नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन नेताओं सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने यह आदेश उस समय दिया, जब दिल्ली पुलिस ने अदालत के सामने दलील दी कि प्रदर्शनकारियों ने पहले दी गई सशर्त जमानत और बेल बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया है।
पुलिस के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रांका को चार दिन पहले भी प्रिवेंटिव अरेस्ट किया गया था। उस समय उन्हें बेल बॉन्ड पर इस शर्त के साथ रिहा किया गया था कि वे भविष्य में शांति भंग नहीं करेंगे। पुलिस ने मजिस्ट्रेट के सामने कहा कि इसके बावजूद दोनों ने दोबारा कानून का उल्लंघन किया और आगे भी ऐसा कर सकते हैं। इसी दलील के बाद तीनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया।
मामला मंगलवार को हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। आरोप है कि सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे अपने समर्थकों के साथ बैरिकेडिंग पार कर जंतर-मंतर के प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर गए थे। यहां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की गई।
उस समय इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू होने की बात कही गई थी। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर डिटेंशन सेंटर पहुंचाया। बाद में तीनों नेताओं को प्रिवेंटिव अरेस्ट किया गया और बुधवार सुबह स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
पुलिस की दलील का मुख्य आधार यह था कि पहले दी गई राहत के बावजूद दोबारा प्रदर्शन कर प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन किया गया। मजिस्ट्रेट ने सुनवाई के बाद पांच दिन की न्यायिक हिरासत का आदेश दिया।
CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर तीनों नेताओं की गिरफ्तारी की जानकारी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में गिरफ्तार किया।
रत्ना सिंह के मुताबिक, नेताओं पर बिना अनुमति प्रवेश करने, बेल बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी अधिकारी के काम में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि नेताओं को देर रात तक अपने वकीलों से मिलने नहीं दिया गया और उन्हें तड़के पुलिस स्टेशन लाया गया।
CJP की ओर से पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, मामले में पुलिस की दलील और मजिस्ट्रेट के न्यायिक हिरासत के आदेश के बीच अंतर को समझना जरूरी है। न्यायिक हिरासत में भेजा जाना अपने आप में आरोपों पर दोषसिद्धि नहीं है।
यह मामला दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थानों में बदलाव के बीच सामने आया है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार की ओर से 11 अक्टूबर को जारी आदेश के तहत रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और CBD ग्राउंड को प्रदर्शन स्थलों के रूप में निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया।
CJP ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि राजधानी के राजनीतिक केंद्र से विरोध-प्रदर्शनों को दूसरी जगह ले जाने से लोगों की असहमति की आवाज कम दिखाई दे सकती है। वहीं, पुलिस ने प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन को कार्रवाई का आधार बनाया है।
CJP और कुछ अन्य संगठनों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर प्रदर्शन किए हैं। इसी मुद्दे पर दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी।
जंतर-मंतर पर हुई कार्रवाई ने विरोध-प्रदर्शन के लिए तय स्थानों, प्रतिबंधात्मक आदेशों और प्रदर्शनकारियों की कानूनी जवाबदेही को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। फिलहाल, सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने का आदेश इस मामले का प्रमुख घटनाक्रम है।
सेक्टर-50 के द क्रिसेंट अपार्टमेंट में वारदात, बंद फ्लैटों को बनाया निशाना दीवार फांदकर घुसने…
राजस्थान के सालासर से मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार गिरफ्तार पोस्टमार्टम के लिए परिवार की सहमति…
लोधी गार्डन से इंडिया गेट तक हुई पदयात्रा में जुटे नागरिक राजलक्ष्मी, यशिका और ऋचा…
अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरकर हुई कारोबारी शिवा शर्मा की मौत की…
राहुल गांधी ने सैद्धांतिक सहमति दी मुख्य चुनाव आयुक्त को प्रतीकात्मक रूप से हटाने पर…
लखनऊ: वेतन विसंगतियों को लेकर पिछले 40 दिनों से आंदोलन कर रहे बॉन्डेड डॉक्टरों के…