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तीन साल में 1.2 करोड़ लोग बेघर और 25 लाख मौतों पर फलते फूलते हथियार उद्योग ने पार किया 679 बिलियन डालर का कारोबार

news desk
Last updated: December 1, 2025 3:42 pm
news desk
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युद्ध, मौतें और हथियार उद्योग का बढ़ता कारोबार
युद्ध, मौतें और हथियार उद्योग का बढ़ता कारोबार
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कल्पना कीजिए एक ऐसी दुनिया की, जहां हर दिन औसतन 2,300 लोग युद्ध की भेंट चढ़ रहे हों. जहां हर घंटे 96 परिवार बिखर रहे हों. जहां हर मिनट किसी बच्चे का बचपन छिन रहा हो. यह कोई डिस्टोपियन फिल्म का दृश्य नहीं—यह 2023 से 2025 तक की हमारी दुनिया की हकीकत है.

Contents
 संघर्षों का ‘डेथ मैप’ और बर्बादी की सच्चाईयुद्ध बाद फैली भुखमरी और बीमारी2024 बना ‘हथियार कंपनियों का गोल्डन ईयर

ACLED, UCDP, UN और WHO की ताजा रिपोर्टें एक ऐसी तस्वीर पेश करती हैं जो रूह कंपा देती है. 15 से 25 लाख लोग तीन सालों में युद्ध की वजह से मारे गए. लेकिन यहां सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से ज्यादातर लोग गोलियों से नहीं मरे—वे भूख, बीमारी और टूटे हुए अस्पतालों की वजह से मरे.

और जब यह सब हो रहा था, तब हजारों किलोमीटर दूर बैठी हथियार कंपनियां रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा कमा रही थीं.

 

संघर्षों का ‘डेथ मैप’ और बर्बादी की सच्चाई

रूस-यूक्रेन युद्ध 2023–2025 में भी दुनिया का सबसे बड़ा मौतों का केंद्र बना रहा, जहां 2–2.5 लाख लोग सीधे मारे गए, जबकि ठंड, महामारी, भूख और स्वास्थ्य ढांचे के नष्ट होने से 1–2 लाख अतिरिक्त मौतों का अनुमान है—कुल 3–4.5 लाख.

इज़रायल–गाज़ा युद्ध ने हालात को और भयावह कर दिया. यहाँ 60–80 हज़ार प्रत्यक्ष मौतें हुईं, लेकिन भूख की आपदा, अस्पतालों का गिरना और महामारी फैलने से 2.4–3.2 लाख अप्रत्यक्ष मौतें, यानी कुल 3–4 लाख. UN के अनुसार, गाज़ा में 90% मरने वाले आम नागरिक थे—जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे.

सूडान के गृहयुद्ध में 40–50 हज़ार लोग लड़ाई में मरे, जबकि विस्थापन और बीमारियों के चलते 1–1.5 लाख और मारे गए, कुल नुकसान 1.4–2 लाख के बीच. म्यांमार में सैन्य शासन की हिंसा में 20–30 हज़ार प्रत्यक्ष मौतें, लेकिन भोजन, दवा और स्वास्थ्य ढांचे के गिरने से 70 हज़ार–1.3 लाख कुल मौतें हुईं. इथियोपिया में टिग्रे संघर्ष के बाद भी हालात नहीं सुधरे—यहाँ 2.6–4.7 लाख मौतों का अनुमान है.

सीरिया, सोमालिया, बुर्किना फासो और पूरे साहेल क्षेत्र के संघर्षों में भी 3–6 लाख मौतें मानी जा रही हैं. कुल मिलाकर यह अवधि आधुनिक इतिहास की सबसे हिंसक समयरेखा बन चुकी है.

युद्ध बाद फैली भुखमरी और बीमारी

युद्ध के मैदान की मौतें सिर्फ़ वहीं खत्म नहीं होतीं, वे आने वाली पीढ़ियों तक अपना असर छोड़ जाती हैं. हर दिन दुनिया के किसी न किसी संघर्ष क्षेत्र में एक नई त्रासदी जन्म लेती है, और आंकड़े बताते हैं कि यह कहानी कितनी भयावह है. ACLED के अनुसार 2023 में 1.79 लाख लोग सीधे युद्ध की हिंसा में मारे गए. 2024 में यह संख्या बढ़कर 2.33 लाख हो गई. 2025 में—सिर्फ जनवरी से नवंबर तक—2 से 2.5 लाख प्रत्यक्ष मौतें दर्ज की गईं. यानी तीन वर्षों में कुल 6.5 से 7 लाख लोग सिर्फ़ गोलियों, मिसाइलों और बमों की वजह से अपनी जान गंवा बैठे. लेकिन यह सिर्फ़ आधी कहानी है.

