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G7 समिट पर क्यों टिकी है पूरी दुनिया की नजर? युद्ध रोकने से लेकर वैश्विक फैसलों तक, इस बार भारत की भूमिका कितनी अहम

vineet verma
Last updated: June 17, 2026 2:04 am
vineet verma
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पेरिस: दुनिया की सबसे प्रभावशाली अर्थव्यवस्थाओं का मंच माने जाने वाले जी7 शिखर सम्मेलन पर इस बार पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में आयोजित इस सम्मेलन में वैश्विक सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और युद्ध जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है। रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया में बने तनाव के बीच यह बैठक वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है।

Contents
दुनिया के लिए इतना अहम क्यों है जी7 का मंच?भारत की भूमिका इस बार क्यों मानी जा रही है खास?क्या पश्चिम एशिया संकट पर निकल सकता है बड़ा संदेश?किन बड़े नेताओं की मौजूदगी ने बढ़ाई अहमियत?यूरोप दौरे के अंतिम चरण में फ्रांस पहुंचे पीएम मोदी

इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए हैं। सम्मेलन के दौरान कई शीर्ष नेताओं की मौजूदगी ने इसकी अहमियत और बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में इस मंच से कई बड़े संकेत निकलने की उम्मीद जताई जा रही है।

दुनिया के लिए इतना अहम क्यों है जी7 का मंच?

जी7 दुनिया की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह माना जाता है, जहां वैश्विक आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक चुनौतियों पर चर्चा होती है।

इस बार का सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया एक साथ कई बड़े संकटों का सामना कर रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता जैसे मुद्दे एजेंडे के केंद्र में बताए जा रहे हैं।

माना जा रहा है कि सम्मेलन के दौरान कई अहम कूटनीतिक बातचीत भी हो सकती है, जिनका असर आने वाले महीनों की अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर दिखाई दे सकता है।

भारत की भूमिका इस बार क्यों मानी जा रही है खास?

भारत जी7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन लगातार आठवीं बार उसे इस मंच पर शामिल होने का निमंत्रण मिला है। इसे भारत की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता और कूटनीतिक महत्व से जोड़कर देखा जा रहा है।

भारत ने रूस-यूक्रेन संघर्ष और अमेरिका-ईरान तनाव जैसे मुद्दों पर लगातार बातचीत और संतुलित कूटनीति का समर्थन किया है। भारत के संबंध पश्चिमी देशों और रूस दोनों के साथ मजबूत माने जाते हैं, ऐसे में भारत को संभावित संवाद सेतु के रूप में भी देखा जा रहा है।

क्या पश्चिम एशिया संकट पर निकल सकता है बड़ा संदेश?

सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर सहमति बनने की चर्चा है। इसी वजह से इस बैठक पर अतिरिक्त ध्यान दिया जा रहा है।

माना जा रहा है कि सम्मेलन के बाद पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस मंच पर बनी हुई है।

किन बड़े नेताओं की मौजूदगी ने बढ़ाई अहमियत?

तीन दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में कई प्रमुख देशों के शीर्ष नेता शामिल हुए हैं।

सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहुंचे। उनके बाद जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्त्ज, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची सहित कई वैश्विक नेता पहुंचे।

बैठक में वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद जताई जा रही है।

यूरोप दौरे के अंतिम चरण में फ्रांस पहुंचे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने यूरोप दौरे के अंतिम चरण में फ्रांस पहुंचे हैं। इससे पहले उन्होंने स्लोवाकिया का दो दिवसीय दौरा पूरा किया था। इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने की दिशा में अहम माना गया।


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