भीषण गर्मी से जूझ रहे देश के लिए राहत की बड़ी खबर है। अगले 24 घंटों के भीतर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून केरल के तट से टकराने वाला है, जिससे देश में झमाझम बारिश के दौर की शुरुआत हो जाएगी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मॉनसून केरल के साथ-साथ तमिलनाडु के कुछ हिस्सों, लक्षद्वीप और बंगाल की खाड़ी के बाकी बचे इलाकों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हो चुकी हैं।
हालांकि, इस अच्छी खबर के साथ मौसम विभाग ने एक चिंताजनक अनुमान भी जताया है। इस साल देश में औसत से कम बारिश होने की आशंका है।
4 जून को केरल में दस्तक; जानें मुंबई और दिल्ली कब पहुंचेगा मॉनसून?
आमतौर पर मॉनसून 1 जून को केरल पहुंचता है, लेकिन इस बार यह कुछ दिनों की देरी से यानी 4 जून को केरल के रास्ते भारत में एंट्री ले रहा है।
आईएमडी (IMD) मुंबई के डायरेक्टर बिक्रम सिंह ने मॉनसून की रफ्तार को लेकर स्थिति स्पष्ट की है:
- केरल और कर्नाटक: तटीय इलाकों में लगातार बारिश का दौर शुरू हो चुका है।
- महाराष्ट्र (कोंकण और गोवा): अगले 3 से 4 दिनों में गरज-चमक के साथ बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी।
- मुंबई: यदि मॉनसून की गति सामान्य रही, तो इसे मुंबई पहुंचने में करीब 10 दिन का समय लग सकता है।
- आगे का सफर: महाराष्ट्र के बाद मॉनसून धीरे-धीरे राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर की तरफ आगे बढ़ेगा।
इस साल सिर्फ 90% बारिश का अनुमान, क्यों मंडरा रहा है सूखा संकट?
मौसम विभाग (IMD) ने अपने संशोधित पूर्वानुमान में साफ किया है कि इस साल देश में मानसूनी बारिश सामान्य से कम रहने वाली है।
दीर्घकालिक औसत (LPA) का सिर्फ 90%: भारत में इस साल लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) की महज 90 फीसदी बारिश होने की संभावना है। देश में मौसमी बारिश का औसत एलपीए 87 सेंटीमीटर (1971 से 2020 के आंकड़ों पर आधारित) माना जाता है। आईएमडी के नियमों के मुताबिक, यदि बारिश एलपीए के 90% से कम रह जाती है, तो इसे ‘अपर्याप्त’ या सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में रखा जाता है।
क्या है कम बारिश की असली वजह? ‘अल-नीनो’ का दिख रहा है असर
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल कम बारिश होने का सबसे बड़ा कारण अल-नीनो (El Nino) की स्थिति का उभरना है।
वर्तमान समय में भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में न्यूट्रल अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) की परिस्थितियां तेजी से अल-नीनो में बदल रही हैं। इतिहास गवाह है कि जब भी अल-नीनो सक्रिय होता है, तब भारतीय उपमहाद्वीप में मॉनसून कमजोर पड़ता है और देश के कई हिस्सों में कम पानी बरसता है। इससे आने वाले दिनों में कृषि और जल संकट की चुनौतियां बढ़ सकती हैं।