नई दिल्ली: आयुर्वेद में औषधीय गुणों से भरपूर मानी जाने वाली तुलसी सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं रखती, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद लाभकारी मानी जाती है। कई शोधों और आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, तुलसी की पत्तियां ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और शरीर को कई बीमारियों से बचाने में सहायक हो सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि डायबिटीज के मरीज इसे दवाओं का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक उपाय के रूप में ही अपनाएं।
आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. सलीम जैदी के अनुसार, तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीवायरल गुण पाए जाते हैं। उनका कहना है कि नियमित रूप से सीमित मात्रा में तुलसी की पत्तियों का सेवन ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है।
वहीं, कई शोधों में यह भी सामने आया है कि तुलसी का अर्क अग्न्याशय की बीटा कोशिकाओं को सक्रिय करने और इंसुलिन के स्राव को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। इससे शरीर ग्लूकोज का बेहतर उपयोग कर पाता है।
एक क्लिनिकल अध्ययन के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों को रोजाना सुबह तुलसी के पाउडर का सेवन कराया गया। अध्ययन में शामिल लोगों की फास्टिंग ब्लड शुगर में 17.6 प्रतिशत और भोजन के बाद की ब्लड शुगर में 7.3 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई। माना जाता है कि तुलसी कार्बोहाइड्रेट के पाचन की गति को धीमा कर अचानक बढ़ने वाले ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने पर शरीर में फ्री रेडिकल्स बढ़ जाते हैं, जो आंखों, किडनी, नसों और हृदय को नुकसान पहुंचा सकते हैं। तुलसी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट इन फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं, जिससे डायबिटीज से जुड़ी जटिलताओं का खतरा घट सकता है।
तुलसी में विटामिन सी, यूजेनॉल और कई प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं। यही वजह है कि सर्दी, जुकाम और मौसमी संक्रमण के दौरान भी इसका इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में मददगार मानी जाती है।
तुलसी को एडाप्टोजेनिक गुणों वाला पौधा माना जाता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, यह तनाव हार्मोन कोर्टिसोल के स्तर को संतुलित रखने में मदद कर सकती है। तनाव कम होने से ब्लड शुगर पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, तुलसी पाचन एंजाइमों के स्राव को बेहतर बनाने, गैस, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक हो सकती है। स्वस्थ पाचन तंत्र ग्लूकोज के बेहतर अवशोषण और वजन नियंत्रण में भी मदद करता है।
कुछ शोधों में संकेत मिले हैं कि तुलसी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट ऑक्सीडेटिव तनाव कम करने के साथ कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप को नियंत्रित रखने में भी मदद कर सकते हैं। हालांकि इस विषय पर अभी और वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है।
यदि आप डायबिटीज, खून पतला करने वाली दवाएं या किसी गंभीर बीमारी की दवा ले रहे हैं, तो नियमित रूप से तुलसी का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी बिना चिकित्सकीय सलाह के इसका नियमित सेवन नहीं करना चाहिए। डायबिटीज के मरीज अपनी दवाएं बंद न करें और तुलसी को केवल सहायक उपाय के रूप में ही इस्तेमाल करें।
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