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Indian Press House > Blog > Trending News > ममता बनर्जी के किले में सेंध? 2026 से पहले कांग्रेस लौटीं मौसम नूर, मालदा में बदल सकते हैं सियासी समीकरण ?
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ममता बनर्जी के किले में सेंध? 2026 से पहले कांग्रेस लौटीं मौसम नूर, मालदा में बदल सकते हैं सियासी समीकरण ?

news desk
Last updated: January 3, 2026 6:47 pm
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मौसम नूर कांग्रेस वापसी 2026
मौसम नूर कांग्रेस वापसी 2026
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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्यसभा सांसद मौसम बेनजीर नूर ने शनिवार को कांग्रेस में वापसी कर ली है। यह कदम पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनावों से ठीक पहले उठाया गया है, जो टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। मौसम नूर, जो मालदा जिले के प्रमुख राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखती हैं, ने दिल्ली में कांग्रेस नेता जयराम रमेश और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में पार्टी जॉइन की। उनकी राज्यसभा सदस्यता अप्रैल में समाप्त हो रही है, और माना जा रहा है कि वे मालदा से विधानसभा चुनाव लड़ सकती हैं।

Contents
कांग्रेस का क्या कहा?सियासी समीकरण में कितना बदलाव?

मौसम नूर ने जॉइनिंग के बाद कहा, “मालदा के लोग कांग्रेस में विश्वास रखते हैं। मैं घर वापसी कर रही हूं, जहां से मेरी राजनीतिक यात्रा शुरू हुई थी।” वे पूर्व कांग्रेस सांसद और रेल मंत्री घनी खान चौधरी की भतीजी हैं, और मालदा कांग्रेस का गढ़ रहा है। 2019 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर टीएमसी जॉइन की थी, जिससे कांग्रेस को बड़ा नुकसान हुआ था। अब यह यू-टर्न टीएमसी के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है।

कांग्रेस का क्या कहा?

कांग्रेस ने मौसम नूर की वापसी का जोरदार स्वागत किया है। जॉइनिंग सेरेमनी में मौजूद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “गनी खान चौधरी जी कांग्रेस के मजबूत स्तंभ थे और इंदिरा गांधी जी उन्हें विशेष सम्मान देती थीं। कोयला मंत्री रहते हुए उन्होंने सराहनीय कार्य किया। दो बार की सांसद और पूर्व यूथ कांग्रेस अध्यक्ष मौसम नूर जी की घर वापसी खुशी की बात है। पश्चिम बंगाल की जनता कांग्रेस को मजबूत देखना चाहती है और हम उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए संघर्ष करते रहेंगे।”

वहीं, कांग्रेस के पश्चिम बंगाल प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने कहा, “हमारे दरवाजे हमेशा खुले हैं। तृणमूल कांग्रेस कांग्रेस से ही निकली है। अगले दो महीनों में आप और भी बड़े मेहमानों को देखेंगे।” पश्चिम बंगाल कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शुभंकर सरकार भी मौजूद थे, और पार्टी के माइनॉरिटी विभाग ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा, “मौसम नूर का कांग्रेस में स्वागत है।” कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यह कदम उत्तर बंगाल में पार्टी को मजबूत करेगा।

जयराम रमेश ने आगे कहा, “गनी खान चौधरी जी कांग्रेस पार्टी के महास्तंभ थे। इंदिरा गांधी जी उनका बहुत सम्मान करती थीं। गनी खान चौधरी जी ने कभी कोयला मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली थी। उन्होंने अपने कार्यकाल में जैसा काम किया, वह काफी सराहनीय है। मुझे खुशी है कि दो बार की सांसद और यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी मौसम नूर जी की घर वापसी हुई है। पश्चिम बंगाल की जनता चाहती है कि कांग्रेस और मजबूत हो। हम उनकी उम्मीदों को पूरा करने के लिए लड़ते रहेंगे।”

पश्चिम बंगाल कांग्रेस प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने कहा, “कांग्रेस पार्टी और पश्चिम बंगाल की जनता के लिए यह खुशी का मौका है कि मौसम नूर जी पार्टी में शामिल हो रही हैं। मौसम जी मालदा साऊथ से दो बार लोकसभा सांसद रह चुकी हैं और यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष भी थीं। वह TMC से राज्य सभा सांसद भी रहीं। हम काफी दिनों से मौसम नूर जी के संपर्क में थे और हम सभी उनका पार्टी में स्वागत करते हैं। कांग्रेस पार्टी पश्चिम बंगाल में पूरी ताकत के साथ काम कर रही है। मुझे पूरा भरोसा है कि मौसम नूर जी के आने से पार्टी को मजबूती मिलेगी।”

ईशा खान चौधरी ने कहा, “मेरा पूरा परिवार महात्मा गांधी जी के आदर्शों पर चलता रहा है, इसलिए आज बहुत ही खुशी का मौका है कि मौसम नूर जी कांग्रेस परिवार में शामिल हो रही हैं। मैं स्वयं कांग्रेस पार्टी से सांसद हूं और हमने फैसला लिया कि हम सभी को मिलकर कांग्रेस के लिए काम करना चाहिए। आज मुझे बहुत खुशी है और ऐसे मौके पर मैं कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व और सभी नेताओं का दिल से धन्यवाद करता हूं।”

सियासी समीकरण में कितना बदलाव?

मौसम नूर की वापसी से पश्चिम बंगाल की राजनीति में उथल-पुथल मच सकती है, खासकर उत्तर बंगाल में। मालदा जिला, जहां मुस्लिम मतदाता बहुल हैं, कांग्रेस का पारंपरिक गढ़ है। 2019 में उनके टीएमसी जॉइन करने से कांग्रेस कमजोर हुई थी, और अब टीएमसी को नुकसान हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे टीएमसी की पकड़ ढीली पड़ सकती है, क्योंकि मालदा उत्तर और दक्षिण सीटों पर नूर परिवार का प्रभाव है।

  • टीएमसी पर असर: ममता बनर्जी की पार्टी पहले से ही आंतरिक कलह और भाजपा के दबाव का सामना कर रही है। मौसम नूर जैसी प्रमुख नेता की विदाई से और ज्यादा डिफेक्शन हो सकते हैं। टीएमसी ने इसे ‘व्यक्तिगत फैसला’ बताया, लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह मालदा में वोटबैंक को प्रभावित करेगा। टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा, “यह कोई बड़ा झटका नहीं है, हमारी पार्टी मजबूत है।”
  • कांग्रेस की मजबूती: बंगाल में कमजोर कांग्रेस को यह बड़ा बूस्ट है। गुलाम अहमद मीर ने कहा कि इससे उत्तर बंगाल में पार्टी मजबूत होगी। कांग्रेस-वाम गठबंधन को फायदा मिल सकता है, और मालदा जैसी सीटों पर टीएमसी-भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला हो सकता है।
  • चुनावी गणित: 2026 विधानसभा चुनावों में मालदा की 12 सीटें महत्वपूर्ण हैं। नूर के प्रभाव से कांग्रेस यहां 2-3 सीटें जीत सकती है, जो पहले टीएमसी के पास थीं। कुल मिलाकर, यह टीएमसी की सीटों में 5-10% कमी ला सकता है, जबकि कांग्रेस को 10-15 सीटों का फायदा हो सकता है। हालांकि, भाजपा को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है, अगर वोट बंटते हैं। भाजपा ने इसे ‘टीएमसी की विफलता’ बताया।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह घटना बंगाल की सियासत में नए गठबंधनों को जन्म दे सकती है। स्थिति पर सभी पार्टियों की नजर है, और चुनावी रणनीतियां बदल सकती हैं।

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