स्कॉटलैंड ने वॉर्म-अप मैच में रौंदा; क्या भारत के खिलाफ खत्म होगी 10 साल की तड़प?
Next Article लॉर्ड्स टेस्ट में जीत के बाद नाइटक्लब विवाद में फंसे बेन स्टोक्स, कप्तानी पर संकट के बीच ECB ने शुरू की बड़ी जांच

फीचर

View More

अगस्त में ट्रेकिंग का बना रहे हैं प्लान? बारिश के बीच इन 6 खूबसूरत ट्रेक्स पर पहुंचेंगे, तो जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे ये नजारे

नई दिल्ली: मानसून का मौसम पहाड़ों, घाटियों और जंगलों की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देता है। चारों ओर फैली…

By vineet verma 4 Min Read

Friendship Day 2026: दोस्तों के साथ यादगार बनाएं वीकेंड, दिल्ली से 500 किमी के भीतर मौजूद इन खूबसूरत डेस्टिनेशन पर करें ट्रिप

नई दिल्ली: फ्रेंडशिप डे 2026 को खास बनाने के लिए अगर आप…

4 Min Read

शिमला-मनाली से हो गए बोर? हिमाचल का ये छुपा हुआ स्वर्ग बना सकता है आपकी ट्रिप यादगार, दोस्तों संग जरूर करें एक्सप्लोर

नई दिल्ली: अगर इस बार छुट्टियों में शिमला और मनाली जैसी भीड़भाड़…

3 Min Read

विचार

View More

क्या कभी सोचा है कि आखिर कैसे दक्षिण से उत्तर तक पूरे देश में छा जाते हैं बादल और शुरू हो जाती है झमाझम बारिश?

नई दिल्ली: देश में मानसून की दस्तक हो चुकी है।…

July 9, 2026

‘एक भी अमेरिकी सैनिक जिंदा नहीं लौटेगा’… आखिर ईरान ने अमेरिका को क्यों दी खुली चेतावनी? जानिए कैसे बढ़ा नया सैन्य तनाव

तेहरान: पश्चिम एशिया में अमेरिका और…

July 9, 2026

अमीर पति बनेगा सहारा या मुसीबत? डेटिंग ऐप CEO की सलाह से छिड़ी बहस, महिलाओं से कहा- ‘कमाई का अंतर ज्यादा हो तो सोचिए’

नई दिल्ली: शादी और रिश्तों को…

June 9, 2026

मानसून की दस्तक में फिर देरी, आखिर कब पहुंचेगा केरल? जानिए क्यों बार-बार बदल रही है IMD की तारीख

नई दिल्ली: देश के कई राज्यों…

June 4, 2026

रिंकू का ओवर और राइवलरी का बदलता अर्थ: क्या भारत–पाक मुकाबले से गायब हो गई वो अनिश्चितता?

रिंकू का ओवर और राइवलरी का…

February 16, 2026

You Might Also Like

Trending Newsसियासी

Parliament Monsoon Session: “अगर गृह मंत्री इस्तीफा नहीं दे सकते तो…” जंतर-मंतर बवाल पर संसद में भड़के खरगे!

Highlights: नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के 9वें दिन सदन के अंदर से लेकर बाहर तक ज़बरदस्त राजनीतिक घमासान…

3 Min Read
EntertainmentTrending News

बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप, लेकिन OTT पर सुपरहिट हुई ‘नागबंधम’! 100 करोड़ की पौराणिक थ्रिलर बनी Prime Video की नंबर-1

सिनेमाघर का क्राउड और ओटीटी के व्यूअर्स, दोनों का टेस्ट कितना जुदा हो सकता है,इसका अंदाजा फिल्म 'नागबंधम' से लगा…

3 Min Read
Trending News

Parliament Monsoon Session: “आपने ही दीदी को जाने पर मजबूर किया…” संसद परिसर में प्रियंका गांधी और कल्याण बनर्जी की ‘चाय पर चर्चा’, जमकर चले सियासी तीर

Highlights नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र हंगामेदार बयानों और तीखे विरोध-प्रदर्शनों के लिए जाना जाता है। लेकिन इसी गहमागहमी…

4 Min Read
Trending Newsखेल

FIH हॉकी विश्व कप 2026:  भारतीय टीम की नई केसरिया जर्सी पर छिड़ी बहस, पूर्व कप्तान वीरेन रसकीन्हा ने जताई आपत्ति

अगस्त 2026 में नेदरलैंड्स और बेल्जियम की संयुक्त मेजबानी में होने वाले FIH हॉकी पुरुष एवं महिला विश्व कप के…

4 Min Read
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य

© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?