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नेपाल में 633 मौतें… चीन में सिर्फ 5! तिब्बत की तबाही पर उठे सवाल, आखिर क्या छिपा रहा है ड्रैगन?

काठमांडू: 26 अगस्त को हिमालयी सीमा क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद आई भीषण बाढ़ ने नेपाल और तिब्बत में भारी तबाही मचा दी है। इस आपदा में नेपाल में 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं। वहीं, चीन की ओर से तिब्बत में सिर्फ 5 लोगों की मौत की आधिकारिक जानकारी दी गई है। मृतकों के आंकड़ों में इतना बड़ा अंतर अब कई सवाल खड़े कर रहा है। तिब्बत में आपदा के वास्तविक नुकसान की जानकारी सामने नहीं आने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

नेपाल और चीन की सीमा से लगे इलाके इस बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सीमा के पास गिरोंग चौकी के आसपास हजारों लोग रहते हैं। ऐसे में इतनी बड़ी आपदा के बीच चीन की ओर से सिर्फ 5 मौतों का आंकड़ा सामने आने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। तिब्बत की तरफ हालात वास्तव में कितने खराब हैं, इसकी स्पष्ट तस्वीर अब तक सामने नहीं आई है।

तिब्बत में बाढ़ के वीडियो और तस्वीरें कहां गायब हो गईं?

नेपाल और तिब्बत की सीमा पर आई भीषण बाढ़ के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। इनमें ग्यिरोंग सीमा चौकी का वह वीडियो भी शामिल है, जिसमें तेज बहाव के बीच पानी सबकुछ बहाता नजर आया और लोग अपनी जान बचाकर भागते दिखे।

लेकिन चीन के भीतर इन तस्वीरों और वीडियो की मौजूदगी बेहद सीमित बताई जा रही है। सरकारी टेलीविजन पर भी इस तबाही की बहुत कम तस्वीरें दिखाई गईं। इंटरनेट पर भी बाढ़ में हुई मौतों और लापता लोगों से जुड़ी जानकारी आसानी से उपलब्ध नहीं होने का दावा किया गया है।

राहत अभियान दिखा, लेकिन पीड़ितों का दर्द नहीं

चीनी सरकारी मीडिया की रिपोर्टिंग में प्रभावित इलाकों में चल रहे राहत और बचाव अभियानों को प्रमुखता दी गई। हालांकि, पीड़ितों की स्थिति और तबाही के वास्तविक पैमाने को उतनी जगह नहीं मिलने के सवाल उठ रहे हैं।

तिब्बत के एक राहत शिविर से की गई रिपोर्टिंग के दौरान भी वहां मौजूद पीड़ितों से बातचीत नहीं किए जाने की बात सामने आई है। इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि चीन की ओर से दुनिया को आपदा की कितनी तस्वीर दिखाई जा रही है।

तिब्बत में विदेशी पत्रकारों की आवाजाही पर भी कड़े प्रतिबंध बताए जाते हैं। वे वहां स्वतंत्र रूप से नहीं जा सकते और सरकारी निगरानी में ही काम कर सकते हैं। स्थानीय लोगों के विदेशी मीडिया से बातचीत करने पर भी सख्त पाबंदियां होने की बात कही गई है। इन परिस्थितियों में तिब्बत में हुए वास्तविक नुकसान का स्वतंत्र आकलन करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

विशेषज्ञ ने चीन की सूचना व्यवस्था पर उठाए सवाल

लंदन के सोआस विश्वविद्यालय में चीन संस्थान के निदेशक स्टीव त्सांग का कहना है कि तिब्बत से जुड़ी हर चीज को चीन राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखता है। उनके मुताबिक, शीर्ष स्तर से मंजूरी के बिना ऐसी जानकारी सामने नहीं आ सकती, जिसे सरकार सार्वजनिक नहीं करना चाहती।

उनका कहना है कि अगर किसी व्यक्ति ने आधिकारिक आंकड़े से ज्यादा शव देखे हों, तब भी वह मृतकों की संख्या बढ़ने की जानकारी तब तक सार्वजनिक नहीं कर सकता, जब तक आधिकारिक तौर पर आंकड़ा बढ़ने की घोषणा न हो।

विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन की सेना और आपातकालीन सेवाओं के पास नेपाल की तुलना में बेहतर तकनीक और संसाधन हैं। चीन ने सैकड़ों बचावकर्मियों को भी तैनात किया है, लेकिन सूचना को लेकर बरती जा रही गोपनीयता के कारण उनके वास्तविक राहत कार्यों की पूरी जानकारी दुनिया के सामने नहीं आ पा रही है।

चीनी सरकार ने क्या कहा?

चीनी सरकार का कहना है कि वह आपदा से निपटने के लिए पूरी ताकत से काम कर रही है। सरकारी मीडिया के मुताबिक, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अधिकारियों के साथ बैठक कर चीन और विदेशों में लापता लोगों को तलाशने के लिए हरसंभव प्रयास करने के निर्देश दिए हैं।

शी जिनपिंग ने हालात का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री ली कियांग को मौके पर भेजा। सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, ली कियांग ने कहा कि राष्ट्रपति शी प्रभावित लोगों की सुरक्षा और उनकी मदद को लेकर बेहद चिंतित हैं।

नेपाल और तिब्बत में 633 मौतें, 2,500 अब भी लापता

26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद आई भीषण बाढ़ ने नेपाल और तिब्बत के कई इलाकों को प्रभावित किया है। अब तक नेपाल और तिब्बत में कुल 633 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग अब भी लापता हैं।

लापता लोगों में 320 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा करीब 400 भारतीय नागरिक अभी तिब्बत में फंसे हुए हैं।

महाराष्ट्र के 100 से ज्यादा तीर्थयात्री सुरक्षित निकाले गए

बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी प्रभावित इलाकों में फंस गए थे। काठमांडू में फंसे महाराष्ट्र के 100 से ज्यादा तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।

महाराष्ट्र सरकार की अपील पर बिहार सरकार ने बचाव अभियान चलाया। इन सभी यात्रियों को काठमांडू से भारत लाया गया और पटना से ट्रेन के जरिए महाराष्ट्र भेज दिया गया।

भारत ने नेपाल के लिए भेजी तीसरी विशेष उड़ान

इस मुश्किल समय में भारत नेपाल की मदद के लिए लगातार राहत अभियान चला रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली से काठमांडू के लिए तीसरी विशेष उड़ान भेजी है।

भारत अब तक 40 टन राहत और मानवीय सामग्री नेपाल भेज चुका है। घायलों के इलाज के लिए डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की विशेष टीम भी नेपाल पहुंच चुकी है।

vineet verma

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