नई दिल्ली: नवंबर महीने की शुरुआत के साथ ही आम लोगों की जेब और रोजमर्रा के वित्तीय कामकाज से जुड़े कई नियम बदल गए हैं। 1 नवंबर 2026 से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़ गई है, जबकि म्यूचुअल फंड निवेश, जीएसटी और बैंकिंग सेवाओं से जुड़े नए प्रावधान भी लागू हो गए हैं। इसके अलावा पेंशन पाने वालों को लाइफ सर्टिफिकेट जमा करना होगा और कुछ टैक्सपेयर्स को आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मिला है।
इन बदलावों का असर कारोबारियों, बैंक ग्राहकों, निवेशकों, पेंशनर्स और टैक्सपेयर्स पर पड़ सकता है। ऐसे में महीने की शुरुआत में इन सात बड़े बदलावों को समझना जरूरी है।
1. कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ महंगा
नवंबर की पहली तारीख से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने नई दरें लागू कर दी हैं। इसका सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पड़ सकता है, जहां कमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल होता है।
हालांकि, घरेलू रसोई गैस इस्तेमाल करने वाले परिवारों को फिलहाल राहत मिली है। 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
2. म्यूचुअल फंड में Direct Plan होगा डिफॉल्ट विकल्प
म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए भी 1 नवंबर से नया नियम लागू हो गया है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के निर्देश के मुताबिक, एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अब Direct Plan डिफॉल्ट विकल्प रहेगा।
अगर कोई निवेशक Regular Plan चुनना चाहता है, तो उसे पहले इस प्लान के अधिक एक्सपेंस रेश्यो यानी खर्च की जानकारी दी जाएगी। इससे निवेशक Direct और Regular Plan के बीच लागत का अंतर समझकर फैसला ले सकेंगे। इस बदलाव का मकसद निवेशकों को खर्च के बारे में ज्यादा पारदर्शिता देना है।
3. GST के नियमों में बदलाव, रिफंड की प्रक्रिया में भी नया प्रावधान
वस्तु एवं सेवा कर (GST) से जुड़े कुछ नियम भी 1 नवंबर से बदल गए हैं। नए प्रावधानों में बिक्री के बाद दी जाने वाली छूट, क्रेडिट नोट और जीएसटी रिफंड से जुड़े नियम शामिल हैं।
अब पोस्ट-सप्लाई डिस्काउंट को टैक्सेबल वैल्यू से घटाने के लिए उससे जुड़े इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को रिवर्स करना जरूरी होगा। इसके अलावा इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत रिफंड का दावा करने वाले कारोबारियों के लिए प्रोविजनल रिफंड की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य पात्र कारोबारियों को रिफंड मिलने तक होने वाली वित्तीय परेशानी कम करना और उनके नकदी प्रवाह को बेहतर बनाना है।
4. पेंशनर्स को 30 नवंबर तक जमा करना होगा लाइफ सर्टिफिकेट
सरकारी पेंशन पाने वाले 80 साल से कम उम्र के पेंशनर्स के लिए नवंबर का महीना अहम है। उन्हें 1 नवंबर से 30 नवंबर 2026 के बीच अपना सालाना जीवन प्रमाण पत्र यानी लाइफ सर्टिफिकेट जमा करना होगा। वहीं, 80 साल या उससे अधिक उम्र के पेंशनर्स के लिए यह प्रक्रिया 1 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है।
पेंशनर्स बैंक जाकर प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं। इसके अलावा जीवन प्रमाण पोर्टल और डिजिटल सुविधा के जरिए आधार आधारित प्रमाणीकरण या फेस ऑथेंटिकेशन की मदद से भी लाइफ सर्टिफिकेट जमा किया जा सकता है।
यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के सब्सक्राइबर्स के लिए भी डिजिटल सुविधा उपलब्ध कराई गई है। पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने UPS Jeevan Setu डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट की सुविधा शुरू की है। इसके लिए Protean eGov ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है।
5. कुछ टैक्सपेयर्स को ITR दाखिल करने के लिए मिली अतिरिक्त मोहलत
आयकर रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा से जुड़े नियम में भी राहत दी गई है। असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए कुछ ऑडिट वाले टैक्सपेयर्स की ITR दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी गई है।
इसका लाभ उन कारोबारियों, पेशेवरों और फर्मों को मिलेगा, जिनके खातों का ऑडिट जरूरी है और जिन्होंने 21 अक्टूबर 2026 तक अपनी टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल कर दी है। ऐसे करदाताओं को अब रिटर्न दाखिल करने के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा समय मिलेगा।
6. PNB क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करना पड़ सकता है महंगा
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने अपने Visa और RuPay क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले कई शुल्कों में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब PNB के एटीएम से क्रेडिट कार्ड के जरिए नकदी निकालने पर 2.5 फीसदी या 400 रुपये, जो भी अधिक होगा, शुल्क देना पड़ेगा। दूसरे घरेलू एटीएम से नकदी निकालने पर यह शुल्क 2.5 फीसदी या 500 रुपये, जो भी अधिक हो, रहेगा।
लेट पेमेंट फीस के स्लैब में भी बदलाव किया गया है। अब 500 रुपये तक के बकाया पर कोई लेट पेमेंट शुल्क नहीं लगेगा। वहीं, 50,000 रुपये से अधिक के बकाया पर अधिकतम 1,200 रुपये तक शुल्क देना पड़ सकता है।
इसके अलावा एक बिलिंग साइकिल में 50,000 रुपये से ज्यादा के यूटिलिटी बिल भुगतान पर 1 फीसदी शुल्क लगेगा। इसकी अधिकतम सीमा प्रति ट्रांजैक्शन 2,000 रुपये तय की गई है। चेक रिटर्न और ECS या ऑटो-डेबिट फेल होने पर लगने वाले शुल्क में भी बदलाव किया गया है।
7. IndusInd Bank के ग्राहकों पर भी बढ़ा शुल्क का बोझ
IndusInd Bank ने अपने कुछ सेविंग अकाउंट की सेवाओं के लिए नए शुल्क लागू किए हैं। इनमें Indus Delite, Indus Digi-start, Indus Online-Min Bal Required और Indie के Star, Superstar तथा Megastar अकाउंट शामिल हैं।
नए नियमों के तहत खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं होने की वजह से POS ट्रांजैक्शन फेल होने पर 25 रुपये का शुल्क देना होगा। बैंक के एटीएम से फेल होने वाले ट्रांजैक्शन पर भी 25 रुपये चार्ज लगेगा।
वहीं, वित्तीय कारणों के अलावा अन्य वजहों से चेक लौटने पर प्रति चेक 50 रुपये का शुल्क देना होगा। इन सभी शुल्कों पर लागू जीएसटी अलग से देना होगा। इससे पहले इन सेवाओं के लिए ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता था।
नवंबर की शुरुआत में हुए इन बदलावों का असर अलग-अलग वर्ग के लोगों पर पड़ेगा। इसलिए अगर आप बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं, म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं या सरकारी पेंशन लेते हैं, तो नए नियमों और संबंधित तारीखों की जानकारी रखना जरूरी है।