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लखनऊ अग्निकांड: 15 मौतों वाली चार मंजिला इमारत पर चला बुलडोजर, रास्ते सील; 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात

लखनऊ: अलीगंज में 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड में 15 युवाओं की मौत के बाद हादसे वाली अवैध चार मंजिला व्यावसायिक इमारत को शनिवार से ध्वस्त किया जाने लगा। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने तय समय सीमा समाप्त होने के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मौके पर 100 से अधिक पुलिसकर्मी, तीन बुलडोजर और एलडीए की टीम तैनात है, जबकि आसपास के रास्तों को सील कर बैरिकेडिंग कर दी गई है।

15 दिन की मोहलत खत्म होने के बाद शुरू हुई कार्रवाई

एलडीए के विहित न्यायालय ने 10 जुलाई को भवन ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था। आदेश में कॉम्प्लेक्स के मालिक वीरेंद्र शुक्ल और सुरेंद्र शुक्ल को 15 दिनों के भीतर स्वयं अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित समय सीमा 25 जुलाई तक भवन नहीं गिराए जाने पर एलडीए के प्रवर्तन दस्ते ने शनिवार को बुलडोजर चलाकर ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया।

ऊपरी मंजिल तक पहुंचने के लिए बनाया गया मलबे का रैंप

ध्वस्तीकरण के दौरान सबसे पहले मशीनों को भवन की ऊपरी मंजिल तक पहुंचाने के लिए मलबे का रैंप तैयार किया गया। इसके बाद इमारत के ऊपरी हिस्से को तोड़ने का काम शुरू हुआ। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।

एक महीने बाद भी कई सवालों के जवाब नहीं

22 जून को हुए अग्निकांड के एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की पूरी जवाबदेही तय नहीं हो सकी है। दो सदस्यीय एसआईटी और एलडीए की आंतरिक जांच की रिपोर्ट भी अब तक सामने नहीं आई है। घटना के बाद संबंधित विभागों से जिम्मेदार अधिकारियों की सूची मांगी गई, लेकिन जांच अभी तक पूरी नहीं हो सकी।

पांच अधिकारी निलंबित, मुख्य आरोपी अब भी फरार

अब तक की कार्रवाई में पांच अधिकारियों और कुछ कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। वहीं, भवन मालिकों में से एक आरोपी की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है। उसकी गिरफ्तारी पर घोषित इनामी राशि बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी गई है।

22 जून को आग में गई थीं 15 लोगों की जान

अलीगंज स्थित अवैध व्यावसायिक इमारत में 22 जून को लगी भीषण आग में 15 युवाओं की मौत हो गई थी, जबकि नौ अन्य लोग घायल हुए थे। घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौके का निरीक्षण किया था और अपर मुख्य सचिव पर्यटन अमृत अभिजात तथा एडीजी जोन लखनऊ प्रवीण कुमार को एसआईटी जांच सौंपते हुए सात दिन के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे।

vineet verma

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