नई दिल्ली: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में को-पायलट द्वारा कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला करने और विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कथित कोशिश के बाद विमानन सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस व्यक्ति ने उड़ान के दौरान ऐसा कदम उठाया, उसे विमान उड़ाने की मंजूरी कैसे मिली और पायलटों की फिटनेस जांच में किन मानकों को देखा जाता है।
फ्लाईदुबई संयुक्त अरब अमीरात की एयरलाइन है और उसके प्रमाणन तथा परिचालन की निगरानी यूएई की जनरल सिविल एविएशन अथॉरिटी यानी जीसीएए के तहत होती है। यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी ने रॉयटर्स को बताया कि फ्लाईदुबई की सुरक्षा और प्रमाणन की देखरेख जीसीएए की जिम्मेदारी है। इसमें यह सुनिश्चित करना भी शामिल है कि एयरलाइन के फ्लाइट क्रू जरूरी योग्यता और उड़ान के लिए फिटनेस संबंधी शर्तें पूरी करते हों।
पायलट बनने के लिए किन शर्तों को पूरा करना जरूरी
जीसीएए के नियामकीय ढांचे के तहत पायलट के पास वैध पेशेवर पायलट लाइसेंस, संबंधित विमान के लिए वैध टाइप रेटिंग और मौजूदा क्लास-1 मेडिकल सर्टिफिकेट होना जरूरी है। इसके अलावा अंग्रेजी भाषा का पर्याप्त ज्ञान और आवश्यक उड़ान अनुभव भी अनिवार्य शर्तों में शामिल है।
क्लास-1 मेडिकल जांच में पायलट के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का आकलन किया जाता है। अगर किसी पायलट के मानसिक स्वास्थ्य, नशीले पदार्थों के गलत इस्तेमाल या किसी अन्य विशेष चिंता से जुड़े संकेत मिलते हैं तो उसे फिट घोषित करने से पहले अतिरिक्त जांच के लिए भेजा जा सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य जांच को लेकर क्या सवाल उठे
लंदन की एविएशन कंसल्टेंसी स्ट्रेटेजिकएरो रिसर्च के मुख्य विश्लेषक साज अहमद ने कहा कि पायलटों की जांच में सुरक्षा और वित्तीय पृष्ठभूमि से लेकर मानसिक स्वास्थ्य के आकलन तक कई पहलू शामिल होते हैं।
अल जजीरा से बातचीत में अहमद ने यह भी कहा कि ऐसी जांच किसी व्यक्ति की एक खास समय की स्थिति का आकलन करती है। इससे भविष्य में उसकी मानसिक स्थिति या संभावित व्यवहार के बारे में पूरी तरह पता लगाना संभव नहीं होता।
फ्लाइट में हुई घटना के बाद इसी पहलू को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि को-पायलट को लेकर किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या या जांच में चूक की पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।
इजरायल में आने वाले पायलटों की सुरक्षा जांच बढ़ाने की बात
इजरायली मीडिया ने परिवहन मंत्री मिरी रेगेव के हवाले से दावा किया है कि यूएई के साथ हुए एक समझौते के तहत इजरायल में केवल उन देशों के पासपोर्ट वाले पायलट उतर सकते हैं, जिनके इजरायल के साथ कूटनीतिक संबंध हैं। हालांकि अल जजीरा इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका।
घटना के बाद इजरायल ने देश में आने वाले पायलटों की सुरक्षा जांच और बढ़ाने की बात कही है। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता डोरोन स्पीलमैन के मुताबिक, इजरायल के लिए उड़ान भरने वाले हर पायलट की पहचान और उसके बारे में जानकारी उपलब्ध होगी तथा किसी न किसी स्तर पर सुरक्षा जांच भी की जाएगी।
फ्लाईदुबई FZ1073 में आखिर क्या हुआ था
स्थानीय समय के मुताबिक करीब 8:44 बजे, दुबई से उड़ान भरने के लगभग ढाई घंटे बाद विमान से आपात संदेश भेजा गया। इजरायली अधिकारियों के अनुसार, कॉकपिट में दोनों पायलटों के बीच विवाद हुआ और विमान तेजी से नीचे आने लगा। बताया गया कि विमान एक मिनट से भी कम समय में करीब 34,000 फीट से 17,000 फीट की ऊंचाई तक आ गया।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बताया कि एक पायलट ने दूसरे पर चाकू से हमला किया और इसके बाद विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश की। इजरायली मीडिया के मुताबिक, घायल कैप्टन स्मित मच्छार किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे। इसके बाद यात्री और क्रू सदस्य अंदर पहुंचे और कथित हमलावर को काबू में किया गया।
इसके बाद क्रू ने विमान पर नियंत्रण हासिल किया और करीब एक घंटे बाद इसे सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित उतारा गया। घटना में दोनों पायलट घायल हुए और उनका सऊदी अरब में इलाज किया गया।
मच्छार की बहादुरी की दुनियाभर में हुई तारीफ
घटना के बाद इजरायल और भारत के प्रधानमंत्रियों ने कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की सराहना की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उनकी तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने विमान में सवार 174 यात्रियों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।
इस घटना के बाद अब पायलटों की भर्ती, मेडिकल फिटनेस और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि घटना की पूरी परिस्थितियां और को-पायलट को लेकर सामने आए सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।