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नेपाल में जल-प्रलय से 22 लाख टन मलबा, 2359 इमारतें तबाह; 84 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित, अब मलबा हटाना बनी बड़ी चुनौती

vineet verma
Last updated: September 3, 2026 4:00 am
vineet verma
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काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण जल-प्रलय और भूस्खलन ने कई इलाकों में तबाही का ऐसा निशान छोड़ा है, जिससे उबरना बड़ी चुनौती बन गया है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब लाखों टन मलबा रास्तों और प्रभावित इलाकों में जमा है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम यानी UNDP के शुरुआती आकलन के मुताबिक, छह जिलों की 17 नगरपालिकाओं में 84,270 लोग प्रभावित हुए हैं।

Contents
22 लाख टन मलबे ने बढ़ाई मुश्किल84 हजार से ज्यादा लोगों की जिंदगी प्रभावितजलविद्युत परियोजनाओं पर भी पड़ा असरअभी और बढ़ सकता है तबाही का आंकड़ा

शुरुआती सर्वे में 2,359 इमारतों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, राहत और बचाव अभियान के साथ प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत सर्वे जारी है, इसलिए नुकसान का आंकड़ा आगे बढ़ सकता है। इस आपदा में अब तक 1,204 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,216 लोग अभी भी संपर्क में नहीं हैं। रेस्क्यू टीम ने आज 11,993 लोगों को सुरक्षित निकाला है। बचाव अभियान में नेपाल के 21,314 कर्मी जुटे हुए हैं।

अब तक बरामद 1,204 शवों में से 115 रसुवा, 155 नुवाकोट, 60 धाडिंग, 69 गोरखा, 217 नवलपरासी पूर्व, 202 नवलपरासी पश्चिम, 38 तनहुन और 348 चितवन में मिले हैं।

22 लाख टन मलबे ने बढ़ाई मुश्किल

बाढ़ का पानी अपने साथ इतनी बड़ी मात्रा में मलबा बहाकर लाया कि कई इलाकों की तस्वीर बदल गई। जगह-जगह मिट्टी, पत्थर और बड़ी चट्टानों के साथ मकानों के टूटे हिस्से, घरेलू सामान और पेड़-पौधे जमा हैं।

UNDP के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, कुल मलबे में करीब 5.56 लाख टन हिस्सा इमारतों से निकला है। बाकी मलबे में मिट्टी, पत्थर, पेड़ और अन्य सामग्री शामिल है।

मलबे का इतना बड़ा ढेर राहत और बचाव अभियान के सामने नई चुनौती बन गया है। कई स्थानों पर सड़कें और रास्ते बंद हैं, जिससे प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने में परेशानी हो रही है। इसे हटाने के लिए भारी मशीनों के साथ बड़े स्तर पर संसाधनों की जरूरत है।

84 हजार से ज्यादा लोगों की जिंदगी प्रभावित

इस आपदा का असर सिर्फ घरों और बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है। छह जिलों की 17 नगरपालिकाओं में 84,270 लोग प्रभावित हुए हैं। कई परिवारों के घर क्षतिग्रस्त हो गए और घरेलू सामान बर्बाद हो गया। ऐसे में लोगों के सामने रहने की जगह, भोजन और रोजमर्रा की जरूरी चीजों का संकट खड़ा हो गया है।

UNDP के मुताबिक, प्रभावित आबादी में करीब 67.4 फीसदी लोग खेती-किसानी से जुड़े हैं। ऐसे में खेतों और फसलों को हुआ नुकसान उनकी आय पर सीधा असर डाल सकता है। मानसून के दौरान आई इस बाढ़ ने पहले से मुश्किल हालात का सामना कर रहे किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है।

जलविद्युत परियोजनाओं पर भी पड़ा असर

बाढ़ ने नेपाल की बिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचाया है। शुरुआती आकलन के अनुसार, 11 जलविद्युत परियोजनाएं और एक सौर ऊर्जा संयंत्र प्रभावित हुए हैं। इनकी कुल बिजली उत्पादन क्षमता 431.1 मेगावाट बताई गई है।

इसके अलावा निर्माणाधीन 15 बिजली परियोजनाएं भी बाढ़ की चपेट में आई हैं। इनकी कुल क्षमता करीब 470 मेगावाट है। नुकसान के कारण इन परियोजनाओं का काम प्रभावित होने के साथ इनके पूरा होने में देरी की आशंका है।

अभी और बढ़ सकता है तबाही का आंकड़ा

UNDP के ये आंकड़े फिलहाल शुरुआती आकलन पर आधारित हैं। प्रभावित क्षेत्रों में विस्तृत सर्वे और राहत-बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। ऐसे में प्रभावित लोगों और क्षतिग्रस्त इमारतों की संख्या के साथ मलबे से जुड़े आंकड़ों में भी बदलाव संभव है।

फिलहाल 22 लाख टन मलबे का जमा होना और 84 हजार से ज्यादा लोगों का प्रभावित होना आपदा की भयावहता को बताने के लिए काफी है। बाढ़ का पानी भले ही कई इलाकों से उतर चुका हो, लेकिन पीछे छूटा मलबा प्रभावित लोगों के लिए नई मुसीबत बन गया है। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती रास्ते साफ करने के साथ प्रभावित परिवारों तक राहत और जरूरी सुविधाएं पहुंचाने की है।

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