नई दिल्ली: भारतीय रसोई का अहम मसाला लौंग स्वाद और खुशबू बढ़ाने के साथ-साथ कई औषधीय गुणों से भी भरपूर मानी जाती है। आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल पाचन, दांत दर्द, खांसी-जुकाम और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए लंबे समय से किया जाता रहा है। हालांकि, आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का कहना है कि लौंग का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि जरूरत से ज्यादा लौंग खाना सेहत के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है।
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ. विनोद शर्मा के मुताबिक, सामान्य तौर पर एक दिन में 1 से 2 लौंग का सेवन पर्याप्त माना जाता है। इससे अधिक मात्रा में नियमित रूप से लौंग खाने पर शरीर में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
लौंग में कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, प्रोटीन, विटामिन C, विटामिन K, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम और मैंगनीज जैसे कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें यूजेनॉल नामक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होता है, जो इसे दर्द निवारक और सूजन कम करने वाले गुण प्रदान करता है।
सीमित मात्रा में लौंग का सेवन बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण से बचाव में मदद कर सकता है। यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, मुंह की दुर्गंध कम करने और दांतों व मसूड़ों की सेहत बनाए रखने में भी सहायक माना जाता है।
लौंग में प्राकृतिक रूप से खून को पतला करने वाले गुण पाए जाते हैं। सीमित मात्रा में यह लाभकारी हो सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है। खासकर जो लोग पहले से ब्लड थिनर दवाएं ले रहे हैं, उन्हें अधिक लौंग खाने से बचना चाहिए।
लौंग में मौजूद यूजेनॉल अधिक मात्रा में लेने पर लिवर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर लिवर डैमेज या टॉक्सिसिटी का जोखिम बढ़ सकता है। पहले से लिवर की बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
जरूरत से ज्यादा लौंग खाने से पेट दर्द, गैस, एसिडिटी, उल्टी, मिचली और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लौंग की तासीर गर्म मानी जाती है, इसलिए अधिक मात्रा में इसका सेवन पेट की अंदरूनी परत को भी प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को लौंग का अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए। ज्यादा लौंग खाने से पेट में जलन, ऐंठन या हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना बेहतर होता है।
दांत दर्द में लौंग के तेल का इस्तेमाल आम है, लेकिन इसे अधिक मात्रा में या सीधे लगाने से मुंह में जलन, छाले, सूजन और सुन्नपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए लौंग के तेल का उपयोग हमेशा सावधानी और सीमित मात्रा में करना चाहिए।
कुछ लोगों को लौंग या इससे बने उत्पादों से एलर्जी हो सकती है। ऐसे मामलों में खुजली, त्वचा पर चकत्ते, सूजन, मुंह में जलन या सांस लेने में दिक्कत जैसी प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। यदि लौंग खाने के बाद इस तरह के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत इसका सेवन बंद कर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
नई दिल्ली: वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसे पौधों का विशेष महत्व बताया गया है, जिन्हें…
नई दिल्ली: वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रहों से जुड़े अलग-अलग रत्नों का उल्लेख मिलता है।…
नई दिल्ली: अगर आप अपनी बालकनी को कम खर्च में आकर्षक और सुकूनभरी जगह बनाना…
नई दिल्ली: गर्मियों के मौसम में हर महिला ऐसे कपड़े पहनना चाहती है जो देखने…
नई दिल्ली: घर का वॉश बेसिन रोजाना इस्तेमाल होने के कारण जल्दी गंदा हो जाता…
नई दिल्ली: डायबिटीज ऐसी बीमारी है, जिसे पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं है, लेकिन…