असल तस्वीर युद्ध के पीछे छिपे उन जख्मों की है, जो दिखाई नहीं देते—जो गोलियों से नहीं, बल्कि टूटती प्रणालियों से बनते हैं. WHO और UNICEF बताते हैं कि इन संघर्ष क्षेत्रों में 60 से 80 प्रतिशत अस्पताल या तो नष्ट हो चुके हैं या सेवाहीन हो चुके हैं. टीकाकरण के कार्यक्रम, जो किसी भी समाज की बुनियादी सुरक्षा होते हैं, वहां 50 से 90 प्रतिशत तक ढह गए हैं. लाखों बच्चे जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं. करीब 76 लाख बच्चे गंभीर कुपोषण की कगार पर हैं. 1.2 करोड़ से ज़्यादा लोग अपने घरों से उखड़ चुके हैं, कहीं भागते, कहीं छिपते, कहीं बस ज़िंदा रहने की कोशिश करते हुए.

जब दवाइयाँ नहीं होतीं, टीके नहीं मिलते, साफ पानी नहीं होता, जब गर्भवती महिलाएं अस्पताल नहीं पहुंच पातीं, जब बच्चे बुखार में तड़पते रहते हैं क्योंकि डॉक्टर ही नहीं बचा—तब ये मौतें बिना किसी धमाके के लाखों जिंदगियां लील जाती हैं. एक अनुमान के अनुसार प्रत्यक्ष मौतों से 3 से 4 गुना अधिक लोग इस तरह मारे जाते हैं. सिर्फ इसी अवधि में 8 से 18 लाख अप्रत्यक्ष मौतों का अनुमान है, यानी कुल मिलाकर 15 से 25 लाख लोग युद्ध की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं.

2024 बना ‘हथियार कंपनियों का गोल्डन ईयर

जब दुनिया जल रही थी, तब हथियार कंपनियों के मुनाफे इतिहास के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँचे. SIPRI के अनुसार:

  • 2024 में हथियार कारोबार: 679 बिलियन डॉलर
  • 2023 की तुलना में वृद्धि: 5.9%

अमेरिकी दिग्गज लॉकहीड मार्टिन, नॉर्थ्रॉप ग्रुमैन, बोइंग, जनरल डायनामिक्स

इन कंपनियों ने अकेले 334 बिलियन डॉलर कमाए. मस्क की SpaceX पहली बार इस लिस्ट में शामिल हुई और उसने 1.8 बिलियन डॉलर मिलिट्री रेवेन्यू कमाया. यूरोप की 26 कंपनियाँ टॉप-100 में थीं; चेक रिपब्लिक की Czechoslovak Group की बिक्री यूक्रेन युद्ध की वजह से 193% उछली.

इज़रायल के हथियार उद्योग की भी बिक्री दोगुनी हुई लगभग 16.2 बिलियन डॉलर.
तुर्की, जापान और दक्षिण कोरिया 10–14 बिलियन डॉलर की रेंज में उभरते निर्यातक बने.

चित्र बेहद विडंबनापूर्ण है, एक तरफ 25 लाख लोग मर रहे हैं, और दूसरी तरफ हज़ारों मील दूर हथियार बनाने वाली कंपनियाँ रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं. दुनिया जलती है, तो हथियार उद्योग चमकता है.

2023–2025 के ये आंकड़े बताते हैं कि दुनिया युद्ध, बीमारियों, भूख और विस्थापन के एक ऐसे दौर में पहुँच चुकी है जो वैश्विक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है. प्रत्यक्ष मौतें जितनी भीषण हैं, अप्रत्यक्ष मौतें उससे कई गुना अधिक भयावह.

UN चेतावनी देता है कि अगर संघर्ष जारी रहे, तो 2026 के अंत तक अप्रत्यक्ष मौतें दोगुनी हो सकती हैं. ये आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं, बल्कि लाखों परिवारों का बिखरता जीवन, रोते बच्चे, भूखे शहर और तबाह होती सभ्यताएँ हैं. यह समय दुनिया को यह समझने का है कि एक गोलियों से लड़ा युद्ध खत्म हो सकता है—लेकिन भूख, बीमारी, गरीबी और विस्थापन का युद्ध पीढ़ियों तक चलता है.

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