मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में कारोबारी की 23 वर्षीय बेटी अदीला रहमान की गुमशुदगी का मामला अब हत्या की सनसनीखेज वारदात में बदल गया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि अदीला की हत्या उसके पति गुलफाम अली ने की थी। आरोपी ने पूछताछ में कबूल किया कि पारिवारिक विवाद के चलते उसने थार एसयूवी के भीतर अदीला को गोली मार दी। पुलिस के मुताबिक, यही थार अदीला ने कुछ समय पहले अपने पति को उपहार में दी थी।
पुलिस के अनुसार, आरोपी गुलफाम अली ने इसी साल अप्रैल में अजमेर शरीफ में अदीला रहमान से प्रेम विवाह किया था। दोनों नोएडा में किराये के फ्लैट में रह रहे थे। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि अदीला चाहती थी कि वह अपने परिवार से सभी रिश्ते खत्म कर ले। इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था, जो आखिरकार हत्या की वजह बन गया।
अदीला रहमान हैदराबाद में एलएलबी की पढ़ाई कर रही थी। 25 जून को वह परिवार को परीक्षा देने जाने की बात कहकर घर से निकली थी। 29 जून को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद उसका मोबाइल बंद हो गया। काफी तलाश के बावजूद कोई सुराग नहीं मिलने पर 18 जुलाई को उसकी मां ने कटघर थाने में गुलफाम अली और उसके भाई कुरबान अली के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कराया था।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गुलफाम अली एक साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में रामपुर की जेल में बंद है। अदालत से अनुमति मिलने के बाद पुलिस टीम ने जेल पहुंचकर उससे पूछताछ की। इसी दौरान आरोपी ने पूरी वारदात कबूल कर ली।
पुलिस के मुताबिक, 30 जून को अदीला दिल्ली से मुरादाबाद के लिए निकली थी। गुलफाम थार लेकर उसे लेने जोया पहुंचा। रास्ते में दोनों के बीच फिर विवाद हुआ। आरोप है कि दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर पुराने टोल प्लाजा के पास गुस्से में गुलफाम ने तमंचे से अदीला की कनपटी पर गोली मार दी।
हत्या के बाद आरोपी शव को कार से रुड़की के मंगलौर क्षेत्र की नहर तक ले गया और वहां फेंक दिया। इसके बाद वह रामपुर पहुंचा और पुलिस से बचने के लिए पुराने मामले में अदालत में सरेंडर कर जेल चला गया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि अदीला ही गुलफाम के अधिकांश खर्च उठाती थी। पुलिस के अनुसार, थार एसयूवी भी अदीला ने ही अपने पति को उपहार में दी थी। इसी वाहन में आरोपी ने कथित तौर पर हत्या की वारदात को अंजाम दिया।
हत्या के बाद नहर में फेंका गया अदीला का शव 4 जुलाई को रुड़की के मंगलौर क्षेत्र में बरामद हुआ था। उस समय शव की पहचान नहीं हो सकी। स्थानीय पुलिस ने नियमानुसार 72 घंटे तक पहचान कराने की कोशिश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिलने पर शव का लावारिस के रूप में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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