ग्लोबल आईटी दिग्गज Infosys को फ्रांस में एक बड़े प्रशासनिक झटके का सामना करना पड़ा है। फ्रांस के लेबर रेगुलेटर DRIEETS Île-de-France (दिशा-निर्देश और श्रम विभाग) ने कंपनी की फ्रांसीसी इकाई पर 175,000 (लगभग 1.5 से 2 करोड़ रुपये) का जुर्माना आयोजित किया है। यह कार्रवाई कर्मचारियों के काम के घंटे को सही तरीके से ट्रैक न कर पाने और उससे जुड़े सिस्टम में पाई गई कमियों के चलते की गई है।
क्या है पूरा मामला?
फ्रांस में कर्मचारियों के वर्किंग आवर्स, ओवरटाइम और रेस्ट पीरियड्स को लेकर बेहद सख्त कानून लागू हैं। फ्रेंच रेगुलेटर के निरीक्षण में यह बात सामने आई कि इन्फोसिस द्वारा अपने कर्मचारियों के काम के समय को रिकॉर्ड करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा ‘Time Tracking System’ स्थानीय श्रम मानकों पर खरा नहीं उतर रहा था।
जांच अधिकारियों के अनुसार, सिस्टम में मुख्य रूप से तीन बड़ी कमियां पाई गईं, डेटा सटीक और छेड़छाड़-मुक्त न होना। रेगुलेटर्स द्वारा सिस्टम का आसानी से निरीक्षण या ऑडिट न हो पाना, कुछ श्रेणियों के कर्मचारियों के काम के घंटों पर लगातार और पारदर्शी नज़र रखने की व्यवस्था में ढील।
इन्फोसिस का रुख और बिजनेस पर असर
मामला सामने आने के बाद, इन्फोसिस ने 25 जुलाई 2026 को भारतीय शेयर बाजारों (BSE और NSE) को एक आधिकारिक नियामक फाइलिंग के जरिए इसकी जानकारी दी। कंपनी ने निवेशकों और हितधारकों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि:
इस पेनल्टी से कंपनी के फाइनेंशियल हेल्थ पर कोई बड़ा या प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। कंपनी का दैनिक कामकाज पूरी तरह सामान्य रूप से जारी रहेगा। कंपनी यूरोपीय संघ और फ्रांस के श्रम व गोपनीयता कानूनों का पालन करने के लिए अपने इंटरनल ट्रैकिंग सिस्टम में आवश्यक सुधार कर रही है।
यूरोप में वर्क-लाइफ बैलेंस और ट्रैकिंग के सख्त नियम
यूरोपीय देशों, खासकर फ्रांस में कर्मचारियों के अधिकारों और Work-Life Balance को लेकर बहुत कड़े प्रावधान हैं, फ्रांस में एक मानक हफ्ते में 35 घंटे काम का नियम है। इससे अतिरिक्त किया गया काम ‘ओवरटाइम’ के दायरे में आता है। काम के तय घंटों के बाद कर्मचारियों को ईमेल या कॉल का जवाब न देने का कानूनी अधिकार है। कंपनियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे एक ऐसा फुल-प्रूफ डिजिटल सिस्टम रखें जो यह साबित कर सके कि किसी कर्मचारी से तय सीमा से ज्यादा काम नहीं कराया जा रहा है।
टेक एक्सपर्ट्स की राय
ग्लोबल आईटी कंपनियों के लिए यह घटना एक बड़ा सबक है। अलग-अलग देशों में बिजनेस करने के दौरान केवल प्रोजेक्ट डिलीवरी ही नहीं, बल्कि स्थानीय श्रम कानूनों और डिजिटल कंप्लायंस का 100% पालन करना भी बेहद ज़रूरी है।