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Reading: रूसी तेल खरीदारों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव!  क्या दांव पर लगेंगे भारत-अमेरिका के कमर्शियल रिश्ते?
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रूसी तेल खरीदारों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव!  क्या दांव पर लगेंगे भारत-अमेरिका के कमर्शियल रिश्ते?

news desk
Last updated: July 18, 2026 11:27 am
news desk
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ग्लोबल एनर्जी मार्केट और जियो-पॉलिटिक्स में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने के संकेत हैं। अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए एक नए ड्राफ्ट बिल ने नई दिल्ली से लेकर बीजिंग तक के नीति-निर्माताओं को अलर्ट मोड पर डाल दिया है।

Contents
वाशिंगटन का डबल स्टैंडर्ड?रूस से भारत की तेल खरीद के मायनेभारत का स्टैंडक्या वाकई खतरे में है भारत-यूएस ट्रेड डील?

इस बिल में प्रस्ताव रखा गया है कि जो भी देश रूस से कच्चा तेल इम्पोर्ट कर रहे हैं, उन पर 100% का भारी-भरकम टैरिफ थोप दिया जाए। भारत, जो कि वर्तमान में रूसी क्रूड का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद करीबी नजर बनाए हुए है।

वाशिंगटन का डबल स्टैंडर्ड?

इस अमेरिकी बिल को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसके ‘सेलेक्टिव अप्रोच’ और दोहरे मापदंडों (Double Standards) की हो रही है। एक तरफ जहां भारत, चीन, स्लोवाकिया और हंगरी जैसे देशों को रूस से तेल खरीदने के एवज में आर्थिक पेनल्टी 100% टैरिफ की धमकी दी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ वेस्टर्न ब्लॉक को बड़ी चतुराई से सेफ जोन में रखा गया है।

प्रस्ताव के मुताबिक, यूरोपियन यूनियन को रूस से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) खरीदने की खुली छूट रहेगी। इतना ही नहीं, खुद अमेरिका भी अपने न्यूक्लियर रिएक्टर्स को चालू रखने के लिए रूस से यूरेनियम और मेडिकल सेक्टर के लिए जरूरी फार्मा इंग्रीडिएंट्स की खरीद जारी रख सकेगा। इसी विरोधाभास के कारण एक्सपर्ट्स इसे अमेरिका की डिप्लोमैटिक हिपोक्रेसी मान रहे हैं।

रूस से भारत की तेल खरीद के मायने

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन (CREA) के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, केवल जून महीने में ही भारत ने 4.5 अरब यूरो (लगभग 45,000 करोड़ रुपये से अधिक) मूल्य का रूसी कच्चा तेल खरीदा है। मिडल-ईस्ट में बढ़ते इजरायल-ईरान तनाव के बीच भारत ने अपनी डोमेस्टिक एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए रूस से होने वाले इम्पोर्ट में 34% की बढ़ोतरी की है।

भारत का स्टैंड

भारत शुरू से ही इस मुद्दे पर बेहद लाउड एंड क्लियर रहा है। नई दिल्ली का हमेशा से तर्क रहा है कि भारत की प्राथमिकता अपने 140 करोड़ नागरिकों को किफायती दरों पर पेट्रोल-डीजल मुहैया कराना और देश की एनर्जी सिक्योरिटी सुनिश्चित करना है। अगर भारत ने इंटरनेशनल मार्केट से डिस्काउंटेड रूसी तेल नहीं खरीदा होता, तो ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें $100 के पार चली जातीं, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई का एक नया दौर शुरू हो जाता।

भारतीय रणनीतिकारों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट के तनाव के बीच रूसी तेल पर इस तरह के प्रतिबंध लगाने की कोशिश की गई, तो इससे ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह क्रैश हो जाएगी, जिसका खामियाजा खुद अमेरिकी कंज्यूमर्स को भी भुगतना पड़ेगा।

क्या वाकई खतरे में है भारत-यूएस ट्रेड डील?

यह विवाद ऐसे नाजुक मोड़ पर सामने आया है जब भारत और अमेरिका एक बड़े फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत की मेज पर हैं। अगर यह बिल अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से पास होकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास पहुंचता है और कानून का रूप लेता है, तो निश्चित तौर पर दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों में कड़वाहट आ सकती है।

हालांकि, पॉलिसी एक्सपर्ट्स इसे फिलहाल पैनिक का कारण नहीं मान रहे हैं। यह अभी सिर्फ एक ‘प्रस्तावित बिल’ है। इतिहास गवाह है कि राष्ट्रपति ट्रंप पहले भी भारत पर 25% टैरिफ की बात कह चुके थे, लेकिन बाद में कूटनीतिक बातचीत और स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के महत्व को देखते हुए अमेरिका को पीछे हटना पड़ा था। इस बार भी भारत की निगाहें वाशिंगटन की अगली चाल पर टिकी हैं।

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