तेहरान/मॉस्को। मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के रिश्तों में तल्खी चरम पर पहुंच गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समझौते के लिए दी जा रही ‘डेडलाइन’ और चेतावनियों का ईरान पर कोई असर नहीं दिख रहा है।
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के आगे घुटने नहीं टेकेगा। इस बीच, रूस और ईरान की बढ़ती नजदीकियों ने व्हाइट हाउस की नींद उड़ा दी है।
ईरानी विदेश मंत्री ने हाल ही में पाकिस्तान, ओमान और रूस की यात्रा कर अपना पक्ष मजबूत किया है। मॉस्को में उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी दबाव में सरेंडर नहीं करेगा। ईरान ने समझौते के लिए अमेरिका के सामने 3 प्रमुख शर्तें रखी हैं। अरागची के अनुसार, ट्रंप प्रशासन की अनुचित मांगें ही कूटनीतिक समाधान में सबसे बड़ी बाधा हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम लीडर अली खामनेई से जुड़ी घटनाओं और पिछले युद्धों ने भले ही ईरानी व्यवस्था को झटका दिया हो, लेकिन रूस के साथ इस साझेदारी ने अब किसी भी सीधे सैन्य संघर्ष को अमेरिका के लिए बेहद ‘महंगा और जटिल’ बना दिया है। पुतिन का खुला समर्थन ट्रंप के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन गया है।
यह समझना जरूरी है कि रूस और ईरान के बीच कोई ‘नाटो’ जैसा रक्षा समझौता नहीं है। 2025-26 के संघर्षों के दौरान भी रूस ने खुद को कूटनीतिक निंदा और सीमित तकनीकी सहायता तक ही सीमित रखा। रूस ने कभी भी प्रत्यक्ष रूप से अपनी सेना ईरान के समर्थन में नहीं उतारी। इसके बावजूद, रूस की महज मौजूदगी ही अमेरिका को पूर्ण पैमाने (Full-scale) की सैन्य कार्रवाई से रोकने के लिए काफी रही है।
ईरान ने अपनी सैन्य रणनीति को ‘एसिमिट्रिक वॉरफेयर’ पर केंद्रित किया है। सस्ते लेकिन घातक ड्रोनों, लंबी दूरी की मिसाइलों और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों के उपयोग ने युद्ध को बहुत लंबा और खर्चीला बना दिया है। अमेरिका के लिए अब चुनौती सिर्फ सैन्य नहीं है; उसे अब आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चे पर रूस और चीन के उस साझा नेटवर्क का सामना करना पड़ रहा है जो वैश्विक व्यवस्था को चुनौती दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब ईरान पर कोई भी बड़ा हमला केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहेगा, बल्कि यह तेजी से वैश्विक युद्ध (Global Conflict) में तब्दील हो सकता है। यही कारण है कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ जैसी कार्रवाइयों के बावजूद, अमेरिका अब सीधे टकराव के बजाय प्रतिबंधों और दबाव की नीति पर अधिक निर्भर है।
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