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हर साल क्यों बदल जाती है अमरनाथ यात्रा की तारीख? जानिए पंचांग का गणित, श्राइन बोर्ड की भूमिका और 57 दिन की यात्रा का पूरा कारण

vineet verma
Last updated: July 4, 2026 12:00 am
vineet verma
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जम्मू: 3 जुलाई 2026 से पवित्र अमरनाथ यात्रा का शुभारंभ हो गया है। शुक्रवार को श्रद्धालुओं का पहला जत्था जम्मू से पहलगाम के लिए रवाना हुआ, जहां से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पैदल यात्रा शुरू होगी। हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते हैं। हालांकि एक सवाल हर बार लोगों के मन में उठता है कि अमरनाथ यात्रा की शुरुआत हर वर्ष अलग-अलग तारीख पर क्यों होती है।

Contents
हिंदू पंचांग के आधार पर तय होती है यात्रा की शुरुआतकौन करता है यात्रा की तारीख का अंतिम फैसला?इस साल 57 दिनों तक चलेगी पवित्र यात्राअंग्रेजी कैलेंडर और हिंदू पंचांग में यही है सबसे बड़ा अंतर3.5 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने कराया पंजीकरणक्यों मानी जाती है अमरनाथ यात्रा सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में से एक?

दरअसल, अमरनाथ यात्रा की तिथियां हर साल बदलती हैं। वर्ष 2021 में यात्रा 28 जून से शुरू हुई थी, जबकि 2023 में इसकी शुरुआत 1 जुलाई से हुई। इसी तरह 2026 में यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई है। इसके पीछे धार्मिक परंपरा के साथ-साथ हिंदू पंचांग का विशेष गणित जिम्मेदार माना जाता है।

हिंदू पंचांग के आधार पर तय होती है यात्रा की शुरुआत

अमरनाथ यात्रा की तिथि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार नहीं बल्कि हिंदू पंचांग यानी विक्रम संवत के आधार पर निर्धारित की जाती है। परंपरा के अनुसार यात्रा आषाढ़ मास के आरंभ के बाद शुरू होती है और श्रावण पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन समाप्त होती है। इसी अवधि में अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला हिम शिवलिंग अपने पूर्ण स्वरूप में माना जाता है।

कौन करता है यात्रा की तारीख का अंतिम फैसला?

अमरनाथ यात्रा की शुरुआत और समापन की तिथि तय करने की जिम्मेदारी श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड की होती है। गुफा से जुड़े पुजारी और पुरोहित हिंदू पंचांग के अनुसार उपयुक्त तिथियों की जानकारी बोर्ड को देते हैं। इसके बाद मौसम, सुरक्षा, मार्ग और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाती है। सभी पहलुओं का आकलन करने के बाद यात्रा की आधिकारिक तारीख घोषित की जाती है।

इस साल 57 दिनों तक चलेगी पवित्र यात्रा

इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 यानी रक्षाबंधन तक चलेगी। कुल 57 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा पिछले वर्ष की तुलना में कम अवधि की है। वहीं 2024 में यात्रा केवल 38 दिनों तक आयोजित की गई थी।

अंग्रेजी कैलेंडर और हिंदू पंचांग में यही है सबसे बड़ा अंतर

अंग्रेजी कैलेंडर सूर्य की गति पर आधारित होता है और उसमें वर्ष के 365 दिन निश्चित रहते हैं। इसके विपरीत हिंदू पंचांग सूर्य और चंद्रमा दोनों की गति के आधार पर तैयार किया जाता है। यही कारण है कि इसमें तिथियां और मास समय-समय पर बदलते रहते हैं और कई बार दिन के बीच में भी तिथि परिवर्तन हो जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार एक चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि अंग्रेजी कैलेंडर का वर्ष 365 दिनों का होता है। दोनों के बीच करीब 11 दिनों का अंतर रहता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग हर तीन वर्ष में अधिक मास जोड़ा जाता है। इसी बदलाव के कारण पूर्णिमा की तिथि बदलती है और अमरनाथ यात्रा की शुरुआत भी हर साल एक-दो दिन आगे या पीछे हो जाती है।

3.5 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने कराया पंजीकरण

श्राइन बोर्ड के अनुसार वर्ष 2026 की यात्रा के लिए 3.5 लाख से अधिक श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार पंजीकरण कराने वालों की संख्या कम है। वर्ष 2025 में करीब 5 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा अमरनाथ के दर्शन किए थे।

क्यों मानी जाती है अमरनाथ यात्रा सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में से एक?

अमरनाथ गुफा समुद्र तल से लगभग 5,486 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। अधिक ऊंचाई के कारण यहां हवा अपेक्षाकृत पतली होती है, जिससे कई श्रद्धालुओं को सांस लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

गुफा तक पहुंचने के लिए दो प्रमुख मार्ग उपलब्ध हैं। पहला बालटाल मार्ग है, जहां करीब 14 किलोमीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है। यह सबसे छोटा लेकिन सबसे कठिन रास्ता माना जाता है।

दूसरा मार्ग पहलगाम से होकर जाता है। इस रास्ते में श्रद्धालुओं को लगभग 36 से 48 किलोमीटर तक पैदल यात्रा करनी होती है, जिसे आमतौर पर दो से तीन दिनों में पूरा किया जाता है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मार्ग में टेंट, निःशुल्क लंगर, चिकित्सा सहायता और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

 

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