हल्द्वानी (उत्तराखंड)। उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित ऐतिहासिक रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद हुए तथाकथित “शुद्धिकरण” विवाद ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में हल्द्वानी कोतवाली पुलिस ने अधिवक्ता अंजू की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई कांग्रेस आलाकमान के दखल और देशभर में उपजे सियासी जनाक्रोश के बाद सामने आई है।
पुलिस ने यह मामला महिला अधिवक्ता की लिखित शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 299 (धार्मिक भावनाओं को आहत करना) और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(r) के तहत पंजीकृत किया है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हल्द्वानी के एसपी (क्राइम) डॉ. जगदीश चंद्र को इस जांच का जिम्मा सौंपा गया है। शिकायत में सीधे तौर पर जाति-आधारित भेदभाव, सामाजिक अपमान और अनुसूचित जाति के संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के प्रति नफरत और तिरस्कार की भावना फैलाने का आरोप लगाया गया है।
हल्द्वानी पुलिस अब सोशल मीडिया पर वायरल हुई तमाम वीडियो क्लिप्स और तस्वीरों को फॉरेंसिक जांच के लिए कब्जे में लेने की तैयारी कर रही है। पुलिस का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि:
हल्द्वानी का यह घटनाक्रम केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने राष्ट्रीय राजनीति में भी तूफान खड़ा कर दिया:
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