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महिलाओं में क्यों बढ़ रहा है PCOD का खतरा ? असली वजह क्या है और कैसे हो सकता बचाव ?

आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में महिलाओं की सेहत से जुड़ी कई समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिनमें PCOD (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिज़ीज़) एक बड़ी और गंभीर चुनौती बन चुकी है। यह केवल पीरियड्स की गड़बड़ी तक सीमित बीमारी नहीं है, बल्कि हार्मोन, मेटाबॉलिज़्म और मेंस्ट्रुअल फेज में होने वाले बदलाव को प्रभावित करती है। चिंता की बात यह है कि कम उम्र की लड़कियों और युवतियों में भी PCOD के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कई लड़कियां और महिलाएं इससे जूझ रही हैं, लेकिन सही जानकारी न होने की वजह से इसे हल्के में ले लिया जाता है। ये कोई छोटी परेशानी नहीं है, बल्कि शरीर के हार्मोन बिगड़ने से होने वाली बीमारी है, जो पीरियड्स से लेकर प्रेगनेंसी तक असर डालती है।

PCOD आखिर होता क्या है?

PCOD में महिलाओं के शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है। ओवरी ठीक से काम नहीं कर पाती और अंडा हर महीने सही तरीके से नहीं बन पाता। इसी वजह से पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और कई दूसरी परेशानियां शुरू हो जाती हैं।

महिलाओं में PCOD क्यों बढ़ रहा है?

PCOD बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है गलत लाइफस्टाइल। बाहर का तला-भुना खाना, देर रात तक जागना, एक्सरसाइज न करना, ज्यादा तनाव लेना और बढ़ता वजन। ये सब PCOD को बढ़ाते हैं। इसके अलावा शरीर में शुगर को ठीक से कंट्रोल न कर पाना भी बड़ी वजह बनता है।

PCOD के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

विशेषज्ञों के मुताबिक, PCOD के कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें महिलाएं अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती हैं, जैसे पीरियड्स का देर से आना या कई महीनों तक न आना, चेहरे, ठुड्डी या पेट पर अनचाहे बाल, बिना वजह तेजी से वजन बढ़ना, बार-बार मुंहासे निकलना, सिर के बालों का झड़ना या पतले होना। 

PCOD को नज़रअंदाज़ करने से क्या खतरा है?

अगर PCOD का समय पर इलाज न हो, तो आगे चलकर डायबिटीज़, मोटापा, ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही यह महिलाओं की मां बनने की क्षमता पर भी असर डाल सकता है।

PCOD और प्रेगनेंसी का क्या रिश्ता है?

PCOD होने का मतलब यह नहीं कि महिला कभी मां नहीं बन सकती। लेकिन इसमें गर्भ ठहरने में समय लग सकता है। सही इलाज, वजन कंट्रोल और डॉक्टर की सलाह से ज़्यादातर महिलाएं आसानी से प्रेगनेंट हो जाती हैं।

PCOD से बचाव कैसे करें?

PCOD को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे कंट्रोल किया जा सकता है. रोज़ हल्की एक्सरसाइज या योग,  बाहर का जंक फूड कम करना, वजन को काबू में रखना,  तनाव से दूर रहना,  समय-समय पर डॉक्टर से जांच

कुल मिला कर PCOD को नज़रअंदाज़ करना सही नहीं है। शरीर जो संकेत दे रहा है, उसे समझना और समय पर इलाज कराना ही स्वस्थ जीवन की सबसे बड़ी कुंजी है।

news desk

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